आलनार इलाके का तरल पहाड़ रायपुर की आरती स्पंज कंपनी को लीज पर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि 9 साल में उसने यहां से 2.75 लाख टन लौह अयस्क का खनन किया है। 5 ट्रकों के जरिए इनका परिवहन करना बताया गया है। यही नहीं, सबूत के तौर पर रॉयल्टी पर्चियां भी कटवाई गई हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कंपनी ने यहां खनन-परिवहन, कुछ भी नहीं किया है। रॉयल्टी दस्तावेज तक बोगस हैं। इन दस्तावेजों में बतौर ड्राइवर जिन लोगों के नाम, मोबाइल नंबर दर्ज किए गए हैं, भास्कर ने उनसे फोन कॉल पर बात की। पता चला कि वे लोग इस बारे में कुछ जानते ही नहीं। आरती स्पंज के दस्तावेजों के अनुसार, पिछले महीने पांच ट्रकों के माध्यम से लौह अयस्क परिवहन दर्शाया गया है। इनमें चार ट्रकों के ड्राइवरों के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। वाहन मालिक के रूप में केवल एक नाम, अब्दुल वाहिद, का उल्लेख किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग ट्रकों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया है। भास्कर ने दस्तावेजों में दर्ज नंबरों पर संपर्क किया। घोटपाल निवासी कनेश नेताम ने बताया कि वह कभी लौह अयस्क परिवहन से जुड़ी गाड़ी नहीं चलाता था। उसके अनुसार, वह सीजी-17 डब्ल्यू-6009 हाइवा से सड़क निर्माण कार्य के लिए सामग्री ढुलाई करता था। उसने कहा कि उसका मोबाइल नंबर रॉयल्टी दस्तावेजों में कैसे दर्ज हुआ, इसकी उसे कोई जानकारी नहीं है। इसी वाहन में एक अन्य ड्राइवर का नंबर भी दर्ज है। इस नंबर पर संपर्क करने पर अरविंद बंसोड़ ने बताया कि वह महाराष्ट्र का निवासी है। वह ड्राइवरी का काम नहीं करता। उसने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि उसका मोबाइल नंबर कहां से प्राप्त हुआ। एक अन्य नंबर ट्रक ड्राइवर का नहीं, बल्कि वाहन मालिक राजेश मंडावी का निकला। राजेश ने बताया कि उसके पास दो वाहन हैं। वह स्वयं ड्राइविंग नहीं करता। दस्तावेजों में दर्ज सीजी-20 एच-2786 वाहन के बारे में भी उसने जानकारी होने से इनकार किया। राजेश का कहना है कि उसके नाम और मोबाइल नंबर का उपयोग किस प्रकार हुआ, इसकी शिकायत वह पुलिस से करेगा।
गीदम बाईपास में लगी गाड़ियों से भी लौह अयस्क ले जाना बताया:
दस्तावेजों में बांगाबाड़ी-गीदम बाईपास सड़क निर्माण में लगी बीएमएस कंस्ट्रक्शन कंपनी के कुछ हाइवा वाहनों से लौह अयस्क ढुलाई का उल्लेख किया गया है। हालांकि जिन ड्राइवरों के नाम और नंबर दर्ज हैं, उन्होंने लौह अयस्क परिवहन से जुड़े होने से इनकार किया है। अब पूरे मामले में परिवहन रिकॉर्ड, रॉयल्टी दस्तावेज, वाहन मालिकों और ड्राइवरों की वास्तविक पहचान को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि संबंधित विभाग स्वतंत्र जांच कराते हैं तो दस्तावेजों की सत्यता और लौह अयस्क परिवहन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। कंपनी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
बैलाडीला से लौह अयस्क की चोरी, कोई कार्रवाई नहीं:
बैलाडीला इलाके में लौह अयस्क चोरी के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। पिछले चार वर्षों में कई वाहनों पर कार्रवाई हुई है। पिछले वर्ष भी दो ट्रकों से बड़ी मात्रा में लौह अयस्क जब्त किया गया था। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी का लौह अयस्क किन उद्योगों तक पहुंच रहा था। लीज पर ली थी 31 हेक्टेयर जमीन
2015 में आरती स्पंज को आलनार के तरल पहाड़ में 31.55 हेक्टेयर जमीन लीज पर दी गई थी। इस लीज के लिए हुई ग्राम सभा को ग्रामीणों ने फर्जी बताया था। लीज निरस्त करने की मांग की थी। 2017 में खनन का प्रयास शुरू किया गया। विरोध के चलते काम शुरू नहीं हो पाया। फिर भी कंपनी 2017 से लगातार उत्पादन दिखा रही है। नियमत: खनन अधिनियम 1957 की धारा 4ए के अनुसार, कोई कंपनी 2 साल से ज्यादा समय तक खनन शुरू नहीं करती या निरंतरता नहीं रखती, तो लीज खुद निरस्त हो जाती है। हालांकि, आरती स्पंज के मामले में खनन पूरा करने के लिए कोई निश्चित अंतिम तिथि तय नहीं की गई है। इस वजह से भी मामला विवादित रहा। ऐसे में कंपनी ने कागजों में खनन और ट्रांसपोर्टिंग दिखाने का खेल कर दिया। इसे लेकर बस्तरिया राज मोर्चा ने अब बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। इसके तहत आलनार इलाके से ग्रामीणों ने 3 दिन पहले जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा के लिए पैदल ही आक्रोश यात्रा निकाली है। 55 किमी पदयात्रा कर बड़ी संख्या में ग्रामीण आज दंतेवाड़ा पहुंचने वाले हैं। यार्ड में लौह अयस्क का चूरा सालों पुराना, झाड़ियां उगीं
विवाद केवल परिवहन दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। दंतेवाड़ा के कारली स्थित कंपनी के डंपिंग यार्ड को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि यार्ड में वर्षों पुराना लौह अयस्क का चूरा रखा हुआ है। यार्ड में रखे खनिज पर उगी झाड़ियां संकेत देती हैं कि सामग्री लंबे समय से वहीं पड़ी है। जानकारों का कहना है कि आलनार क्षेत्र में मुख्य रूप से लंप क्वालिटी का लौह अयस्क पाया जाता है। यार्ड में दिखाई देने वाला महीन लौह अयस्क डस्ट या क्रश्ड मटेरियल अलग प्रकृति का है। मामले की जांच के लिए वन विभाग ने टीम बनाई है। हमने भी अपने स्तर पर एक जांच समिति बनाई है। इसमें खनन और राजस्व विभाग के अफसर शामिल हैं। जांच में जैसी बातें सामने आएंगी, उसी हिसाब से आगे की कार्रवाई करेंगे। -देवेश ध्रुव, कलेक्टर, दंतेवाड़ा
