SEBI ने FO को लेकर नया सर्कुलर जारी किया:इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाकर ₹15 लाख किया, नए नियम 20 नवंबर से लागू होंगे

रिटेल निवेशकों को लॉस से बचाने के लिए मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन (FO) को लेकर मंगलवार (1 अक्टूबर) को एक नया सर्कुलर जारी किया। सर्कुलर के मुताबिक, इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट का साइज 5-10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए किया जाएगा। वहीं वीकली इंडेक्स एक्सपायरी को प्रति एक्सचेंज एक तक सीमित किया जाएगा। सेबी कॉन्ट्रैक्ट साइज और वीकली एक्सपायरी समेत टोटल छह नए नियम लागू करेगा। FO की हाई रिस्क वाली दुनिया को रेगुलेट करने के लिए सेबी ने नया फ्रेमवर्क यानी नए नियम बनाए हैं। FO को लेकर नए नियम 20 नवंबर से कई फेज में लागू किए जाएंगे। यह नियम इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए एक एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (EWG) की सिफारिशों पर बेस्ड हैं। भारत में FO ट्रेडिंग को रेगुलेट करने के लिए सेबी के 6 नियम 1. ऑप्शन बायर्स से ऑप्शन प्रीमियम का अपफ्रंट कलेक्शन ऑप्शन बायर्स से ऑप्शन प्रीमियम का अपफ्रंट कलेक्शन किया जाएगा। यह नियम 1 फरवरी 2025 से लागू होगा। सेबी ने कहा कि अपफ्रंट मार्जिन कलेक्शन रिक्वायरमेंट्स में क्लाइंट लेवल पर नेट ऑप्शंस प्रीमियम भी शामिल होगा। 2. इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाया सेबी ने इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस के लिए मिनिमम कॉन्ट्रैक्ट साइज को 5-10 लाख रुपए से बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दिया है। इसके अलावा लॉट का साइज इस तरह से तय किया जाएगा कि रिव्यू के दिन डेरिवेटिव की कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 15 लाख रुपए से 20 लाख रुपए के बीच की जा सके। यह रूल 20 नवंबर 2024 से प्रभावी होगा। 3. वीकली इंडेक्स एक्सपायरी को प्रति एक्सचेंज एक तक सीमित करना एक्सपायरी के दिन इंडेक्स डेरिवेटिव में अत्यधिक ट्रेडिंग की समस्या को हल करने के लिए, वीकली बेसिस पर एक्सपायर होने वाले एक्सचेंजों द्वारा पेश किए जाने वाले इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को लॉजिकल बनाने का फैसला किया गया है। 20 नवंबर 2024 से वीकली डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स हर एक्सचेंज के लिए केवल एक बेंचमार्क इंडेक्स पर अवेलेबल होंगे। इसका मतलब है कि BSE और NSE को वीकली एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए एक-एक इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट चुनना होगा। 4. पोजीशन लिमिट्स की इंट्राडे मॉनिटरिंग होगी सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए मौजूदा पोजिशन लिमिट्स की मॉनिटरिंग यानी निगरानी करने का निर्देश दिया। क्योंकि, एक्सपायरी के दिन भारी मात्रा में पोजिशन के कारण परमिसिबल लिमिट्स से ज्यादा पोजिशन बनने का रिस्क होता है। यह नियम 1 अप्रैल 2025 से इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू किया जाएगा। 5. ऑप्शन एक्सपायरी के दिन टेल रिस्क कवरेज में बढ़ोतरी ऑप्शन पोजीशंस के इर्द-गिर्द बढ़ती सट्टा गतिविधि और उससे जुड़े रिस्क को देखते हुए, सेबी ने शॉर्ट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के लिए 2% का एडिशनल ELM (एक्सट्रीम लॉस मार्जिन) लगाकर टेल रिस्क कवरेज बढ़ाने का फैसला किया है। यह दिन की शुरुआत में सभी ओपन शॉर्ट ऑप्शंस के साथ-साथ उस दिन शुरू किए गए शॉर्ट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट पर भी लागू होगा, जिनकी एक्सपायरी उसी दिन होनी है। उदाहरण के लिए अगर इंडेक्स कॉन्ट्रैक्ट पर वीकली एक्सपायरी महीने की 7 तारीख को है और इंडेक्स पर अन्य वीकली/मंथली एक्सपायरी 14, 21 और 28 तारीख को है, तो 7 तारीख को समाप्त होने वाले सभी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के लिए 7 तारीख को 2% का एडिशनल ELM लगेगा। यह नियम भी 20 नवंबर 2024 से प्रभावी होगा। 6) एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाया जाएगा सेबी ने एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाने का फैसला किया है। यह नियम 1 फरवरी 2025 से लागू होगा। सेबी ने नए नियम क्यों लागू किए? डेरिवेटिव मार्केट काफी जोखिम भरा है। सेबी की फिलहाल चिंता इस बात पर है कि इसमें रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। सेबी का मानना है कि निवेशक इसमें इसलिए आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें यहां से बेहद ऊंचे मुनाफे मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ऐसे निवेशकों में से ज्यादातर को डेरिवेटिव मार्केट की समझ नहीं है। सेबी के द्वारा सीमाओं को बढ़ाने के पीछे उद्देश्य ये है कि डेरिवेटिव मार्केट में ऐसे ही निवेशक उतरें जो मार्केट को लेकर गंभीरता से सोचते हैं। FO में 10 में से 9 ट्रेडर्स को लॉस: सेबी
सेबी ने एक हफ्ते पहले एक एनालिसिस रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें उसने बताया था कि इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी FO सेगमेंट में 10 में से 9 इंडिविजुअल ट्रेडर्स को लॉस हुआ है। FY22 और FY24 के बीच तीन साल की टाइम ड्यूरेशन में 1 करोड़ से ज्यादा FO ट्रेडर्स में से 93% को टोटल 1.8 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। यानी लगभग 93 लाख ट्रेडर्स में से हर एक ट्रेडर को करीब 2 लाख रुपए का एवरेज लॉस हुआ है। सेबी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें… फ्यूचर्स एंड ऑप्शन क्या होता है? फ्यूचर्स एंड ऑप्शन (FO) एक प्रकार के फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट हैं जो निवेशक को स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी में कम पूंजी में बड़ी पोजीशन लेने की अनुमति देते हैं। फ्यूचर्स और ऑप्शन, एक प्रकार के डेरिवेटिव कॉन्ट्रेक्ट होते हैं, जिनकी तय अवधि होती है। इस समय सीमा के अंदर इनकी कीमतों में स्टॉक की प्राइस के अनुसार बदलाव होते हैं। हर शेयर का फ्यूचर्स और ऑप्शन एक लॉट साइज में अवेलेबल होता है।

More From Author

विराट ने शाकिब को बैट गिफ्ट किया:पंत ने चौका लगाकर जिताया, गंभीर-कोहली गले मिले, रोहित का फ्लाइंग कैच; कानपुर टेस्ट के मोमेंट्स

भारत ने टी-20 स्टाइल में जीता कानपुर टेस्ट:2 दिन में मैच पलटा; 34.3 ओवर में 285 रन बनाए, बांग्लादेश को 2 बार ऑलआउट किया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *