केंद्र सरकार ने उन खबरों पर जवाब दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि अगर ग्राहकों ने e-KYC नहीं कराया, तो उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि eKYC की जरूरत सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को है, जिनका वेरिफिकेशन अब तक नहीं हुआ है। सरकार ने कहा कि यह कोई नया नियम नहीं है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जो जानकारी दी है, वह पुराने अभियान का ही हिस्सा है। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि ज्यादा से ज्यादा गैस ग्राहक अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवा लें, ताकि सिस्टम में फर्जीवाड़ा न हो। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? घर बैठे कर सकते हैं eKYC ग्राहकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं है। मंत्रालय ने बताया कि eKYC की प्रक्रिया घर बैठे आसानी से और मुफ्त में पूरी की जा सकती है। ग्राहक संबंधित गैस कंपनी के मोबाइल एप के जरिए इसे खुद ही पूरा कर सकते हैं। eKYC के लिए सिर्फ ‘आधार कार्ड’ और ‘रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर’ की ही आवश्यकता होती है। फर्जी ग्राहकों और कालाबाजारी पर लगाम लगेगी सरकार का कहना है कि eKYC कराने का मुख्य उद्देश्य सिस्टम में पारदर्शिता लाना है। इससे ‘घोस्ट कंज्यूमर्स’ यानी उन फर्जी गैस कनेक्शनों को हटाने में मदद मिलती है जो किसी और के नाम पर चल रहे हैं। इसके अलावा इससे एलपीजी की कालाबाजारी रोकने में भी मदद मिलेगी। असल में कानून क्या कहता है? सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के मुताबिक, सरकार सिर्फ उन्हीं सेवाओं या फायदों के लिए आधार अनिवार्य कर सकती है, जहां पैसा सीधे सब्सिडी के रूप में दिया जा रहा हो। गैस कनेक्शन अपने आप में कोई सब्सिडी नहीं है। कोई भी बाजार भाव पर कनेक्शन ले सकता है और करोड़ों लोग बिना किसी सरकारी मदद के पूरी कीमत चुकाकर गैस खरीदते हैं। ऐसे लोगों के लिए आधार बायोमेट्रिक अनिवार्य करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कानून कहता है कि e-KYC सिर्फ उनके लिए जरूरी है जो ‘उज्ज्वला’ या ‘पहल’ स्कीम के तहत सब्सिडी लेते हैं। बाकी सबके लिए यह अपनी मर्जी पर है। 2024 में भी बनी थी इसी तरह भ्रम की स्थिति यह भ्रम पहली बार नहीं फैलाया जा रहा है। जुलाई 2024 में गैस एजेंसियों ने अपना टारगेट पूरा करने के लिए उन ग्राहकों को कनेक्शन काटने की धमकी दी थी जो सब्सिडी नहीं लेते थे लेकिन e-KYC के लिए मना कर रहे थे। तब एक RTI के जवाब में HPCL ने कहा था कि उन्होंने ऐसी कोई अनिवार्य सूचना जारी नहीं की है। ईरान जंग की वजह से देश में LPG संकट अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। इस वजह से e-kyc से जुड़ी आई इन खबरों के बाद अफरा-तफरी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि अब सरकार के स्पष्टिकरण के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम तीन बार बदले सप्लाई संकट की वजह होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
ये खबर भी पढ़े… कैफे ने नींबू पानी पर 5% गैस-क्राइसिस चार्ज वसूला:₹358 के बिल पर ₹17 एक्स्ट्रा लिए; यूजर्स बोले- इसे बनाने में कौन सी गैस लगती है
देशभर में जारी LPG संकट के बीच बेंगलुरु के एक कैफे ने अपने ग्राहक को नींबू पानी के बिल पर 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ (गैस संकट शुल्क) लगा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैफे की रसीद की फोटो वायरल होने के बाद लोग इस पर तरह-तरह की रिएक्शन दे रहे हैं। पूरी खबर पढ़े…
