छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में एनालॉग पनीर के कारोबार पर रोक लगाने का बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने गुरुवार को नया रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश में लंबे समय से एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसे देखते हुए सरकार ने इसके व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और जल्द ही आदेश जारी कर दिए जाएंगे। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम लगातार छापेमारी कर रही थी। कई जगहों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद एनालॉग पनीर का कारोबार पूरी तरह नहीं रुक पाया। अब सरकार ने इस पर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। आदेश जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर का व्यापार नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। क्या होता है एनालॉग पनीर? एनालॉग पनीर पारंपरिक दूध से बनने वाले पनीर की तरह नहीं होता। इसे अक्सर दूध पाउडर, वनस्पति तेल या अन्य फैट और विभिन्न एडिटिव्स को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसकी लागत कम होने के कारण कुछ होटल, ढाबों और खाद्य कारोबारियों द्वारा इसका उपयोग किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। प्रदेश में लगातार हो रही थी कार्रवाई पिछले कुछ महीनों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने प्रदेश के कई जिलों में एनालॉग पनीर के खिलाफ छापेमारी की थी। बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर के नमूने लिए गए और कई मामलों में कार्रवाई भी की गई। हालांकि शिकायतें लगातार मिलती रहीं, जिसके बाद सरकार ने अब इसके व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार के आदेश जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर के कारोबार पर सख्त रुख अपनाया गया है।
