SC बोला-नेताओं को भाषण से पहले विचार सुधारने की जरूरत:उन्हें देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए; वैचारिक सिद्धांतों पर चुनाव लड़ें लेकिन आपसी सम्मान भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान नेताओं और उच्च संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारियों को देश में भाईचारा बढ़ाने और संविधान के मूल्यों के हिसाब से व्यवहार करने और बोलने की नसीहत दी। भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा- नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना होगा। नफरत भरे भाषणों को रोकने के लिए पहले सोच को सुधारने की आवश्यकता है। क्योंकि भाषण से पहले विचार आते हैं। CJI ने कहा- सभी राजनीतिक दलों से हमारी अपील है कि आप संवैधानिक नैतिकता, मूल्यों, आपसी सम्मान और आत्मसम्मान के सिद्धांतों का पालन कीजिए। ये ठीक है कि आप वैचारिक सिद्धांतों के आधार पर चुनाव लड़ते हैं, लेकिन एकदूसरे का सम्मान करना भी जरूरी है। आप लोगों से इस तरह के व्यवहार की अपेक्षा नहीं कर सकते। असम CM के हालिया भाषणों के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट नौ लोगों की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया भाषणों और भाजपा असम की तरफ से पोस्ट किए गए एक वीडियो के मद्देनजर दायर की गई थी। वीडियो में एक खास समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगा था। याचिका में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए गलत और नफरत फैलाने वाले भाषणों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। SC बोला- याचिका एक व्यक्ति के खिलाफ, नई याचिका दायर करें सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई में याचिका पर आपत्ति जताई। CJI ने कहा- यह याचिका एक व्यक्ति के खिलाफ है। खासकर इस समय। इसे वापस लें और एक नई याचिका दायर करें जिसमें सभी राजनीतिक दलों का उल्लेख होना चाहिए। CJI ने कहा- हम याचिकाकर्ताओं का सम्मान करते हैं और उनकी ओर से उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को समझते हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं को यह आभास नहीं कराना चाहिए कि वे किसी विशेष पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ हैं। वहीं जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राजनीतिक दलों को देश में भाईचारा खुद ही बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा- मान लीजिए हम दिशानिर्देश जारी कर दें लेकिन उनका पालन कौन करेगा? जस्टिस बागची ने पहले से जारी किए गए दिशानिर्देशों का जिक्र करते हुए कहा- हमने न जानें कितने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन्हें लागू करने की जिम्मेदारी भी राजनीतिक दलों की ही है। कांग्रेस ने CM हिमंत के वीडियो का मुद्दा उठाया था दरअसल, 8 जनवरी को कांग्रेस ने दावा किया कि असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो अल्पसंख्यकों की टार्गेटेड पॉइंट-ब्लैंक हत्या को बढ़ावा देने जैसा है। कांग्रेस का दावा है कि वीडियो डिलीट कर दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के X हैंडल पर भी यह वीडियो पोस्ट किया गया। इसमें नजर आ रहा है कि हिमंत सरमा एक राइफल से निशाना साधते और दो लोगों पर गोली चलाते हुए दिख रहे थे। निशाने में दिख रही तस्वीर में एक ने टोपी पहनी थी और दूसरे की दाढ़ी थी। इसका कैप्शन पॉइंट-ब्लैंक शॉट था। श्रीनेत के शेयर किए गए वीडियो में असम की भारतीय जनता पार्टी का X अकाउंट नजर आ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने लिखा- यही है असली बीजेपी: सामूहिक हत्यारे। यह जहर, नफरत और हिंसा आप पर है, मिस्टर मोदी। उन्होंने पूछा कि क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं? हिमंत के मियां मुसलमान बयान पर भी हो चुका है विवाद असम CM हिमंता सरमा कई बार मुस्लिमों के खिलाफ बयान भी देते रहे हैं। उन्होंने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मिया मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा था- हिमंत सरमा और भाजपा सीधे तौर पर मिया समुदाय के खिलाफ हैं। उन्होंने लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। असम सीएम के मुताबिक वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। बता दें कि मिया बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है। सरमा ने कहा था- अगर वो 5 रुपए मांगे तो 4 रुपए दो हिमंत बिस्व सरमा ने आगे कहा था कि जो कोई भी किसी भी तरह से मिया को परेशानी दे सकता है, वह दे। आप भी इसमें शामिल हैं। रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए। जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। ————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-शादी से पहले फिजिकल रिलेशन समझ से परे: जब तक शादी नहीं, तब तक लड़का-लड़की अजनबी; किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए सुप्रीम कोर्ट बोला-वांगचुक ने भाषणों में हिंसा पर चिंता जताई: इसमें उकसावा कहां; सरकार ने कहा था- सोनम लद्दाख को नेपाल बनाना चाहते थे

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