CBSE के थ्री-लैंग्वेज रूल लागू करने की जांच होगी:सुप्रीम कोर्ट बोला- शिक्षकों, किताबों दोनों की ही कमी; 1 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE 9वीं क्लास में थ्री-लैंग्वेज रूल पर अपनी सुनवाई में कहा कि थ्री-लैंग्वेज रूल लागू करने के फैसले पर जांच की जाएगी। साथ ही SC ने कहा कि ये देखना होगा कि CBSE के थ्री-लैंग्वेज रूल की वजह से छात्रों और संसाधनों पर बेमतलब का दबाव तो नहीं पड़ रहा। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि इस पॉलिसी को लागू करने में आने वाली जमीनी और व्यवस्थागत दिक्कतों को समझना होगा, खासकर तब जब शिक्षकों और किताबों दोनों की ही कमी है। CBSE और NCERT से जवाब मांगा कोर्ट ने थ्री लैंग्वेज रूल को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, CBSE और नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। CBSE थ्री-लैंग्वेज रूल पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी। पहले 15 जून की तारीख तय की गई थी, लेकिन एडिशनल सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के अनुरोध पर इस जुलाई में रखा गया है। CBSE ने इस सत्र से 9वीं में थर्ड-लैंग्वेज रूल लागू किया CBSE ने कक्षा 9वीं लिए इसी सत्र से थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए CBSE ने 15 मई को सर्कुलर जारी कर इसकी जानकारी दी थी। सर्कुलर के मुताबिक, ये कक्षा 9वीं के लिए 1 जुलाई से लागू होना है। इसके लिए नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा और स्टूडेंट्स को 31 मई तक तीसरी लैंग्वेज चुनने का समय दिया गया है। CBSE बोला- थर्ड-लैंग्वेज के लिए बोर्ड एग्जाम नहीं होगा 15 मई को जारी सर्कुलर में कहा गया था कि तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी हैं। ये नियम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी NEP-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 का हिस्सा है। हालांकि, CBSE ने यह भी स्पष्ट किया कि कक्षा 10 में थर्ड लैंग्वेज के लिए कोई बोर्ड एग्जाम नहीं होगी। बोर्ड ने सर्कुलर में कहा, ‘R3 (तीसरी भाषा) का पूरा मूल्यांकन स्कूल स्तर पर और आंतरिक रूप से किया जाएगा। छात्रों के प्रदर्शन को CBSE सर्टिफिकेट में दर्ज किया जाएगा।’ ‘थर्ड-लैंग्वेज में फेल तो 10वीं का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा’ CJI ने पूछा कि क्या इस नीति के तहत कक्षा 10वीं में कोई परीक्षा देनी होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इसके लिए ‘आंतरिक मूल्यांकन’ होगा। रोहतगी ने कहा, ‘यह आपके फाइनल सर्टिफिकेट में दिखेगा। आपको साबित करना होगा कि आपने इसे पास किया है। जब तक आप इस पेपर में पास नहीं करेंगे, तब तक कक्षा 10वीं का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।’ CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। इसका नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा और स्टूडेंट्स को 31 मई तक तीसरी लैंग्वेज चुनने का समय दिया गया है। जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच करेगी सुनवाई
सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इस मामले में पेरेंट्स की तरफ से पक्ष रखा। जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बैच इस पर सुनवाई करेगी। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनावई कर सकता है। इस फैसले से 9वीं, 10वीं वलास के लगभग 50 लाख बच्चे प्रभावित होंगे। याचिकाकर्ताओं का आरोप CBSE बात से पलटा याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये फैसला CBSE के पहले के फैसले से बिल्कुल उलट है। सीबीएसई ने 9 अप्रैल को साफ कहा था कि तीसरी भाषा वाला नियम (R3) 9वीं क्लास के छात्रों पर 2029-30 सत्र तक लागू नहीं होगा। याचिका में CBSE और NCERT पर आरोप लगाया है कि ये मनमाना फैसला है। पेरेंट्स और टीचर्स का कहना है कि CBSE पहले खुद मान चुका है कि ट्रेंड टीचर्स और टेक्स्टबुक की कमी है, फिर भी स्कूलों पर इसे लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी और सार्थक शिक्षा का मतलब सिर्फ एक नया विषय थोप देना नहीं होता, खासकर तब जब उसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेंड टीचर्स और पढ़ाने का सिस्टम ही मौजूद न हो। याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह सर्कुलर नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के खिलाफ है। NEP में साफ कहा गया है कि किसी भी राज्य या छात्र पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। 9वीं, 10वीं क्लास के लिए थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी अनिवार्य 15 मई को जारी सर्कुलर में CBSE ने अपने सभी स्‍कूलों में कक्षा 9वीं और 10वीं में थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी अनिवार्य किया था। इसके तहत 9वीं और 10वीं के बच्‍चों को तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। इनमें से 2 भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। CBSC का नोटिफिकेशन 1 जुलाई से लागू होगा। इस फैसले से 9वीं और 10वीं के मिलाकर लगभग 50 लाख बच्‍चे प्रभावित होंगे। साथ ही इस साल 10 वीं के बच्चों को तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा। स्‍कूल 30 जून तक थर्ड लैंग्‍वेज चुनेंगे थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी के तहत, एक भारतीय और एक विदेशी भाषा के साथ एक क्षेत्रीय भाषा पढ़ाई जानी है। CBSE ने स्‍पष्‍ट किया है कि स्‍कूल, छात्रों की पसंद के अनुसार थर्ड लैंग्‍वेज चुन सकते हैं। सभी स्‍कूलों को अपनी चुनी हुई लैंग्‍वेज की जानकारी 30 जून तक बोर्ड को देनी होगी। बोर्ड ने कहा कि लैंग्वेज को लेकर ये डिसीजन हाल ही में 2026-27 के लिए रिलीज किए गए NCERT सिलेबस को देखकर लिया गया है। इस सेशन की शुरुआत अप्रैल 2026 से हो चुकी है। लेकिन स्‍कूलों को 1 जुलाई से थर्ड लैंग्‍वेज की पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। 10वीं में थर्ड लैंग्‍वेज का पेपर नहीं होगा CBSE ने साफ किया है कि इस साल 10वीं बोर्ड परीक्षा में थर्ड लैंग्वेज का पेपर नहीं होगा। हालांकि, छात्रों के लिए इसकी पढ़ाई करना जरूरी रहेगा। जब तक थर्ड लैंग्वेज की नई किताबें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक 9वीं के छात्र 6वीं कक्षा की थर्ड लैंग्वेज की किताबों से पढ़ाई करेंगे। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि वे पढ़ाई के लिए स्थानीय और राज्य स्तर का साहित्य उपलब्ध कराएं। इसमें कविताएं, छोटी कहानियां और अन्य साहित्यिक सामग्री शामिल होगी। 1 जुलाई से स्कूलों में किताब उपलब्ध कराने का निर्देश CBSE ने माना कि कुछ स्कूलों को भारतीय मूल की भाषाओं के लिए क्वालिफाइड टीचर्स अरेंज करने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे में स्कूलों को इंटर स्कूल रिर्सोसेस के माध्यम से हाइब्रिड टीचिंग सपोर्ट, रिटायर लैंग्वेज टीचर की नियुक्ति और क्वालिफाइड पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स के हायरिंग की परमिशन भी दी गई है। CBSE तीसरी भाषा के लिए 19 भाषाओं की किताबें तैयार कर रहा CBSE और NCERT कक्षा VI R3 के लिए 19 भाषाओं में किताबें तैयार कर रहे हैं। इनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगु जैसी भाषाएं शामिल हैं। 6वीं क्‍लास में लागू हो चुका है नियम बोर्ड ने इससे पहले 9 अप्रैल को एक सकुर्लर जारी कर 6वीं क्‍लास के लिए थ्री लैंग्‍वेज पॉलिसी अनिवार्य की थी। साथ ही इस फैसले को 7 दिन के अंदर लागू करने का भी निर्देश दिया था। महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला पहला राज्य महाराष्ट्र पिछले साल थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। राज्‍य में 1 से 5वीं क्लास तक के बच्चों के लिए हिंदी पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में नियम लागू है। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को लाया गया नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ————— ये खबर भी पढ़ें… CBSE वेबसाइट पर कोई भी कर सकता है कॉपी चेक:19 साल के छात्र का दावा- मास्‍टर पासवर्ड कोई भी देख सकता है, पोर्टल पर सिक्‍योरिटी नहीं 19 साल के एक स्‍टूडेंट निसर्ग अधिकारी ने दावा किया है कि उसने CBSE की वेबसाइट आसानी से हैक कर ली। निसर्ग एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर है। निसर्ग के ब्लॉग को आंत्रप्रेन्योर डीडी दास ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। पूरी खबर पढ़ें…

More From Author

ओमान 15वां देश जिसपर ट्रम्प ने हमले की धमकी दी:अब तक 7 देशों पर अटैक किया, 4 देशों को अमेरिका में मिलाने की चेतावनी दी

दिल्ली-MP में बारिश, हरियाणा-उत्तराखंड में ओले गिरे:छत्तीसगढ़ में आंधी से पेड़ उखड़े; राजस्थान-MP समेत 15 राज्यों में कल से गर्मी से राहत संभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *