छत्तीसगढ़ के इकलौते कोपरा रामसर स्थल के आसपास संचालित औद्योगिक गतिविधियों का पहली आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है। वन विभाग के प्राथमिक सर्वे में रामसर के 5 किलोमीटर के दायरे में दो कोल वाशरी और नौ कोल डिपो का उल्लेख किया गया है। यह रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति के माध्यम से राज्य सरकार को भेज दी गई है। अब दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम विस्तृत सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे संरक्षण और अन्य जरूरी कदमों पर निर्णय लिया जाएगा। करीब 210 हेक्टेयर (2.10 वर्ग किलोमीटर) में फैले कोपरा जलाशय को 7 महीने पहले रामसर का दर्जा मिला था। इसके बाद वन विभाग ने कैचमेंट क्षेत्र और आसपास की गतिविधियों का प्राथमिक सर्वे कराया। रिपोर्ट में कोपरा, बेलमुंडी, सैदा और संबलपुरी-बहतराई क्षेत्र में संचालित कोल वाशरी, कोल डिपो और अन्य गतिविधियों का विवरण शामिल किया गया है। विभाग के अनुसार ये क्षेत्र ऊंचाई पर स्थित हैं और बारिश का बहाव यहीं से जलाशय के कैचमेंट की ओर आता है। जलाशय के पास भी हैं कई कोल डिपो और वाशरी: वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रामसर जाने वाली सड़क के दोनों ओर भी कोल डिपो संचालित हैं। इनमें तीन डिपो जलाशय की सीमा से लगे हुए हैं। एक डिपो दाईं ओर और दो बाईं ओर स्थित हैं। बाईं ओर करीब 500 मीटर की दूरी पर एक बड़ी कोल वाशरी है, जहां कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग होती है। प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट दी है रामसर घोषित होने के बाद कैचमेंट क्षेत्र और पांच किलोमीटर के दायरे में उद्योगों, कोल डिपो, कोल वाशरी व अन्य गतिविधियों का सर्वे कराया है। इसकी रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति को भेजी है। वहां से राज्य सरकार को भेजी है। आगे की कार्रवाई वहीं तय होगी। -नीरज यादव, डीएफओ बिलासपुर
