दिल्ली समेत कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी बने 3 एप को सरकार ने एप स्टोर से हटाने के आदेश दिए हैं। ये एप BAT-BMS, लॉसिजी और इपोच ली-आयन हैं। आईटी मंत्रालय ने इसकी जानकारी शुक्रवार को दी। हालांकि, ये एप प्ले स्टोर पर अब भी मौजूद हैं। हाल ही में शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग इन एप से ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी को बंद कर चलते ई-रिक्शा को रोक देते थे। इससे चालकों को काफी परेशानी हो रही थी। इन घटनाओं के वीडियो भी वायरल हुए। दरअसल, कुछ ई-रिक्शा की लीथियम बैटरियों का ब्लूटूथ मैनेजमेंट सिस्टम बिना पासवर्ड या कमजोर सुरक्षा के था, इसलिए एप उससे कनेक्ट हो गया। हालांकि, कारों के बैटरी सिस्टम में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन होता है, इसलिए कोई सामान्य एप उनसे कनेक्ट नहीं हो सकता। वीडियो में देखें एप से कैसे ई-रिक्शा रोक जा रहे 8 सवाल-जवाब में समझें एप और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम कैसे काम करता है? सवाल 1: सोशल मीडिया पर वायरल BAT-BMS एप क्या है? जवाब: ‘BAT-BMS’ रियल टाइम बैटरी मैनेजमेंट टूल है। इसे चीनी कंपनी ‘शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी’ ने डेवलप किया है। इसका मुख्य काम ब्लूटूथ-इनेबल्ड लीथियम बैटरी की निगरानी करना है। यह एप बैटरी की ओवरऑल जानकारियां डिस्प्ले करता है। यानी, यह बैटरी का डिजिटल डैशबोर्ड जैसा है। सवाल 2: यह एप कैसे काम करता है और लोग इससे चलते हुए ई-रिक्शा कैसे रोक पा रहे हैं? जवाब: ई-रिक्शा की बैटरी में चार्जिंग, टेमप्रेचर, वोल्टेज और उसकी हेल्थ पर नजर रखने के लिए ब्लूटूथ वाला बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाता है। ड्राइवर या मैकेनिक BAT-BMS एप के जरिए इस सिस्टम से कनेक्ट हो जाते हैं और बैटरी की जानकारी देख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उसकी सेटिंग्स मैनेज कर सकते हैं। यह 10 से 15 मीटर के दायरे में कनेक्ट हो सकता है। बदमाश इसी का फायदा उठा रहे हैं। सवाल 3: क्या देश के सभी ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन इस एप के जरिए रोके जा सकते हैं? जवाब: सोशल मीडिया पर यह वायरल हो रहा है। हकीकत में सभी ई-व्हीकल इसके जोखिम में नहीं हैं। यह एप केवल उन्हीं वाहनों पर असर डालता है जो कुछ खास शर्तों को पूरा करते हैं। सवाल 4: कौन से ई-रिक्शा इस एप के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब: भारत में अभी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं, जिनमें ब्लूटूथ या डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता। इसलिए ये इन एप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, जिन लीथियम बैटरियों के ब्लूटूथ सिस्टम में मैन्युफैक्चरर या डीलर ने मजबूत पासवर्ड सेट किया है, उन्हें भी इस एप के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। सवाल 5: चीनी कंपनी ने ये एप किस उद्देश्य से बनाए थे? क्या ये ई-रिक्शा के लिए थे? जवाब: नहीं, कंपनी ने इन एप को ई-रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए नहीं बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों और नावों या जहाजों की बैटरी में लगी लीथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखना था। इन एप का डिस्चार्ज ऑन/ऑफ फीचर सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी ओनर पावर कट कर सके। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरियों को रिमोटली बंद करने के लिए किया जाने लगा। सवाल 6: इससे ई-रिक्शा चालकों और सड़क सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है? जवाब: लोगों का मानना है कि ई-रिक्शा की धीमी चाल के कारण ट्रैफिक जाम होता है। इससे परेशान होकर लोग इन्हें एप से बंद कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसा मसखरी करने के लिए कर रहे हैं। यह चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। सवाल 7: सुरक्षा की इस बड़ी चूक के लिए असल में जिम्मेदार कौन है? जवाब: स्थानीय स्तर पर बैटरी असेंबल करने वाले, डीलर्स और कुछ लो-कॉस्ट वाले लीथियम बैटरी मेकर्स जिम्मेदार हैं। भारत में सस्ते ई-रिक्शा पार्ट्स के बाजार में कई ऐसी लीथियम बैटरियां बेची जा रही हैं, जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बिना किसी पासवर्ड के खुला छोड़ दिया जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी ने अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया हो और कोई भी अंदर आ जाए। सवाल 8: इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का क्या उपाय है? जवाब: वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को तय करना होगा कि वे वाहनों की बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। इससे बाहरी व्यक्ति एप के जरिए बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी टिप्स: ————————- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फैसला 2-3 महीनों में: सरकार बोली- ईरान जंग में खरीदा महंगा कच्चा तेल ही प्रोसेस हो रहा, ₹74,781 करोड़ घाटा हुआ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होंगी या नहीं, इस पर फैसला अगले दो-तीन महीनों में ही लिया जा सकता है। अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान जंग के समय जब दुनिया में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब भारतीय तेल कंपनियों ने महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदा। रिफाइनरियां अभी उसी महंगे स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…
