चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान:फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे

केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। दरअसल जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति भारत में किसी कंपनी, फैक्ट्री, बिजनेस या प्रोजेक्ट में सीधे पैसा लगाता है, तो उसे FDI कहते हैं। स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय स्टार्टअप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा साफ हुई 60 दिन में निवेश पर फैसला, जॉइंट वेंचर बनाना आसान कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक’ अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने और जॉइंट वेंचर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में आसानी होगी। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा… सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं, भारतीय कंट्रोल जरूरी नियमों में ढील के बावजूद सरकार ने सुरक्षा को बरकरार रखा है। संवेदनशील सेक्टर में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल तभी मिलेगा, जब उस कंपनी की मेजोरिटी शेयर-होल्डिंग और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास ही रहे। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी निवेश से देश की सुरक्षा को खतरा न हो और कंपनी का कमांड भारतीय हाथों में ही रहे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया: कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…

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