केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज गुरुवार को छत्तीसगढ़ आएंगे। शाह राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित समाधि स्मृति महा महोत्सव में शिरकत करेंगे। इस दौरान वे मां बम्लेश्वरी मंदिर में भी दर्शन करेंगे। शाह के दौरे के पहले चंद्रगिरी ट्रस्ट और प्रशासन ने कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली है। जानकारी के मुताबिक शाह 100 रुपए का स्मृति सिक्का जारी कर सकते हैं। अमित शाह दोपहर 12:55 बजे डोंगरगढ़ के प्रज्ञागिरी हेलीपेड पहुंचेंगे। 1:10 समाधि स्मृति महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद दोपहर 2:50 में मां बम्लेश्वरी मंदिर पहुंचकर माता के आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद प्रज्ञा गिरी हेलीपैड से रायपुर जाएंगे। 18 फरवरी 2024 को आचार्य विद्यासागर महाराज ने डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ में समाधि ली थी। तिथि के अनुसार उनके समाधि को 6 फरवरी 2025 को एक वर्ष पूर्ण हो रहे है और एक वर्ष पूर्ण होने पर चंद्रगिरी ट्रस्ट द्वारा 1 से 6 फरवरी तक भव्य महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। विशेष डाक टिकट भी जारी किए जा सकते हैं जैन समाज के मुताबिक, गृहमंत्री इस अवसर पर विद्यासागर महाराज की तस्वीर वाला 100 रुपए का स्मृति सिक्का जारी कर सकते हैं। साथ ही, भारतीय डाक विभाग द्वारा विशेष डाक टिकट और लिफाफे भी जारी किए जा सकते हैं। बता दें कि 18 फरवरी 2024 को आचार्य विद्यासागर महाराज ने डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में समाधि ली थी। उनकी प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर चंद्रगिरी ट्रस्ट द्वारा 1 से 6 फरवरी तक भव्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महातीर्थ बन चुका है डोंगरगढ़ डोंगरगढ़ में प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी का मंदिर है, प्रज्ञागिरि और चंद्रगिरि जैसे धार्मिक स्थल और विद्यासागर महाराज जी की समाधि के बाद यह क्षेत्र अब महातीर्थ बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत समेत कई बड़े नेता यहां विद्यासागर महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। संयम का रास्ता दिखाया विद्यासागर महाराज ने समाज को देशभक्ति और संयम का रास्ता दिखाया। राष्ट्र संत विद्यासागर महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति और जनसेवा को समर्पित रहा। उनके द्वारा स्थापित कई सामाजिक प्रकल्प आज भी डोंगरगढ़ में सक्रिय हैं। स्कूल और गौशाला संचालित बेटियों की शिक्षा के प्रति उनकी विशेष प्रतिबद्धता का प्रमाण है। प्रतिभा स्थली स्कूल, जो प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ आवासीय स्कूल है। इसके अतिरिक्त, चंद्रगिरी तीर्थ में हथकरघा उद्योग और एक विशाल गौशाला भी संचालित है, जो उनकी सामाजिक दृष्टि को प्रतिबिंबित करते हैं।
