अधिकारी की धमकी- मकान को अच्छा बोलो:नहीं तो सामान फेंक देंगे, परिवार बोला- जबरदस्ती पॉजिटिव वीडियो बनवाया; EWS आवास छोड़ नकटी लौट रहे लोग

बेघर हुए नकटी गांव के कई प्रभावितों को अब तक स्थायी ठिकाना नहीं मिल पाया है। जिन परिवारों को प्रशासन ने नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित EWS आवास दिया। वे अब एक-एक कर वापस गांव लौट रहे हैं। जब दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची तो वहां कई परिवारों का सामान वाहनों में लोड हो रहा था। कोई चारपाई बांध रहा था तो कोई बर्तन समेट रहा था। बातचीत में उन्होंने छोटे-छोटे फ्लैट, बिजली-पानी और दूसरी सुविधाओं की कमी की बात कही। इसी दौरान जिला प्रशासन की ओर से जारी वीडियो में नजर आए राजकुमार यादव मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे दबाव बनाकर वीडियो बनवाया गया। राजकुमार ने कहा कि अधिकारियों ने हम पर दबाव बनाया कि अगर कैमरे पर सब कुछ ठीक नहीं बताया तो रात 10 बजे हमारा सामान बाहर फेंक दिया जाएगा। डर के कारण उन्होंने वीडियो में सुविधाओं की बात कही थी, जबकि हकीकत इससे अलग है। अब उनका परिवार ईडब्ल्यूएस आवास छोड़कर वापस गांव लौट रहा है। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… पहले देखिए तस्वीरें… साल 2017-18 में PM आवास योजना की राशि मिली राजकुमार यादव ने बताया कि मुझे यह मकान बिल्कुल पसंद नहीं है। हम यहां नहीं रहेंगे। गांव में जहां हमारा घर तोड़ा गया है, वहीं तिरपाल लगाकर रह लेंगे या कोई दूसरा इंतजाम कर लेंगे। यादव ने कहा कि उनका प्रधानमंत्री आवास भी बुलडोजर कार्रवाई में तोड़ दिया गया। साल 2017-18 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें 1.20 लाख रुपए की सहायता मिली थी, लेकिन इतने पैसों में पूरा मकान नहीं बन सकता था। उन्होंने कहा कि सरकार से मिली राशि के अलावा मैंने अपनी जमा-पूंजी और मेहनत की कमाई लगाकर दो कमरे, एक हॉल, किचन और बाथरूम वाला घर बनाया था। वहीं राजकुमार की पत्नी खेमिन यादव ने कहा कि अधिकारियों ने उनसे वीडियो बनवाकर यह कहलवाया कि नए मकान में बिजली, पानी और दूसरी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब वे लोग इस फ्लैट को छोड़कर जाना चाहते हैं। अधिकारी हमसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाना चाहते हैं। हम कोरे कागज पर साइन नहीं करेंगे और ये दिया हुआ मकान छोड़कर जा रहे हैं। गांव में जानवर हैं, उन्हें छोड़कर यहां कैसे रहें’ मनहरण पाल ने बताया कि उनका परिवार ईडब्ल्यूएस आवास में नहीं रहना चाहता। गांव में उनकी गाय और दूसरे मवेशी हैं, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम अपना गांव छोड़कर यहां क्यों रहें? हमने आधा सामान वापस गांव भेज दिया है और बाकी भी ले जाएंगे। चाहे तंबू डालकर रहना पड़े, लेकिन गांव में ही रहेंगे। मनहरण की पत्नी सेवती पाल ने बताया कि EWS आवास में रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। मेरे 2 बेटे हैं उनकी पत्नियां और बच्चे हैं। हमें एक ही फ्लैट दिया गया है। ऐसे में इतनी छोटी सी जगह में पूरा परिवार आना संभव नहीं है। पुलिस हमें जाने नहीं दे रही है। लेकिन हमें कैसे भी करके अपने गांव पहुंचेंगे। अभी बड़े सामान यहां छोड़ रहे हैं बाद में बड़े सामान भी लेकर जाएंगे। पुलिस ने गाड़ी की चाबी निकाल ली चमेली साहू ने बताया कि उन्हें सेक्टर-30 के ईडब्ल्यूएस आवास में एक कमरा दिया गया है, जबकि उनके परिवार में करीब 20 सदस्य हैं। परिवार में सास-ससुर, बहू, बेटे, नाती-नातिन समेत कई लोग एक साथ रहते हैं। ऐसे में एक छोटे से कमरे में पूरे परिवार का रहना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि जब वे सामान लेकर जाने लगीं तो पुलिस और अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। चमेली ने बताया कि हम सामान लोडिंग गाड़ी में भरकर गांव ले जा रहे थे। तभी पुलिस ने हमें रोक लिया और गाड़ी की चाबी निकालकर अपने पास रख ली। अब हमारा सामान अभी भी गाड़ी में भरा हुआ है और हमें गांव ले जाने नहीं दिया जा रहा है। गार्डन के बोर से लाना पड़ रहा है पानी EWS आवास के ब्लॉक 71 में जिन लोगों को शिफ्ट किया गया है। यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि यहा सिर्फ नल लगा है। पानी की कोई टंकी नहीं है। सुबह 2 घंटे और शाम को 2 घंटे पानी आता है। लेकिन पानी को स्टोर कैसे करें, इसकी कोई सुविधा नहीं है। वहीं पीने का पानी 200 मीटर दूर बोर से लाना पड़ता है। ऐसे में तीसरी मंजिल तक पानी ले जाने की असुविधा भी है। इन सभी समस्याओं के कारण हम वापस जा रहे हैं। नाम गलत होने पर आवास भी नहीं मिला गुरुवार को दैनिक भास्कर की टीम जब नकटी गांव पहुंची बेघर हुए कई परिवार बारिश में अपने टूटे घर के अंदर बैठे नजर आए। वहीं एक ऐसा घर था जहां पति-पत्नी और 2 बच्चे बारिश से बचने के लिए अपने घर के टुटे हुए हिस्से पर बैठे थे। वहां बैठी फुलेश्वरी यादव ने बताया कि उनके पति का नाम गलत हो गया है। इस वजह से उन्हें EWS मकान नहीं मिल पाया। उनका घर भी टूट गया है। लेकिन अधिकारी हमें मकान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को लेकर अब कहां जाएं। इसलिए इसी जगह पर बैठे हैं। सरकार ने हमारा मकान तोड़ा दिया है हम यहीं तंबू लगाकर रहेंगे या सरकार हमें पट्टा दे और हमारे रहने की व्यवस्था करें। हाउसिंग बोर्ड का दावा: 77 लोगों ने कर रखा ​था कब्जा नवा रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर जारी विवाद के बीच हाउसिंग बोर्ड ने अपना पक्ष सामने रखा है। सरकार की ओर से भूमि आवंटन और राजस्व प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के साथ दावा किया गया है कि गांव के 77 लोगों ने 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था। इसमें 5 हजार स्क्वेयर फीट से लेकर 10 हजार स्क्वेयर फीट तक अधिक की भूमि शामिल थी। बोर्ड का दावा है कि नकटी की 15.479 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर आवासीय योजना के लिए कार्रवाई वर्ष 2020 में ही शुरू हो गई थी। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। वहीं 2021 के राजस्व दस्तावेज में करीब 3 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल कच्चे मकान और बाड़ी स्वरूप अतिक्रमण दर्ज था। बोर्ड के अनुसार वर्ष 2023 के बाद इस भूमि पर बड़े पैमाने पर पक्के निर्माण कर कब्जा बढ़ा, जो करीब 15 हेक्टेयर पर था। इस संबंध में हाउसिंग बोर्ड ने साल 2020 से लेकर 2023 तक की गई पूरी प्रक्रिया की टाइमलाइन जारी की है। एक नजर में हाउसिंग बोर्ड का दावा ………………….. नकटी गांव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ग्राउंड रिपोर्ट – 350 स्क्वायर फीट के फ्लैट में सिमटी जिंदगी:बुजुर्ग-दिव्यांग तीसरी मंजिल पर शिफ्ट, महिला बोली- भूपेश ने तंबू लगाकर रहने कहा, तभी लड़ाई लड़ पाएंगे नकटी में बारिश-कीचड़ के बीच टूटे मकान में परिवार, VIDEO: धरने पर बेघर, सिंहदेव पहुंचे; बृजमोहन बोले- घर ढहाने वाले अफसरों को माफी नहीं नकटी गांव के विस्थापितों की खुले आसमान में कटी रात: लोग बोले- बिजली काटकर बुलडोजर चलाया, सांसद ने झूठ बोला; प्रभावितों से मिले भूपेश बघेल

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