फीफा वर्ल्ड कप में 15 करोड़ जर्सी बिकने का अनुमान:82 हजार करोड़ तक पहुंचेगा ग्लोबल बिजनेस, लेकिन हर तीसरी जर्सी होगी नकली

फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच शुरू हो चुका है। मैदान पर खिलाड़ी गोल दाग रहे हैं, स्टेडियम दर्शकों के शोर से गूंज रहे हैं, लेकिन इस वर्ल्ड कप की एक और कहानी है, जो मैदान से बाहर लिखी जा रही है। यह कहानी है जर्सियों की, जिनके जरिए फुटबॉल प्रशंसक अपने जुनून को दुनिया के सामने दिखाते हैं। फुटबॉल जर्सी सिर्फ खेल का परिधान नहीं रह गई है। यह पहचान, फैशन और भावनाओं का प्रतीक बन चुकी है। यही वजह है कि फीफा वर्ल्ड कप के साथ जर्सी कारोबार भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है। अंतरराष्ट्रीय रिसर्च एजेंसियों वेरिफाइड मार्केट रिपोर्ट्स और बिजनेस रिसर्च के अनुसार, 2026 में फुटबॉल जर्सी का वैश्विक कारोबार करीब 82 हजार 600 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। खेलों की दुनिया में किसी एक स्पोर्ट्सवियर कैटेगरी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा बाजार माना जा रहा है। फीफा के आंकड़े बताते हैं कि हमेशा बिकने वाली फुटबॉल जर्सियों का करीब 55% हिस्सा केवल वर्ल्ड कप अवधि में बिकता है। वजह भी साफ है, जब कोई टूर्नामेंट अरबों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है तो प्रशंसक अपनी पसंदीदा टीम और खिलाड़ियों से जुड़ने के लिए सबसे पहले उनकी जर्सी खरीदते हैं। अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी हो, ब्राजील का पीला रंग, फ्रांस की नीली किट या फिर पुर्तगाल का लाल परिधान, हर जर्सी अपने साथ कहानी और पहचान लेकर चलती है। पहली बार 48 टीमें वर्ल्ड कप खेल रही हैं और मैचों की संख्या 104 तक पहुंच गई है। इससे जर्सियों की मांग में भी बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। अनुमान है कि टूर्नामेंट के दौरान और उसके आसपास के महीनों में दुनिया भर में 13 से 15 करोड़ जर्सियां बिक सकती हैं। फुटबॉल मर्चेंडाइज का सबसे बड़ा बाजार अभी यूरोप और उत्तरी अमेरिका हैं, लेकिन सबसे तेज रफ्तार एशिया में दिखाई दे रही है। भारत में डिजिटल स्ट्रीमिंग और क्लब फुटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता ने मेसी, रोनाल्डो, एमबापे जैसे खिलाड़ियों की जर्सियों को युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। हालांकि इस चमकदार कारोबार का एक दूसरा पहलू भी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ल्ड कप के दौरान बिकने वाली हर तीन जर्सियों में से एक नकली हो सकती है। कुल 13 से 15 करोड़ जर्सियों की संभावित बिक्री में लगभग 5 से 5.5 करोड़ जर्सियां फर्जी या अनधिकृत हो सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह आधिकारिक जर्सियों की ऊंची कीमतें हैं, जबकि नकली जर्सियां स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेहद सस्ते दामों में उपलब्ध हैं। तीन स्पोर्ट्सवियर कंपनियों के बीच मुकाबला वर्ल्ड कप के साथ मैदान के बाहर एक और मुकाबला चल रहा है। यह मुकाबला दुनिया की तीन बड़ी स्पोर्ट्सवियर कंपनियों- नाइकी, एडिडास, प्यूमा के बीच है। इस वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही 48 टीमों में से 37 की आधिकारिक किट इन्हीं तीन कंपनियों ने तैयार की है। यानी वर्ल्ड कप की लगभग 77 प्रतिशत टीमें इन तीन ब्रांड्स की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रही हैं। जर्सी बिक्री और मर्चेंडाइज से इन कंपनियों को अरबों डॉलर की कमाई की उम्मीद है।

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