पॉलिटिकल कनेक्शन:राजनेताओं की शह पर सुलग रही थी दो परिवारों में दुश्मनी

कोरिया जिले के सोनहत नौगई गांव में रेत तस्करी के खूनी संघर्ष ने एक ही परिवार के तीन लोगों को कार में जिंदा जला दिया, वहीं दूसरे परिवार के 9 सदस्य इस खौफनाक वारदात के आरोपी बन गए। खूनी संघर्ष की सच्चाई जानने दैनिक भास्कर सोनहत के नौगई गांव पहुंचा। सामने आया कि यह सिर्फ रेत तस्करी का मामला नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक वर्चस्व और राजनेताओं की शह पर पनपी गहरी दुश्मनी का अंत था। इस खूनी संघर्ष में राजनेताओं की मिलीभगत भी उजागर हुई है। महीनेभर पहले नौगई गांव में भरत सिंह उर्फ लल्ला के क्रशर प्लांट में बैठक हुई थी। इसमें भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह और बैकुंठपुर विधायक भइयालाल राजवाड़े मौजूद थे। बैठक का मकसद मनोज त्रिपाठी और भरत सिंह के बीच चिरमी रेत घाट के विवाद को सुलझाना था। मनोज चाहता था कि चिरमी घाट का काम उसे मिले, जबकि ठेका भरत सिंह के भतीजे मयंक के पास था। दोनों भाजपा नेताओं के बीच इस मुद्दे पर तनातनी हुई। बैठक बेनतीजा रही और विवाद की खाई और चौड़ी हो गई। रेत का धंधा इतना बड़ा हो चुका था कि इसमें आरोपी और मृतक का परिवार ही नहीं, नेता भी कूद गए थे और ​​कमीशन को लेकर दबाव बनाया जा रहा ​था। भाजपा नेताओं में खूनी संघर्ष की वजह जानने नौगई गई भास्कर टीम रेत कारोबार ने बढ़ाई दोनों परिवारों की दुश्मनी गांव वालों के मुताबिक 10 साल पहले भी दोनों परिवारों में खूनी संघर्ष हुआ था। गांव के बच्चेलाल यादव ने बताया कि मनोज के बाबा राममिलन त्रिपाठी को लल्ला सिंह के परिवार ने ही गांव में बसाया था। पंचायत ठेकों से शुरू हुआ विवाद जल्द ही व्यापारिक होड़ में बदल गया। लल्ला सिंह जो भी व्यापार करते, त्रिपाठी परिवार भी उसमें कूद पड़ता। प्रतिस्पर्धा के कारण लल्ला सिंह ने पंचायत का काम छोड़ एमईसीएल कंपनी के साथ खनिज सर्वे का काम शुरू कर दिया, लेकिन रेत के मोटे मुनाफे का मोह कोई नहीं छोड़ पाया। वर्चस्व की लड़ाई का इस तरह हुआ खूनी अंत
16 जून की दोपहर मयंक और उसके साथियों ने सोनहत से बैकुंठपुर रेत ले जाते टिपर को शिवघाट के पास रोककर झगड़ा किया। मौके पर पहुंचे निशांत त्रिपाठी की पिटाई कर दी। रात करीब 11 बजे लल्ला सिंह ने मनोज से फोन पर बात की और दो गाड़ियों में नौगई पहुंचे। इधर खतरा भांपते हुए त्रिपाठी पक्ष ने प्राणघातक हमला कर दिया। दोनों परिवार पुलिस को ठहरा रहे हैं जिम्मेदार
इस खौफनाक घटना के बाद दोनों ही परिवार पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 16 जून की दोपहर सोनहत थाना में केस दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई न होने से जहां त्रिपाठी परिवार में गुस्सा है। वहीं लल्ला सिंह के परिवार का कहना है कि शिकायत पर पुलिस क्रशर तो पहुंची, लेकिन गांव में इतनी बड़ी वारदात की भनक उसे कैसे नहीं लग पाई। गांव में अब भी नहीं मिटे वारदात के निशान
नौगई मेन रोड से घटनास्थल करीब 1 किमी भीतर है। कुछ ही दूरी पर वह जगह है जहां तीन लोगों की हत्या हुई थी। आग के निशान मिट चुके हैं, लेकिन जली जमीन, काले दाग, टूटे बिजली के खंभे और मकान निर्माण के लिए गड़े पिलर उस रात की हिंसा को अब भी बयान कर रहे हैं। आरोप है कि इसी जगह लल्ला सिंह की गाड़ियों को आग लगा दी गई थी।

More From Author

FIFA वर्ल्ड कप में आज रात रोनाल्डो और केन दिखेंगे:पुर्तगाल Vs उज्बेकिस्तान, इंग्लैंड का घाना से मुकाबला; क्रोएशिया-पनामा जीत की तलाश में

मोदी बोले- देश में नक्सलवाद आखिरी सांसें गिन रहा है:आज जो संविधान हाथ में हिलाते हैं; नक्सली हिंसा के चरम पर उनके हाथ कांपते थे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *