राजस्थान की साइकिलिस्ट हर्षिता जाखड़ टूर डी फ्रांस फेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। 19 साल की हर्षिता ने रविवार को स्विट्जरलैंड के एग्ल में स्टेज टू की शुरुआत के दौरान साइकिलिस्टों के एक ग्रुप को लीड किया। हर्षिता को यूनियन साइकिलिस्ट इंटरनेशनल (UCI) वर्ल्ड साइकिलिंग टैलेंट प्रोग्राम के तहत चुना गया था। इस प्रोग्राम में दुनिया भर के आठ साइकिलिस्ट शामिल थे, जिन्हें एलीट साइकिलिंग टूर्नामेंट का अनुभव देने के लिए चुना गया था। टूर डी फ्रांस महिलाओं की सालाना रोड साइकिलिंग रेस है। यह UCI विमेंस वर्ल्ड टूर कैलेंडर का सबसे बड़ा और लंबा इवेंट है। जो 1 अगस्त को लुसाने से शुरू हुई और 9 अगस्त को नीस में समाप्त होगी। अफगानिस्तान और इथियोपिया के साइकिलिस्ट भी रहे शामिल हर्षिता के साथ इस समूह में अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चिली, इथियोपिया, नामीबिया और युगांडा के साइकिलिस्ट भी शामिल थे। इन सभी ने प्रोफेशनल पेलेटन के शुरू होने से पहले 4.5 किलोमीटर की न्यूट्रलाइज्ड राइड पूरी की। UCI अध्यक्ष ने की हर्षिता की तारीफ UCI के अध्यक्ष डेविड लैपार्टिएंट ने उम्मीद जताई कि भारतीय साइकिलिस्ट हर्षिता भविष्य में टूर डी फ्रांस फेम्स की मुख्य प्रतियोगिता का हिस्सा बनेंगी। लैपार्टिएंट ने भरोसा जताया कि हर्षिता को इस रेस का अनुभव पसंद आएगा और वह जल्द ही मुख्य प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वापस आएंगी। पटियाला में पिता से ले रही हैं ट्रेनिंग हर्षिता का ट्रेनिंग बेस पटियाला में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है। वह अपने पिता और पूर्व साइकिलिस्ट राकेश जाखड़ की देखरेख में ट्रेनिंग करती हैं। उनके पिता राकेश जाखड़ 2010 नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा ले चुके हैं। हर्षिता ने 2025 खेलो इंडिया यूथ गेम्स में तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई थी। इसके अलावा, उन्होंने 2024 एशियन जूनियर साइकिलिंग चैंपियनशिप में एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किए हैं। ———————————————- स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता ने पहला जूडो गोल्ड दिलाया; कॉमनवेल्थ गेम्स के 38 मेडलिस्ट की स्टोरी 11 दिन तक ग्लासगो में चले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 38 खिलाड़ियों ने 39 मेडल जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज शामिल रहे। गुलवीर सिंह को डबल मेडल मिले। साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता दहिया ने भारत को पहला गोल्ड जूडो में दिलाया। सेना में सेवा के दौरान ब्लास्ट में पैर गंवाने वाले पैरा एथलीट सोमन राणा ने भी देश के लिए पदक जीता। पढ़ें पूरी खबर
