छत्तीसगढ़ के रायपुर में रविवार को सड़क पर खड़ी गाय से टकराकर बाइक सवार दो युवक नीचे गिर गए, जिन्हें सामने से आ रही कार ने कुचल दिया और भाग निकला। हादसे में करण नायक की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल रोशन जगत आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को सड़क पर बैठे मवेशियों के चलते हो रही मौतों को लेकर पुलिस को फटकार लगाई थी। इस बीच हादसे का लाइव वीडियो सामने आया है। पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। मामला खम्हारडीह थाना इलाके के कछना के पास का है। इस हादसे ने चंद्रशेखर नगर की गरीब बस्ती के 2 परिवारों की हंसती-खेलती दुनिया उजाड़ दी। 23 साल का करण नायक दो साल पहले अपनी गर्लफ्रेंड नंदिनी को शादी कर घर लाया था। अब वह अपनी सात महीने की प्रेग्नेंट पत्नी को हमेशा के लिए छोड़ गया। घर के उस छोटे से कमरे में करण की कोई तस्वीर तक नहीं थी। जब दैनिक भास्कर की टीम ने परिवार से उसकी तस्वीर मांगी, तो सब बेबसी से एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की जद्दोजहद में कभी उसकी फोटो खिंचवाने का मौका ही नहीं मिला। तभी करण के एक दोस्त ने अपने मोबाइल में उसकी एक तस्वीर दिखाई। तस्वीर देखते ही 15 साल की उम्र में पिता को खो चुके करण की बुजुर्ग मां कांपते हाथों से मोबाइल की स्क्रीन चूमने लगीं। सिसकियों के बीच उनके मुंह से बस इतना ही निकला- बेटा, इस फोटो को कभी डिलीट मत करना। मेरे पास तो अपने बच्चे की एक भी निशानी नहीं बची। देखिए तस्वीरें… पेग्रेंट पत्नी ने खाना-पीना छोड़ा, मां बार-बार सिर्फ इंसाफ मांग रही हादसे के बाद चंद्रशेखर नगर की छोटी सी बस्ती के एक कमरे में अब खामोशी रहती है। एक कोने में करण की 7 महीने की प्रेग्नेंट पत्नी नंदिनी सदमे में है। रिश्तेदार बताते हैं कि, हादसे के बाद से उसने ठीक से खाना नहीं खाया है। किसी से बात भी नहीं कर रही। डॉक्टरों ने नंदिनी को तनाव से दूर रहने की सलाह दी है, लेकिन सदमे में डूबी उसकी पथराई आंखें अब भी दरवाजे पर ही टिकी रहती हैं। दूसरी ओर, करण की बुजुर्ग मां बेलो नायक का भी रो-रोकर बुरा हाल है। लगातार रोने से उनकी तबीयत बिगड़ गई है। दैनिक भास्कर से बात करते हुए भी उनकी जुबान पर बस एक ही बात थी, मुझे मेरे बेटे के लिए इंसाफ चाहिए। “बेटा…इसे कभी डिलीट मत करना” दैनिक भास्कर की टीम ने परिवार से पूछा कि, क्या करण की कोई तस्वीर है। घर में मौजूद सभी लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। तभी करण के एक दोस्त ने अपना मोबाइल निकाला और उसकी तस्वीर दिखाई। तस्वीर देखते ही मां बिलख पड़ीं। उसने कांपते हुए हाथों से मोबाइल को पकड़ा और काफी देर तक रोती रहीं, फिर बोलीं- बेटा… इसे कभी डिलीट मत करना। मेरे पास इसकी एक भी फोटो नहीं है। परिवार के पास न स्मार्टफोन है, न करण की कोई तस्वीर। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही जिंदगी गुजर गई। शायद किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन बेटे की याद में तस्वीर भी नहीं बचेगी। 15 साल की उम्र में घर का सहारा बन गया था करण करण की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। पिता की मौत के बाद महज 15 साल की उम्र में उसने घर की जिम्मेदारी संभाल ली। कभी हमाली की, कभी दिहाड़ी मजदूरी। पिछले 2 साल से वह ड्राइवर की नौकरी कर रहा था। उसी कमाई से मां, पत्नी और पूरे परिवार का खर्च चलता था। परिवार वालों के मुताबिक, वह अक्सर कहता था कि, “बस थोड़ा और संभल जाएं, फिर मां को आराम दूंगा। बच्चे को अच्छी जिंदगी दूंगा।” होने वाले बच्चे के लिए पैसे जोड़ रहा था करण बताया जा रहा है कि, करण ने 2 साल पहले नंदिनी से लव मैरिज की थी। अब नंदिनी 7 महीने की प्रेग्नेंट हैं। रिश्तेदार बताते हैं कि करण आने वाले बच्चे के लिए हर महीने कुछ पैसे अलग रखता था। कपड़े खरीदने हैं, अस्पताल का खर्च उठाना है, बच्चे को अच्छी पढ़ाई दिलानी है। यही उसके छोटे-छोटे सपने थे। लेकिन रविवार रात एक तेज रफ्तार कार ने सिर्फ उसकी जान नहीं ली, उन सपनों को भी कुचल दिया।
3 दिन बीते, CCTV भी मौजूद, लेकिन कार ड्राइवर की नहीं हुई पहचान परिजनों का कहना है कि, घटना के दौरान की सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। लेकिन 3 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस कार चला रहे आरोपी की पहचान नहीं कर सकी है। मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि, जब तक उन्होंने थाने के बाहर विरोध नहीं किया, तब तक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। विरोध के बाद पुलिस ने सिर्फ कार्रवाई का भरोसा दिया। परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ सांत्वना नहीं चाहिए। उन्हें उस शख्स तक पहुंचना है, जिसकी लापरवाही ने उनके घर का इकलौता कमाने वाला छीन लिया। अज्ञात आरोपी के खिलाफ FIR वहीं, दैनिक भास्कर से बातचीत में खम्हारडीह थाना प्रभारी भावेश गौतम ने कहा कि, अज्ञात के खिलाफ धारा 281,125(ए),106(1) बी.एन.एस के एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपी की पहचान नहीं हो पाई है। पहचान होते ही कार्रवाई करेंगे। …………………… इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… छत्तीसगढ़ में सालभर में सड़क हादसों में 6,967 मौतें: हाईकोर्ट ने पूछा- क्या पुलिस का काम सिर्फ गाय हांकना है, NHAI-कलेक्टर्स से शपथपत्र मांगा छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में सड़क हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने लगातार बढ़ रहे हादसों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना है? पढ़ें पूरी खबर…
