राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही है, वो है संदीप पाठक, जिनका सीधा संबंध छत्तीसगढ़ से रहा है और जिन्हें पार्टी का चुनावी ‘थिंक टैंक’ माना जाता रहा है। AAP के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के तौर पर संदीप पाठक ने कई राज्यों में पार्टी के विस्तार और चुनावी रणनीति को आकार दिया। ऐसे में उनका बीजेपी में जाना न सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सियासत में भी इसके असर को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश प्रभारी रहे संदीप पाठक छत्तीसगढ़ की राजनीति को करीब से समझते थे और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ थी। उनके बीजेपी में जाने के बाद अब प्रदेश में कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है। वहीं छत्तीसगढ़ आप के कार्यकारी अध्यक्ष का कहना है कि उनके जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा। वे सक्रिय ही नहीं थे। पिछले 2 सालों से वे छत्तीसगढ़ आए ही नहीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पार्टी पर ‘सबका विश्वास’ बढ़ रहा है। वहीं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि ये भाजपा की बी टीम है और ओरिजनल पार्टी में जा रहे हैं। आप और भाजपा में अंतर नहीं है। ये लोग मुख्यधारा में वापस पहुंच गए। क्या हुआ शुक्रवार शाम को? शाम करीब 4 बजे दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राघव चड्ढा ने ऐलान किया कि AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसद अब बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। इनमें शामिल नाम: प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल सीधे बीजेपी मुख्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पार्टी जॉइन कर ली। संदीप पाठक का छत्तीसगढ़ कनेक्शन एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने वाले संदीप पाठक की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ से जुड़ी है। मुंगेली जिले के बटहा गांव में रहने वाले किसान शिवकुमार पाठक के बड़े बेटे संदीप का जन्म 4 अक्टूबर 1979 को हुआ। परिवार में उनसे छोटे भाई प्रदीप पाठक और बहन प्रतिभा पाठक हैं। संदीप पाठक की शुरुआती पढ़ाई लोरमी क्षेत्र के गांव में ही हुई। इसके बाद वे छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए बिलासपुर आ गए। यहां से उन्होंने विज्ञान विषय में उच्च शिक्षा हासिल की और MSC पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव रिसर्च की ओर बढ़ा इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, हैदराबाद और नेशनल केमिकल लेबोरेटरी, पुणे से आगे की शिक्षा प्राप्त की। फिर वे हैदराबाद और फिर उच्च अध्ययन के लिए ब्रिटेन चले गए। करीब 6 साल तक ब्रिटेन में रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 2016 में उन्होंने आईआईटी दिल्ली में फिजिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। क्यों अहम है संदीप पाठक का जाना? साल 2016 में संदीप पाठक ने आम आदमी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीति में कदम रखा। संगठन और चुनावी रणनीति में उनकी पकड़ जल्द ही पार्टी के भीतर साफ दिखने लगी। खासकर 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP को मिली प्रचंड बहुमत वाली जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम कारणों में गिना गया। इस सफलता के बाद पार्टी ने उन्हें अप्रैल 2022 में पंजाब से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना। उसी साल दिसंबर में संदीप पाठक को पार्टी का राष्ट्रीय संगठन महासचिव नियुक्त किया गया। इसके साथ ही उन्हें पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकाय, यानी राजनीतिक मामलों की समिति का सदस्य भी बनाया गया, जहां से वे संगठन और चुनावी फैसलों में अहम भूमिका निभाते रहे। संगठनात्मक काम छत्तीसगढ़ तक फैला रहा इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम नाम संदीप पाठक का है, क्योंकि उनका संगठनात्मक काम छत्तीसगढ़ तक फैला रहा है। AAP के विस्तार में उनका रोल राज्यों में रणनीति बनाने का रहा। छत्तीसगढ़ में AAP को खड़ा करने की शुरुआती कोशिशों में उनका योगदान माना जाता है। पाठक अरविंद केजरीवाल के काफी करीबी माने जाते थे। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में भी उनकी भूमिका अहम रही है। करीब एक साल पहले उन्हें पार्टी ने छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया था, जहां संगठन खड़ा करने और नए चेहरों को जोड़ने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। ऐसे में उनके पार्टी छोड़ने को राज्य में AAP के संगठनात्मक ढांचे के लिए झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब उनका बीजेपी में जाना, उस पूरी राजनीतिक लाइन को बदलने जैसा है। AAP के चुनावी रणनीतिकार थे पाठक आम आदमी पार्टी के भीतर संदीप पाठक की भूमिका सिर्फ एक सांसद तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें पार्टी का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP को मिली प्रचंड जीत के पीछे उनकी चुनावी रणनीति को केंद्रीय भूमिका में देखा गया। उम्मीदवार चयन से लेकर कैंपेन प्लानिंग, संसाधनों के प्रबंधन और ग्राउंड लेवल नेटवर्क खड़ा करने तक, पाठक ने पूरे चुनावी ढांचे को व्यवस्थित करने का काम किया। इसके बाद पार्टी ने उन्हें गुजरात, गोवा समेत अन्य राज्यों में विस्तार की जिम्मेदारी भी सौंपी, जहां उन्होंने नए सिरे से संगठन खड़ा करने और स्थानीय स्तर पर कैडर विकसित करने पर जोर दिया। खास तौर पर उनका फोकस बूथ लेवल स्ट्रक्चर मजबूत करने पर रहा, जिसे किसी भी चुनाव में जीत की बुनियाद माना जाता है। यही वजह है कि उन्हें AAP के भीतर इलेक्शन मशीन और सिस्टम का अहम हिस्सा कहा जाता रहा। पंजाब और 2027 चुनाव का सीधा असर यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पंजाब में AAP की सरकार है और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरुआती स्तर पर शुरू हो चुकी हैं। संदीप पाठक उन्हीं नेताओं में रहे हैं, जिन्होंने पंजाब में पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क खड़ा किया, चुनावी कैडर तैयार किया और बूथ मैनेजमेंट को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम किया। ऐसे में उनका बीजेपी में जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि AAP की आगामी चुनावी तैयारियों पर सीधा असर डालने वाला माना जा रहा है, खासकर उस राज्य में जहां पार्टी को अपनी सरकार बचाने की चुनौती होगी। पार्टी पर बढ़ रहा ‘सबका विश्वास’ – साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘आज भारतीय जनता पार्टी न केवल देश, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘सबका विश्वास’ भारतीय जनता पार्टी, एनडीए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लगातार बढ़ता जा रहा है।’ मुख्यमंत्री ने इसे भाजपा की नीतियों और कार्यशैली में बढ़ते भरोसे का संकेत बताते हुए कहा, ‘इसी कारण भाजपा की रीति-नीति से प्रभावित होकर आम आदमी पार्टी के नेता भी जुड़ रहे हैं, उनका हम स्वागत करते हैं।’
भानुप्रतापपुर सीट पर पार्टी को मिले सबसे ज्यादा वोट 2023 विधानसभा चुनाव में कोमल हुपेंडी आप के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष ने कांकेर भानुप्रतापपुर से चुनाव लड़ा था। उन्हें 15,255 वोट (कुल मतों का लगभग 9.2%) मिले थे। यह अब तक का ‘आप’ का छत्तीसगढ़ में किसी भी विधानसभा सीट पर सबसे शानदार प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में पार्टी के 3 कार्यकारी अध्यक्ष पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी के जाने के बाद से ही छत्तीसगढ़ में आप पार्टी नेतृत्व के संकट से जूझ रही थी। हालांकि, बीच में गोपाल साहू को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया। इसके बाद 3 कार्यकारी अध्यक्षों का प्रयोग किया गया। उत्तम जायसवाल, देवलाल नरेटी और उत्तम मिश्रा फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष हैं। राजनीति से जुड़े विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अब तक पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति भी नहीं की जा सकी है। 2 सालों से छत्तीसगढ़ आए ही नहीं पाठक- जायसवाल आप के कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने कहा कि प्रदेश प्रभारी के जाने से छत्तीसगढ़ में पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा। वे सक्रिय ही नहीं थे। पिछले दो सालों से वे छत्तीसगढ़ आए ही नहीं। पार्टी को मजबूत करने हम 90 विधानसभा में 450 ब्लाक अध्यक्ष की नियुक्ति कर रहे हैं। 11693 ग्राम पंचायतों के 21000 हजार गांव में ग्राम समिति का गठन कर रहे हैं। वहीं पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी आप, जयंत गायबधने ने कहा कि आम लोगों ने आम आदमी पार्टी को जिस विश्वास के साथ भाजपा-कांग्रेस के एक विकल्प के रूप में देखा था, उसपर पार्टी खरी नहीं उतर पाई। पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं पर आरोप लगे। इससे लोगों का विश्वास टूटा। चुनावों के समय आए आब्जर्वरों ने कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी। इससे लोग दूर होते गए। ……………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा में: कहा- 10 में से 7 सांसद साथ, अशोक मित्तल ने ED छापे के 10वें दिन भाजपा जॉइन की पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है, इसमें 6 पंजाब से हैं। इसका ऐलान पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। इसके बाद वह भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। पढ़ें पूरी खबर
