जनरल बोगी खचाखच…:रोज 56 हजार टिकट, सीटें सिर्फ 40 हजार

स्कूल खुल चुके हैं, त्योहारों का सीजन नहीं है और बारिश का दौर चल रहा है। रेलवे के लिहाज से यह ऑफ सीजन है, फिर भी जनरल कोच में सफर अग्निपरीक्षा बना हुआ है। बिलासपुर स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही चढ़ने के लिए मारामारी मच जाती है। डिब्बों में बैठना तो दूर, पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। बिलासपुर रेल मंडल में रोज 56 हजार से ज्यादा जनरल टिकट बिकते हैं, जबकि ट्रेनों के जनरल कोच में करीब 40 हजार यात्रियों की ही क्षमता है। यानी टिकट लेने के बावजूद रोज 16 हजार से ज्यादा यात्री खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं। अब सावन शुरू होने से बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी। बिलासपुर स्टेशन से अप-डाउन मिलाकर रोज 82 एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें 398 जनरल कोच हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 39,800 यात्रियों की है। हालांकि, लंबी दूरी से आने वाली हावड़ा, मुंबई और दिल्ली रूट की ट्रेनें पहले से पैक रहती हैं। इनमें स्थानीय यात्रियों का चढ़ना भी मुश्किल होता है। इन 82 में से 10 प्रमुख प्रीमियम और विशेष ट्रेनों में एक भी जनरल कोच नहीं है। बिलासपुर से बनकर चलने वाली 14 एक्सप्रेस ट्रेनों के 58 जनरल कोच में करीब 5,800 सीटें हैं। दो पैसेंजर और पांच मेमू ट्रेनों की लगभग 6,500 सीटें जोड़ने पर कुल क्षमता 12,500 होती है। इसके मुकाबले अकेले बिलासपुर स्टेशन से रोज 14 हजार से ज्यादा जनरल टिकट बिकते हैं। जगह नहीं मिलने पर यात्री स्लीपर कोच में चढ़ने को मजबूर होते हैं। जनरल कोच घटे, एसी-3 टियर बढ़े
रेलवे ने कई ट्रेनों में जनरल कोच घटाकर एसी और स्लीपर कोच बढ़ा दिए हैं। इससे आम यात्रियों की जगह घटी, जबकि रेलवे का राजस्व बढ़ा। बिलासपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस शुरू हुई थी, तब इसमें छह जनरल कोच थे। अब इनकी संख्या घटाकर चार कर दी गई है। तीन-चार साल पहले बिलासपुर-इंदौर नर्मदा, बिलासपुर-भोपाल, बिलासपुर-रीवा और बिलासपुर-चिरमिरी जैसी लोकप्रिय ट्रेनों को पैसेंजर से एक्सप्रेस बनाया गया। इसके साथ ही इनके जनरल कोच लगभग आधे कर दिए गए। चिरमिरी पैसेंजर में कभी आठ जनरल कोच थे। इंदौर, रीवा और भोपाल पैसेंजर में भी छह-छह से ज्यादा जनरल डिब्बे होते थे। अब इनमें स्लीपर और एसी कोच बढ़ा दिए गए हैं। सिर्फ 1 में 10 जनरल कोच
बिलासपुर मंडल में तीन-चार ट्रेनें ही ऐसी हैं, जिनमें जनरल यात्रियों को जगह मिलती है। अंबिकापुर-मदनमहल-अंबिकापुर एक्सप्रेस मंडल की इकलौती ट्रेन है, जिसमें 10 जनरल कोच हैं। कोरबा-हसदेव एक्सप्रेस में सात, चिरमिरी-रीवा एक्सप्रेस में छह और दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस में पांच जनरल कोच हैं। इनमें जनरल नहीं बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस { बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस { रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी एक्सप्रेस {सांतरागाछी हमसफर एक्स. { पुणे दुरंतो एक्स. {मुंबई दुरंतो एक्स. { जबलपुर-सांतरागाछी एक्स. {लखनऊ-रायपुर गरीब रथ एक्सप्रेस {पुणे-हावड़ा हमसफर {इंदौर-पुरी हमसफर। एलएचबी रैक में 22 से ज्यादा कोच नहीं लगाए जा सकते, अधिकांश स्टेशनों के प्लेटफॉर्म इतनी ही लंबाई के हैं। सामान्यतः ट्रेन में आगे और पीछे दो-दो जनरल कोच होते हैं। -अनुराग कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम, बिलासपुर मंडल

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