छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल धीमी, 21% कम गिरा पानी:अगले 5 दिन तेज बारिश की संभावना, 4 जिलों में अलर्ट, बिजली गिरने की आशंका

छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर सरगुजा संभाग में देखने को मिला। जहां कई जगह अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों तक उत्तर छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। रविवार को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और जशपुर इन 4 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 13 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। हालांकि, छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार जुलाई के दूसरे सप्ताह कमजोर पड़ गई है। यही वजह है कि 1 जून से 11 जुलाई तक पूरे प्रदेश में औसत से 21% कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में इस अवधि के दौरान 252.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 320.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। सरगुजा में ज्यादा असर, बस्तर में भी अच्छी बारिश पिछले 24 घंटे के दौरान सरगुजा संभाग के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि पूरे मानसून सीजन की बात करें तो अभी भी छत्तीसगढ़ में सामान्य से 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यानी बारिश का सिलसिला बढ़ने के बावजूद प्रदेश अब भी मौसमी औसत से पीछे चल रहा है। दुर्ग में रहा सबसे ज्यादा तापमान प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया। अगले 24 घंटे का अनुमान मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। 2 बड़े मौसमी सिस्टम एक्टिव मौसम विभाग के अनुसार, इस समय 2 बड़े मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं। पहला, पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बना हुआ है। दूसरा, उत्तर-पश्चिम बिहार और आसपास के इलाके में भी ऊपरी हवा का एक चक्रवाती सिस्टम एक्टिव है। सरल भाषा में समझें तो ये दोनों सिस्टम वातावरण में नमी को लगातार अपनी ओर खींच रहे हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं इन सिस्टमों की वजह से मध्य भारत, खासकर छत्तीसगढ़ तक पहुंच रही हैं। इससे बादल लगातार बन रहे हैं और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति बनी हुई है। 13 जुलाई से इन सिस्टमों का असर थोड़ा और बढ़ने की संभावना है, इसलिए बारिश भी पहले के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। रायपुर का मौसम रायपुर में रविवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। बीच-बीच में बारिश हो सकती है। गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आधे जिले बारिश की कमी से जूझ रहे पिछले कुछ दिन हुई अच्छी बारिश के बाद छत्तीसगढ़ में मानसून की चाल धीमी पड़ गई है। 11 जुलाई तक प्रदेश में 21% कम बारिश हुई है। 32 में से 16 जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। IMD के आंकड़े बताते हैं प्रदेश के एक जिले में बहुत ज्यादा बारिश हुई है। 14 जिलों में बारिश सामान्य हुई है। जबकि 16 जिले बारिश की कमी जूझ रहे हैं। यानी प्रदेश के आधे जिले अभी भी सामान्य से कम बारिश झेल रहे हैं। सबसे ज्यादा बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ में में 462.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 265.7 मिमी होती है। यानी यहां 74% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। यह प्रदेश का इकलौता जिला है जो बहुत ज्यादा बारिश की श्रेणी में है। मुंगेली भी सामान्य से काफी आगे मुंगेली में 331.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 21% ज्यादा है। यह जिला अधिक बारिश की श्रेणी में शामिल है। वहीं बालोद (+4%), बलौदाबाजार (+9%), बलरामपुर (+6%), दंतेवाड़ा (+14%), दुर्ग (-4%), गरियाबंद (-4%), जांजगीर-चांपा (+13%) में बारिश सामान्य के आसपास बनी हुई है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (+11%), कोरबा (-14%), महासमुंद (+8%), नारायणपुर (-10%), रायपुर (+8%), राजनांदगांव (-13%), सक्ती (+11%), बिलासपुर (-19%) में भी ठीक-ठाक बारिश हुई है।

उत्तर छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित बारिश की कमी सबसे ज्यादा सरगुजा संभाग में दिखाई दे रही है। यही वजह है कि मौसम विभाग लगातार उत्तर छत्तीसगढ़ में अच्छी बारिश की संभावना जता रहा है। बस्तर में भी उम्मीद से कम बारिश आमतौर पर बस्तर मानसून का सबसे मजबूत क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इस बार यहां भी कई जिले पीछे हैं। हालांकि दंतेवाड़ा और नारायणपुर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। किसानों के लिए महत्वपूर्ण है यह आंकड़ा जुलाई का पहला पखवाड़ा खरीफ फसलों की बुआई का सबसे अहम समय होता है। जिन जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, वहां धान समेत दूसरी फसलों की बुआई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। यदि 13 से 15 जुलाई के बीच मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचेगी और किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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