बंगाल में बने सिस्टम से 48 घंटे बारिश की चेतावनी:मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिले भीगेंगे; गरज-चमक के साथ बिजली गिरेगी

छत्तीसगढ़ में मानसून फिर से एक्टिव हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया के मजबूत होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। आज (16 जुलाई) कई जगहों पर हल्की से मध्यम, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में 1 जून से अब तक सामान्य से 29% कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में अच्छी बारिश होने से इस कमी में सुधार आ सकता है। बुधवार को प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में रिकॉर्ड किया गया। रायपुर में ऐसा रहेगा मौसम रायपुर में आज (गुरुवार) दिनभर बादल छाए रहेंगे। बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। शहर का अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अगले दो दिन का पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका है। मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अन्य हिस्सों से ज्यादा बारिश की संभावना पिछले कुछ दिनों से मानसून कमजोर पड़ने के कारण प्रदेश में बारिश सामान्य से 29% कम चल रही है। अब बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया मानसून को नई ऊर्जा देगा। इसका असर सबसे पहले मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है। यह सिस्टम और मजबूत होता है तो अगले 48 घंटों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों, जलाशयों और भूजल स्तर को राहत मिलने की उम्मीद है। जुलाई में सूखा असामान्य जुलाई छत्तीसगढ़ में सामान्य तौर पर सबसे अधिक बारिश वाला महीना होता है। ऐसे में पूरे प्रदेश का एक दिन भी लगभग सूखा गुजरना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। मौसम वैज्ञानिक इसे ब्रेक मॉनसून या मानसून के कमजोर पड़ने की स्थिति से जोड़ते हैं, जब ट्रफ लाइन और लो प्रेशर के सिस्टम राज्य से दूर चले जाते हैं। इस दौरान एक-दो दिन तक पूरे प्रदेश में बारिश लगभग थम सकती है। इस साल भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। जून के आखिर में देशभर में बारिश का बड़ा घाटा था, जुलाई के पहले सप्ताह में सुधार हुआ, लेकिन अब मानसून फिर कमजोर पड़ गया है। इसका असर छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के राज्यों पर भी दिखाई दे रहा है। आधे जिले बारिश की कमी से जूझ रहे पिछले कुछ दिन हुई अच्छी बारिश के बाद छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल धीमी पड़ गई है। 15 जुलाई तक प्रदेश में 29% कम बारिश हुई है। 32 में से 16 जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। IMD के आंकड़े बताते हैं प्रदेश के एक जिले में बहुत ज्यादा बारिश हुई है। 14 जिलों में बारिश सामान्य हुई है। जबकि 16 जिले बारिश की कमी जूझ रहे हैं। यानी प्रदेश के आधे जिले अभी भी सामान्य से कम बारिश झेल रहे हैं। सबसे ज्यादा बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ में में 462.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 265.7 मिमी होती है। यानी यहां 74% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। यह प्रदेश का इकलौता जिला है जो बहुत ज्यादा बारिश की श्रेणी में है। मुंगेली भी सामान्य से काफी आगे मुंगेली में 331.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 21% ज्यादा है। यह जिला अधिक बारिश की श्रेणी में शामिल है। वहीं बालोद (+4%), बलौदाबाजार (+9%), बलरामपुर (+6%), दंतेवाड़ा (+14%), दुर्ग (-4%), गरियाबंद (-4%), जांजगीर-चांपा (+13%) में बारिश सामान्य के आसपास बनी हुई है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (+11%), कोरबा (-14%), महासमुंद (+8%), नारायणपुर (-10%), रायपुर (+8%), राजनांदगांव (-13%), सक्ती (+11%), बिलासपुर (-19%) में भी ठीक-ठाक बारिश हुई है। किसानों के लिए महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ फसलों की बुआई का सबसे अहम समय होता है। जिन जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, वहां धान समेत दूसरी फसलों की बुआई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचेगी और किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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