बस्तर में मलेरिया से दो बच्चों की मौत के बाद पूरा स्वास्थ्य विभाग बचाव की मुद्रा में है। सोमवार को सुबह से स्वास्थ्य संचालनालय में हलचल रही। एक तरफ दोनों बच्चों को समय पर इलाज मिलने का दावा करते हुए मिनट-दर-मिनट का ब्योरा तैयार किया जाता रहा। यानी उन्हें कब अस्पताल में भर्ती कराया गया, कब जांच करवाई गई। वहीं दूसरी ओर भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि जिन मौतों को रोकने के लिए पहले से बचाव के इंतजाम किए जाने थे, वे कागजों से आगे ही नहीं बढ़ पाए। जानकारी के मुताबिक, इस साल केंद्र सरकार से मच्छरदानियों की आपूर्ति नहीं होने के बाद राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) मद से मच्छरदानियां खरीदकर मलेरिया प्रभावित गांवों में वितरित करें। लेकिन संभाग के किसी भी जिले में इस निर्देश का पालन नहीं किया गया। न स्थानीय स्तर पर खरीदी हुई और न ही राज्य शासन के माध्यम से कोई वैकल्पिक प्रस्ताव तैयार किया गया। दो बच्चों की मौत के बाद अब पूरा फोकस इलाज के रिकॉर्ड पेश करने पर है। सोमवार की शाम स्वास्थ्य संचालनालय में भास्कर से चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि केंद्र से मच्छरदानी नहीं मिलने पर कलेक्टरों को सीएसआर मद से खरीदी करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अब इसकी समीक्षा की जा रही है कि आखिर किन कारणों से किसी भी जिले में खरीदी नहीं हुई। यह भी जांच की जा रही है कि चूक कहां हुई। मंत्री ने बताया कि अब मच्छरदानी खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उठ रहे सवाल कलेक्टरों ने खरीदी क्यों नहीं की, इसकी समीक्षा कर रहे
केंद्र से मच्छरदानियां नहीं मिली थीं। इसलिए कलेक्टरों को सीएसआर मद से खरीदी कर वितरण करने के निर्देश दिए गए थे। अब समीक्षा कर रहे हैं कि खरीदी क्यों नहीं हुई और कहां दिक्कत आई। मच्छरदानी खरीदी की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। -श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
