सोनहत कुसहा के किसान उमेश कुमार चेरवा पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर एकीकृत कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम – आईएफएस) मॉडल से 2.5 एकड़ खेत में वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित खेती कर रहे हैं। उमेश अपने खेत में फसल बदल-बदलकर मक्का, धान, टमाटर, गेंदा और बागवानी कर रहे हैं। इसके साथ ही, वे ग्रीन नेट तकनीक का इस्तेमाल कर खीरा और आलू की भी अच्छी पैदावार कर रहे हैं। वे अपनी जमीन का एक भी हिस्सा खाली नहीं छोड़ते और उसका पूरा सदुपयोग करते हैं। रासायनिक खेती से पूरी तरह दूरी बनाते हुए उमेश 100% जैविक खेती कर रहे हैं, जिसमें वे मुख्य रूप से गोबर खाद का उपयोग करते हैं। उनकी खेती की सबसे अनूठी बात यह है कि वे मुख्य फसलों के बीच में करेला का पौधा लगाते हैं। यह करेले का पौधा फसलों में होने वाली बीमारियों को रोकता है और एक प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करता है। इसके साथ ही खेतों में पेपर मलचिंग का उपयोग भी कर रहे हैं जिससे फसलों को कीट के प्रकोप से दूर रखा जाता है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाते हुए वे खेती के साथ-साथ उसी खेत में हैचरी यूनिट चला रहे हैं और बतख पालन भी कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक अपनाकर की जा रही इस खेती में उमेश को पूरे परिवार का साथ मिल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया के प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक कमलेश कुमार सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों के सहयोग से आईएफएस मॉडल के तहत वे मुख्य फसल के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी/बतख पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को एक साथ जोड़कर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक विजय कुमार ने कहा कि इस वैज्ञानिक प्रणाली की खासियत है कि इससे एक गतिविधि का अपशिष्ट (कचरा) दूसरी गतिविधि के लिए संसाधन बन जाता है। इस तकनीक से खेती की लागत में कमी आ रही है और किसान की आय में कई गुना वृद्धि हो रही है। इस प्रयास को नीति आयोग दिल्ली की टीम ने भी सोनहत दौरे के दौरान प्रोत्साहित किया। इन प्रगतिशील किसान से और जानें – 7489805047
