ममता गुट बोला- TMC पर बागी खेमे का दावा फर्जी:चुनाव आयोग से कहा पार्टी संविधान के अनुसार सभी समितियां 2027 तक वैध

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) गुट ने सोमवार को चुनाव आयोग (EC) के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए बागी गुट के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सभी संगठनात्मक समितियां पार्टी संविधान के अनुसार 2027 तक वैध हैं और बागी गुट का दावा तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है। चुनाव आयोग में जवाब दाखिल करने के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने बागी नेता रितब्रत बनर्जी की ओर से दिए गए प्रतिवेदन का विस्तृत जवाब सौंपा है। उन्होंने कहा कि बागी गुट का यह दावा कि AITC समिति और राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 2025 में समाप्त हो गया, पूरी तरह गलत है। विशेष अधिवेशन पार्टी संविधान के पूरी तरह खिलाफ था: बनर्जी कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे मानते हैं कि पार्टी 2025 में ही समाप्त हो गई थी, तो फिर उन्होंने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव TMC के चुनाव चिन्ह पर और ममता बनर्जी के हस्ताक्षर वाले नामांकन पत्र के आधार पर कैसे लड़े। उनके मुताबिक, यदि बागी गुट का तर्क सही माना जाए तो उनका चुनाव भी अवैध हो जाएगा और उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। TMC ने यह भी आरोप लगाया कि 22 जून को बागी गुट द्वारा आयोजित विशेष अधिवेशन पार्टी संविधान के पूरी तरह खिलाफ था। पार्टी का कहना है कि संविधान के अनुसार संगठनात्मक प्रक्रिया ब्लॉक स्तर से शुरू होकर जिला और राज्य समितियों के बाद राष्ट्रीय समिति तक पहुंचती है, लेकिन बागी गुट ने इन सभी प्रक्रियाओं की अनदेखी की। पार्टी ने आरोप लगाया कि न तो सार्वजनिक सूचना जारी की गई और न ही सांसदों एवं विधायकों सहित पदेन सदस्यों को आवश्यक नोटिस दिया गया। कल्याण बनर्जी ने बागी गुट की कार्रवाई को पूरी तरह फर्जी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यालयों पर भी अवैध तरीके से कब्जा करने की कोशिश की है। विपक्ष के नेता की मान्यता मूल राजनीतिक दल की सिफारिश पर दी जाती है: TMC TMC ने अपने जवाब में पार्टी के इतिहास का भी उल्लेख किया है। पार्टी ने कहा कि वर्ष 1997 में गठन के समय उसे “घास-फूल” चुनाव चिन्ह मिला था और वर्ष 2000 में उसका नाम बदलकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस किया गया। पार्टी का कहना है कि संविधान में हुए सभी संशोधनों और संगठनात्मक बदलावों की जानकारी चुनाव आयोग को लगातार दी जाती रही है और आयोग ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई। पार्टी ने यह भी दावा किया कि इसी वर्ष फरवरी में चुनाव आयोग को पार्टी संविधान की संशोधित प्रति सौंपी गई थी, जिसे आयोग ने स्वीकार किया था। ऐसे में यह कहना कि पार्टी की समितियां 2025 में समाप्त हो गई थीं, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। TMC ने विधानसभा की पूर्व परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता की मान्यता मूल राजनीतिक दल की सिफारिश पर दी जाती है, न कि केवल विधायक दल के स्वतंत्र निर्णय पर। पार्टी ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद बागी विधायक स्वयं विधानसभा अध्यक्ष के पास AITC विधायक दल के रूप में मान्यता मांगने गए थे, जिससे उन्होंने मूल संगठन के अस्तित्व को स्वीकार किया था। पार्टी ने बागी गुट पर चुनाव आयोग के समक्ष खुद को AITC के अधिकृत पदाधिकारी बताकर प्रतिरूपण (Impersonation) करने का भी आरोप लगाया और कहा कि उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेज अधिकृत नहीं हैं, इसलिए उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट, दोनों से अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और पार्टी के संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावे और जवाब मांगे हैं। पिछले सप्ताह बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष खुद को “असली AITC” बताया था, जिसके बाद यह विवाद और तेज हो गया। ——— ये खबर भी पढ़ें… TMC के 20 बागी सांसदों का NCPI में विलय:3 साल पहले पति-पत्नी ने यह पार्टी बनाई; बैंक बैलेंस ₹75 तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के विलय के बाद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) चर्चा में है। रिकॉर्ड के अनुसार, 3 साल पहले 2023 में बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू नाम के कपल ने पार्टी की नींव रखी थी। पूरी खबर पढ़ें…

More From Author

जिम्बाब्वे ने 141 रन डिफेंड कर बांग्लादेश को हराया:न्यामहुरी-नगारावा ने 63 रन की साझेदारी बनी जीत की वजह; नाहिद के 6 विकेट बेकार गए

PM मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, फाइटर जेट्स ने एस्कॉर्ट किया:देश की 85% आबादी मुस्लिम, फिर भी गरुड़ एयरलाइन, नोट पर गणेश की तस्वीर छपी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *