तंग गलियों में फंसी इमरजेंसी…:310 रास्तों में एंबुलेंस और दमकल वाहनों की ‘नो-एंट्री’, अब मैपिंग होगी

राजधानी में आग, हार्ट अटैक या किसी बड़े हादसे की स्थिति में राहत पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है। दैनिक भास्कर ने पुलिस सर्वे से पहले शहर के 70 वार्डों का जायजा लिया तो करीब 310 से अधिक ऐसे स्थान मिले, जहां तंग गलियों और संकरी सड़कों के कारण दमकल और एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को स्ट्रेचर पर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, जबकि आग बुझाने के लिए दूर से पाइपलाइन बिछानी पड़ती है। दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुई हालिया आगजनी घटनाओं के बाद रायपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है। अब पुलिस कमिश्नरी ऐसे इलाकों का सर्वे कर मैपिंग करेगी। बता दें कि पुरानी बस्ती, गोलबाजार, मौदहापारा समेत कई इलाकों में गलियां इतनी संकरी हैं कि एंबुलेंस, दमकल तो दूर, बाइक निकालना भी मुश्किल है। 5 फीट से कम रास्ते, चारपहिया नहीं पहुंचते, राहत पहुंचाना ही मुश्किल गोलबाजार कई गलियां सिर्फ 3 से 4 फीट चौड़ी हैं। गुप्ता दुकान वाली गली समेत कई स्थानों पर दिन में चारपहिया वाहनों का प्रवेश लगभग असंभव रहता है। आग या अन्य आपात स्थिति में राहत पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। रेलवे स्टेशन रोड संकरी गलियों में होटल और लॉज तो बन गए, लेकिन कई भवनों तक इमरजेंसी वाहन नहीं पहुंच सकते। कई जगह चार और पांच मंजिला लॉज ऐसे हैं, जहां फायर फाइटिंग सिस्टम और वैकल्पिक निकास भी नहीं हैं। बांसटाल-शास्त्री मार्केट सड़क किनारे खड़े वाहन और अतिक्रमण के कारण गलियां और संकरी हो गई हैं। होटल, लॉज, रेस्टोरेंट और दुकानों के साथ बड़ी आबादी भी रहती है, जिससे किसी भी हादसे की स्थिति में राहत कार्य प्रभावित होने का खतरा रहता है। पहले भी हुए हादसे, लेकिन नहीं बना सिस्टम
कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, होटल व कोचिंग सेंटरों में संकरे प्रवेश, इमरजेंसी एग्जिट और फायर सिस्टम का अभाव है। बेबीलॉन टावर में आग के दौरान लोग 7वीं मंजिल पर फंस गए थे, जबकि तुलसी होटल अग्निकांड में 5 की मौत हो गई थी। {भोपाल पुलिस कमिश्नरी में भी इसी तरह का ट्रैफिक पुलिस सर्वे करा रही है। सर्वे करने के बाद शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
लगातार आगजनी की घटनाओं को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां बड़ी आबादी रहती है या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं, लेकिन दमकल और एंबुलेंस नहीं पहुंच पातीं। ऐसे स्थानों का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। -डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस कमिश्नर समाधान: अतिक्रमण हटेंगे, बिजली तार व्यवस्थित होंगे
सर्वे के बाद रिपोर्ट निगम को भेजी जाएगी। जहां अतिक्रमण होगा, उसे हटाया जाएगा। यदि कहीं अवैध या बिना अनुमति निर्माण मिला तो कार्रवाई की जाएगी। बिजली के तार भी व्यवस्थित किए जाएंगे। तंग गलियों के लिए छोटे दमकल वाहन और बाइक एंबुलेंस खरीदने का सुझाव दिया जाएगा। 20 फीट चौड़ा मार्ग जरूरी
राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार दमकल वाहनों की आवाजाही के लिए कम से कम 6 मीटर (करीब 20 फीट) चौड़ा मार्ग होना चाहिए। ऊंची इमारतों वाले क्षेत्रों में यह चौड़ाई 7.5 मीटर तक निर्धारित है। साथ ही ऊपर 4.5 मीटर का क्लियरेंस भी जरूरी माना गया है, ताकि बिजली के तार या अन्य अवरोध राहत कार्य में बाधा न बनें।

More From Author

100, 101, 102, 108, 1033… सब होंगे खत्म:छत्तीसगढ़ के इमरजेंसी नंबर होंगे एक हर संकट के लिए सिर्फ डायल 112…

कांग्रेस बोली-सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों की जानकारी छिपाई:रक्षा मंत्रालय बोला- शहीदों को शुरू से सम्मान मिला, राजनाथ का बयान तरीके से दिखाया गया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *