छत्तीसगढ़ में इस खरीफ सीजन में करीब 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की जगह दलहन-तिलहन की खेती कराई जा सकती है। राज्य सरकार ने किसानों को इसके लिए प्रति एकड़ 15 हजार रुपए का प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। कृषि विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के करीब 38 लाख हेक्टेयर धान रकबे में से कम से कम 50 हजार हेक्टेयर को दूसरी फसलों में बदला जाए। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार यदि 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र धान से दलहन-तिलहन में परिवर्तित होता है तो सरकार पर करीब 200 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। दरअसल, छत्तीसगढ़ की खेती की सबसे बड़ी विशेषता उसकी लो-लैंड कृषि भूमि है। प्रदेश के अधिकांश खेत ऐसे हैं, जहां बरसात का पानी प्राकृतिक रूप से ठहरता है। यही कारण है कि राज्य देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन खेतों में पानी लंबे समय तक ठहरता है, वहां दलहन और तिलहन की तुलना में धान कहीं अधिक उपयुक्त फसल है। ऐसे में केवल आर्थिक प्रोत्साहन से बड़े पैमाने पर फसल परिवर्तन आसान नहीं होगा। सरकार का तर्क है कि धान की फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जबकि दलहन और तिलहन अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देते हैं। इसी वजह से किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हालांकि प्रदेश में सामान्य वर्षों में औसतन पर्याप्त वर्षा होती है। सिंचित के साथ-साथ वर्षा आधारित क्षेत्रों में भी धान प्रमुख फसल बनी रहती है। योजना का लाभ केवल एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को मिलेगा। प्रदेश में करीब 28 लाख किसान इस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। योजना एक नजर में इस खरीफ सीजन 48.65 लाख हेक्टेयर प्रदेश में खरीफ का कुल रकबा 48.65 लाख हेक्टेयर है। इनमें लगभग 38 लाख हेक्टेयर में धान और करीब 10 लाख हेक्टेयर में दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलें ली जाती हैं। इस लिहाज से सरकार का लक्ष्य कुल धान क्षेत्र का करीब 1.3 प्रतिशत हिस्सा दूसरी फसलों में स्थानांतरित करने का है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य धान के लिए कम उपयुक्त क्षेत्रों के किसानों को वैकल्पिक फसल अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इससे पानी की बचत होगी। फसल जोखिम घटेगा। किसानों की आय बढ़ेगी। किसानों को योजना के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उम्मीद है कि धान के 38 लाख हेक्टेयर रकबे में से 50 हजार हेक्टेयर पर किसान धान की अपेक्षा दलहन-तिलहन में बदलेंगे। इसका लाभ किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन के बाद ही मिलेगा। – सीबी लोंढेकर, अपर संचालक कृषि विभाग
