फ्रांस में 51 साल के पूर्व बैंक मैनेजर को गर्लफ्रेंड का 7 साल तक शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण करने के मामले में 25 साल जेल की सजा सुनाई गई। आरोपी पर महिला को हिंसा और जबरन यौन संबंधों के लिए मजबूर करने का आरोप था। 42 साल की पीड़ित का नाम लेटेसिया आर है। उसने मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि बैंककर्मी गिलौम बुची ने सेक्स गेम रिश्ते का बहाना बनाकर उन्हें धीरे-धीरे अपने कंट्रोल में लिया और फिर देह व्यापार में धकेल दिया। वह उन्हें अपने दोस्तों, सहकर्मियों और अजनबियों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था और ग्राहकों की सूची भी बनवाता था। लेटेसिया ने कहा, “मैंने 487 पुरुषों के बाद गिनती करना बंद कर दिया था। इनमें कुछ लोग ऐसे थे जिनसे मुझे कई बार मिलना पड़ा।” कोर्ट में चार घंटे से ज्यादा समय तक चली बहस के बाद जैसे ही फैसला सुनाया गया, पीड़ित रो पड़ीं, जबकि आरोपी बिना किसी भाव के खड़ा रहा। बेटी के जन्म के एक ही दिन बाद रेप लेटिसिया ने बताया कि यह सिलसिला 2015 में क्रिसमस के समय शुरू हुआ। तब बुची ने उसे हाईवे के पास एक सर्विस स्टेशन पर दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। उसे रेलवे स्टेशन और हाईवे के पास अजनबियों के साथ संबंध बनाने को मजबूर किया जाता था। उसने कहा कि कई बार 24 घंटे में 14 लोग तक आते थे। लेटिसिया ने कहा कि शुरुआत में उसे लगा था कि यह सिर्फ हल्के-फुल्के सेक्स गेम्स होंगे और अगर उन्हें कुछ पसंद नहीं आया तो सब रुक जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे हालात बेहद हिंसक होते गए। जब वह किसी बात से इनकार करती थीं तो आरोपी उन्हें मुक्के और लात मारता था। कई जब उसका यौन शोषण हो रहा होता था तो कई बार आरोपी फोन पर ये सब सुनता रहता था। लेटिसिया ने बताया कि बुची ग्राहकों का इंतजाम करता, पैसे तय करता और कमाई का हिस्सा खुद रखता था। पीड़ित ने बताया कि 2017 में बेटी के जन्म के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन उसे एक ट्रक ड्राइवर के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। महिला चार बच्चों की मां है। हालांकि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि उसके कितने बच्चे आरोपी के साथ संबंध के दौरान उसके साथ रह रहे थे। जान से मारने की धमकी देता था बुची सुनवाई के दौरान बुची ने गला दबाने, शरीर जलाने, बेस्टियलिटी (पशुओं से जुड़े यौन कृत्य) और स्कैटोफिलिया (मानव मल से जुड़ी चीजों से यौन उत्तेजना महसूस) जैसे कई काम स्वीकार किए। लेकिन उसने दावा किया कि यह सब आपसी सहमति से हो रहा था। उसने अदालत में कहा कि उसे नहीं लगता था कि वह अपनी पार्टनर को नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि सरकारी वकील ने कोर्ट में ऐसे मैसेज और वॉइस रिकॉर्डिंग पेश किए जिनमें बुची महिला को आदेश न मानने पर जान से मारने की धमकी देता दिखा। इससे साबित हुआ कि महिला दबाव और डर में यह सब करने को मजबूर थी। मामले में सिर्फ यौन हिंसा ही नहीं बल्कि बेहद क्रूर शारीरिक हिंसा के आरोप भी हैं। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में लेटिसिया की चीखें और रोने की आवाज सुनाई देती है, जबकि एक ग्राहक उसे छड़ी, बेल्ट और लकड़ी के तख्ते से पीट रहा था। जांचकर्ताओं के मुताबिक जिस लकड़ी के पैडल से उसे मारा गया, उस पर खून के निशान थे। अदालत में पीड़ित के सूजे हुए चेहरे की तस्वीरें भी दिखाई गईं। अभियोजकों ने कहा कि बुची से दूसरी महिलाओं को भी खतरा हो सकता है, इसलिए उसके लिए उम्रकैद की मांग की गई थी। लेकिन अदालत ने उसे 25 साल जेल की सजा सुनाई और कहा कि उसे कम से कम दो-तिहाई सजा काटने के बाद ही पैरोल के लिए आवेदन करने का अधिकार मिलेगा। फ्रांस के चर्चित केस से मिली हिम्मत लेटिसिया ने यह मुकदमा बंद कमरे में चलाने की मांग को ठुकरा दिया। उसने कहा कि उसे अपनी कहानी सार्वजनिक करने की प्रेरणा गिसेल पेलिकॉट नाम की महिला से मिली। पेलिकॉट वही महिला हैं, जिनके पति ने ड्रग्स उन्हें नशीला पदार्थ देकर अजनबियों से रेप करवाया था। वह मामला 2024 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना था। पेलिकोट ने अपने साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले की खुली सुनवाई की मांग की थी और बाद में वह फ्रांस में महिला अधिकारों की प्रतीक बन गईं। हालांकि इस मामले में एक बड़ा फर्क यह था कि बुची महिला को बेहोश नहीं करता था, बल्कि पूरी तरह होश में रखकर अत्याचार करता था। पूरी खबर यहां पढ़ें… यौन शोषण करने वाले दूसरे लोगों को सजा मिलना बाकी अब सवाल उठ रहा है कि पेलिकॉट की तरह लेटिसिया के मामले में भी उन दूसरे पुरुषों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। पीड़ित के वकील फिलिप-आनरी ओनेगर के मुताबिक उन सभी लोगों की पहचान करना बेहद मुश्किल और लंबा काम होता। उन्होंने कहा कि अगर सभी आरोपियों को शामिल किया जाता तो जांच में बहुत ज्यादा समय लग सकता था और आरोपी को हिरासत से रिहा होने का मौका मिल सकता था। वकील के मुताबिक लेटिसिया चाहती थीं कि मुकदमा जल्दी चले। फेमिनिस्ट कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में सिर्फ मुख्य आरोपी पर ध्यान गया और बाकी पुरुष पीछे छूट गए। उनका मानना है कि अगर जांच एजेंसियां पूरी ताकत लगाएं तो दूसरे आरोपियों की पहचान भी हो सकती है। हालांकि इस मामले में वैसा डिजिटल सबूत नहीं मिला जैसा चर्चित पेलिकॉट मामले में मिला था। पेलिकॉट के पति ने अपने कंप्यूटर में वीडियो और नाम सेव कर रखे थे। ———————— ट्रम्प सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड का इस्तीफा:18 अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की हेड हैं; पति कैंसर से जूझ रहे ट्रम्प की सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तुलसी अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड हैं, उनके अंडर 18 सीक्रेट एजेंसियां काम करती हैं। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
