केलो प्रोजेक्ट में गड़बड़ी पर हंगामा:कांग्रेस विधायक ने राजस्व मंत्री को घेरा, सदन की कमेटी से जांच की मांग, मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया वॉकआउट

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केलो प्रोजेक्ट में जमीनों की अफरा-तफरी का आरोप लगाया। उन्होंने इस पूरे मामले की सदन की समिति से जांच कराने की मांग की लेकिन मंत्री ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। इसके बाद मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के विधायकों ने सदन से वाकआउट कर दिया। विधायक उमेश पटेल ने पूछा कि केलो परियोजना का काम कितना प्रतिशत पूरा हो चुकी है। वहीं इसके उन्हें प्रश्नकाल और ध्यनाकर्षण में दो अलग-अलग जवाब मिले हैं। किस जवाब को सही मानकर प्रश्न पुछूं। मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि परियोजना 80 फीसदी पूरी हो चुकी है। प्रोजेक्ट में 23 प्रकरण लंबित हैं। यह 2008-09 का प्रोजेक्ट है। इसमें लगभग 22 हजार हेक्टेयर पर सिचाई होनी है। कुछ ​​इंडस्ट्रीज को भी पानी देना है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि वह जमीन जलाशय के लिए थी लैंड यूज हुआ तो आपकी अध्यक्षता में जो कमेटी बनी उसकी सहमति के बिना यह जमीन ट्रांसफर कैसे हो गई। इतना बड़ा हेर-फेर कैसे हो गया। प्रोजेक्ट में जमीनों की अफरा-तफरी की गई है। इस पूरे मामले की सदन की समिति से जांच कराई जाए। मंत्री वर्मा ने कहा कि विभागीय रुप से जांच कराई जाएगी। इस पर विपक्ष ने हंगामा मचाते हुए नारेबाजी की इसके बाद मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। ई-वे बिल जांच के नाम पर अवैध वसूली का आरोप गलत: चौधरी भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने ई-वे बिल जांच के नाम पर वसूली का मामला ध्यानाकर्षण के जरिए सदन में उठाया। शर्मा ने कहा कि इसके नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। अवैध वसूली की जा रही है। इसके जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जांच के नाम पर अवैध वसूली की कोई शिकायत नहीं मिली है। एप के जरिए वाहनों की जांच की जाती है। बिल नहीं पाये जाने पर विभाग के अधिकारियों को वीडियो अपलोड कर व्हाट्स एप पर सूचना दी जाती है। 31 करोड़ का जुर्माना वसूला गया है। विभाग द्वारा चुनिदा अधिकारियों की एक ही जगह पर ड्यूटी नहीं लगाई गई है? पूरे प्रदेश में ई वे बिल जांच के लिए 15 टीमों का गठन किया गया है। 63 अधिकारी ई-वे बिल की जांच कर रहे हैं। शर्मा ने पूछा कि बिना ई-वे बिल के समान भेजने वाले कारोबारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है? मंत्री ने बताया कि कोई भी कारोबारी एप के जरिए दो मिनट के भीतर ई-वे बिल जनरेट कर सकता है। किसी भी टोल पर ऐसी गाड़ी स्कैन हो जाती है।

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