भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिजोरम सीमा पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(NIA) ने रूसी एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए लोगों पर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने का आरोप है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह गिरोह म्यांमार के हथियारबंद गुटों को ट्रेनिंग दे रहे था। टूरिस्ट वीजा की आड़ में म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही थी। ये लोग टूरिस्ट वीसा पर भारत आए थे, लेकिन मिजोरम में बिना अनुमति अवैध रूट से पहुंचे और यहां से पड़ोसी देश म्यांमार की सीमा में घुस गए। सूत्रों के अनुसार 8 अन्य यूक्रेनियन की तलाश जारी है। कुल 14-15 लोगों का ग्रुप था। ये लोग यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन पहुंचा रहे थे, जो संभवतः भारत से जुड़े उग्रवादी समूहों तक पहुंच सकते थे। कई बार दे चुके ट्रेनिंग आरोपी कई बार ट्रेनिंग देने आ चुके हैं। इस बार वे गुवाहाटी पहुंचे और फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुसे, जहां ट्रेनिंग दी। भारत लौटने पर एनआईए ने 13 मार्च 2026 को उन्हें पकड़ा। 3 यूक्रेनी नई दिल्ली एयरपोर्ट और अन्य 3 लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पकड़े गए। जबकि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा। अब इनकी डिजिटल फुटप्रिंट और पिछले महीनों की गतिविधियां ट्रैक की जा रही हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है। इस बीच घटना को लेकर पूर्वोत्तरीय राज्यों मणिपुर, असम, मिजोरम आदि में अलर्ट बढ़ा दिया गया है। वैनडाइक है मास्टरमाइंड, लीबिया में विद्रोही लड़ाकों का मददगार मैथ्यू एरॉन वैनडाइक अमेरिका के मैरीलैंड के बाल्टीमोर का रहने वाला है। वह एक भाड़े का सिपाही, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, सुरक्षा विश्लेषक और ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI)’ नाम की संस्था के संस्थापक है। मैथ्यू ने वॉर कॉरेस्पोंडेंट और बिजनेसमैन के तौर पर भी काम किया है। वह पहली बार 2011 में लीबिया के गृह युद्ध के दौरान चर्चा में आया, जब वहां मुअम्मर गद्दाफी के शासन के खिलाफ विद्रोही बलों में शामिल हुआ। इसके बाद उसने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ाई लड़ी, सीरिया में बगावत में मदद की और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन में लोगों को ट्रेनिंग दी। एजेंसी का आरोप है कि वैन डाइक म्यांमार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे, जो भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं। पूर्वोत्तर में ड्रोन वारफेयर का डर म्यांमार गृहयुद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। NIA सूत्रों का मानना है कि ये ड्रोन अब भारत के उग्रवादियों तक पहुंच सकते हैं। इससे पूर्वोत्तर में ड्रोन अटैक का खतरा बढ़ेगा। यहां म्यांमार में चल रहे गृहयुद्ध और जातीय संघर्ष के कारण पहले भी विदेशी मर्सिनरी या ट्रेनर्स के आने की खबरें आ चुकी हैं। मिजोरम-म्यांमार सीमा पर लंबे समय से अस्थिरता बनी है। यहां चिन स्टेट (म्यांमार का हिस्सा, जो मिजोरम से सटा है), अराकान आर्मी (राखाइन में) और अन्य सशस्त्र जातीय संगठन जैसे चिन नेशनल आर्मी, चिन नेशनल फ्रंट आदि सैन्य जुंटा के खिलाफ लड़ रहे हैं। भारत के लिए चिंता इसलिए है कि इनमें से कई गुट भारत के उग्रवादी संगठनों, जैसे उल्फा (आई), एनएससीएन के कुछ गुटों, कुकी नेशनल आर्मी आदि से जुड़े हुए हैं। ये ग्रुप्स हथियार, ड्रग्स और अब ड्रोन टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान करते हैं। ————- ये खबर भी पढ़ें… सीरिया-लीबिया जंग में शामिल रहा US नागरिक भारत में गिरफ्तार, NIA ने 6 यूक्रेनी भी पकड़े नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता से गिरफ्तार किया है। US सिटीजन मैथ्यू 2011 के लीबिया सिविल वॉर और सीरिया गृह युद्ध में सत्ता के खिलाफ लड़ाई में विदेशी फाइटर के रूप में शामिल हुआ था। उसने रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेनी युवाओं को भी ट्रेनिंग दी है। पूरी खबर पढ़ें…
