उरला की फैक्ट्री में हादसा:फैक्ट्री में नाबालिग बदल रहा था लीक सिलेंडर, धमाके में तीन मौतें

उरला स्थित 3डी फैक्ट्री में मंगलवार शाम करीब 7.30 बजे ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब तीनों टेपिंग का काम कर रहे थे। सिलेंडर खत्म होने पर दूसरा सिलेंडर लगाया जा रहा था। जैसे ही उसे चालू करने का प्रयास किया गया, जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि पूरी फैक्ट्री हिल गई। करीब 10 मिनट बाद बिजली आने पर दो मजदूरों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत मिले। उनके शरीर के अंग करीब 100 मीटर दूर तक बिखरे पड़े थे। तीसरा मजदूर गंभीर रूप से घायल मिला। उसे साथी मजदूर अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर ने बताया कि फैक्ट्री में पिग आयरन रिफाइनिंग का काम होता है। इसके मालिक जेपी गोयल और नारायण सीईओ है। फैक्ट्री की एक यूनिट में टेपिंग का काम चल रहा था। जांजगीर निवासी नाबालिग अरुण पांडेय ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहा था। तभी फट गया। इसकी चपेट में शहडोल निवासी लाल सिंह और कमल सिंह आ गए। तीनों की मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा इंतजामों पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद पुलिस जब पहुंची तो फैक्ट्री परिसर में कई ऑक्सीजन सिलेंडर खुले में पड़े मिले। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं पाए गए। जिस स्थान पर टेपिंग का काम हो रहा था, वहीं ऑक्सीजन सिलेंडर रखे थे। पास में मजदूर भोजन भी बना रहे थे। अधिकांश मजदूरों के पास हेलमेट सहित अन्य सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे। पुलिस को आशंका है कि जिस सिलेंडर को जोड़ा जा रहा था, उसमें गैस रिसाव था और आग के संपर्क में आते ही विस्फोट हो गया। विशेषज्ञों की मदद से पूरे मामले की जांच की जा रही है। नाबालिगों से फैक्ट्री में कराया जा रहा काम
हादसे के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री में नाबालिगों को काम कराया जा रहा है। उनसे भारी-भरकम काम लिया जा रहा है। राज्य के बाहर से भी नाबालिग वहां काम करने आए है। उन्हें फैक्ट्री के पास की क्वार्टर दिया गया है। जहां परिवार के साथ रहते है। वहां युवती व महिलाएं भी दिन में काम करती हैं। जहां काम, वहीं खाना भी बन रहा था रायपुर 3डी फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के प्रत्यक्षदर्शी मजदूर रामकुमार देवांगन ने बताया कि फैक्ट्री में रोज की तरह काम चल रहा था। वह एक अन्य कर्मचारी के साथ टेपिंग यूनिट में काम कर रहे थे। पास में 17 साल अरुण पांडेय भी टेपिंग कर रहा था। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने पर अरुण दूसरा सिलेंडर उठाकर लाया और पाइप जोड़ने लगा। कमल सिंह और लाल सिंह पास में खाना बना रहे थे। एक तरफ टेपिंग का काम चल रहा था और दूसरी तरफ मजदूर भोजन तैयार कर रहे थे। धमाका इतना तेज था कि पूरी फैक्ट्री हिल गई और बिजली गुल हो गई। करीब 10 मिनट तक चारों तरफ अंधेरा छाया रहा। जब बिजली आई तो वहां का मंजर देखकर सभी सन्न रह गए। चारों ओर शव के अंग बिखरे पड़े थे। कमल सिंह और लाल सिंह भी विस्फोट की चपेट में आ चुके थे। घर का सिलेंडर खत्म होने के बाद वहां खाना बनाने गए थे। दो साल से काम कर रहा हूं, लेकिन कभी यहां हादसा नहीं हुआ है। मृत नाबालिग के आधार से हुआ उम्र का खुलासा सिलेंडर बदलने वाले अरुण की पहचान आधार से हुई। फैक्ट्री प्रबंधन ने श्रम नियमों के खिलाफ जाकर उम्र जांचे बिना ही उसे काम कर रख लिया था। नाबालिगों से फैक्ट्री में कराया जा रहा काम
हादसे के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री में नाबालिगों को काम कराया जा रहा है। उनसे भारी-भरकम काम लिया जा रहा है। राज्य के बाहर से भी नाबालिग वहां काम करने आए है। उन्हें फैक्ट्री के पास की क्वार्टर दिया गया है। जहां परिवार के साथ रहते है। वहां युवती व महिलाएं भी दिन में काम करती हैं। नाबालिग से काम पर दो साल की सजा का प्रावधान
अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के अनुसार 14 से 18 वर्ष के किशोरों को फैक्ट्री, खदान और अन्य उद्योगों में काम पर लगाना बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन होने पर फैक्ट्री मालिक के खिलाफ संज्ञेय अपराध के तहत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जा सकती है। दोषी पाए जाने 2 साल तक की जेल और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।

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