कांग्रेस के सभी 41 जिला अध्यक्षों ने अभनपुर के 30 किमी के दायरे के 9 गांवों में रात बिताई। सामान्य ग्रामीण जनजीवन को महसूस करने और उनकी दिनचर्या को समझने के लिए गांवों में रात बिताना उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है। गांव में पहुंचने के बाद जिला अध्यक्षों ने एक-एक घर चुना। उन्हें वहीं रुकना था। सामान्य दिनों की तरह घर में जो खाना बना, उसे ही खाया। सुबह उन्हें गांवों की साफ-सफाई करनी है। सुबह 11 बजे वे गांवों से रवाना होकर वापस प्रशिक्षण स्थल पहुंचेंगे। 20 जून से अभनपुर के अग्रवाल मंगलभवन में जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण चल रहा है। मंगलवार को चौथे दिन जिला अध्यक्षों को गांव में रुकने और वहां की दिनचर्या को समझने का टास्क दिया गया। पांच-पांच के ग्रुप बनाए गए। उन्हें नवापारा, घोंठ, थनौद, कोलियारी, लखना, काड़ापार, कचना, खपरी, खोसरेंगा गांव में रात बिताई। हर ग्रुप को एक गांव जाने का टास्क दिया गया। गांव कौन सा होगा, कैसे जाना है और किनसे संपर्क करना है और अपने रुकने की व्यवस्था उन्हें खुद करनी है, यह पूरा ट्रेनिंग का हिस्सा था। जिला अध्यक्षों को सिर्फ एक मोबाइल नंबर दिया गया था। नंबर किसका है, यह नहीं बताया गया। साथ ही मोबाइल नंबर के धारक व्यक्ति को यह निर्देश दिया गया था कि वे शाम 6 बजे के बाद ही उस मोबाइल नंबर को स्वीच ऑन करेंगे। शाम 6 बजे जिला अध्यक्षों को रवाना किया गया। इसके बाद ही वे संबंधित मोबाइल नंबर पर संपर्क कर सके। गांव पहुंचने के बाद सबसे पहले उन्होंने मोबाइल धारक के संपर्क किया और उस व्यक्ति के घर पहुंचे, जहां रुकना था। वहां रात रुके। घर वालों से मिले, अपना परिचय दिया और ट्रेनिंग के बारे में जानकारी दी। घर में जो खाना बना, उन्हें वही खाना था। अलग से किसी प्रकार की फरमाइस नहीं करनी थी। सोने के लिए भी अलग से किसी विशेष व्यवस्था की मनाही थी। उस घर में जैसी सुविधा मिले, उसे में सोना था। कहीं पर पलंग या चारपाई नहीं है तो जमीन पर बिछौने में ही सोना था। इसका उद्देश्य यह है कि जिला अध्यक्ष गांव के लोगों की दिनचर्या को समझें। गांव की सुबह आमतौर पर 4 से 5 बजे शुरू हो जाती है। लोग इस समय उठकर अपने घर-आंगन की सफाई, झाड़ू लगाने का काम शुरू कर देते है। जिला अध्यक्षों को भी यही करना है। अंगाकर रोटी, बासी-चटनी, चीला-फरा इत्यादि सामान्य तौर पर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों का दैनिक कलेवा है। जिस घर में जो मिले, उसे वैसे ही खाना और उसके बाद सुबह 11 बजे गांव से रवाना होकर प्रशिक्षण स्थल लौटना है। राहुल का संदेश-जिला अध्यक्ष नेतृत्व के लिए तैयार रहें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिला अध्यक्षों को ट्रेनिंग देने 21 जून को रायपुर आए। उनका चार घंटे का दौरा संगठन के लिए कई राजनीतिक संदेश छोड़ गया। सबसे अहम संकेत यह रहा कि कांग्रेस अब केवल स्थापित चेहरों के भरोसे नहीं रहना चाहती, बल्कि जिला स्तर से नया नेतृत्व तैयार करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी ने अपने प्रवास के दौरान वरिष्ठ नेताओं की बैठक जरूर ली, लेकिन उनका सबसे अधिक समय 41 जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बीता। करीब ढाई घंटे तक चली चर्चा में उन्होंने कहा कि पार्टी में आगे बढ़ने का रास्ता किसी परिवार, गुट या लॉबिंग से नहीं, बल्कि संगठन के लिए किए गए काम से तय होगा। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बड़े लीडर जिलों से ही निकलेंगे। अब तक तीन-चार नेता ही छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र हैं। नई लाइन भी तैयार होनी चाहिए। जनता के बीच सक्रिय नेता ही आगे बढ़ेंगे
राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों से साफ कहा कि जनता के बीच सक्रिय रहने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ाया जाएगा। संगठनात्मक जिम्मेदारियां, टिकट और राजनीतिक अवसर अब केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता के आधार पर तय होंगे। कांग्रेस के भीतर इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब संगठन को नीचे से ऊपर तक पुनर्गठित करने की तैयारी दिखाई दे रही है।
