छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में JPL कोयला खदान के खिलाफ धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। महिलाओं ने महिला थाना कमला पुषाम को लात मारी। पुलिस पर पथराव किया। 3 गाड़ियों में आग लगा दी। मामला तमनार के सीएचपी चौक का है। जानकारी के मुताबिक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में महिला थाना प्रभारी कमला पुषाम घायल हो गई हैं। उन्हें फौरन अस्पताल पहुंचाया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन की टीम लोगों को शांत कराने में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि 14 गांव के लोग JPL कोयला खदान की प्रस्तावित जनसुनवाई के खिलाफ 15 दिनों से धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों को कंट्रोल करने के लिए फिलहाल बड़ी संख्या में फोर्स तैनात है। भीड़ ने 3 गाड़ियों में आग लगाई है। इनमें एक SDM की गाड़ी बताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं है। देखिए हिंसा की तस्वीरें… जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, तनाव पूर्ण माहौल को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 35 से 40 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनमें राधेश्याम शर्मा भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसी के बाद माहौल और ज्यादा बिगड़ने की बात कही जा रही है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस कुछ लोगों को हिरासत में लेने के बाद कोल खदान की गाड़ियों को पार करा रही थी, तभी खुरुसलेंगा में भारी वाहन की चपेट में आने से एक ग्रामीण घायल हो गया। इससे ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ गई। इस दौरान तमनार थाना प्रभारी समझाइश दे रही थी, तभी आक्रोशित महिलाओं ने मारपीट की। इसके बाद पुलिस पर पथराव किया गया। घटना से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी हमला करते नजर आ रहे हैं। जिन महिलाओं ने पीटा, उन्हीं ने पानी भी दिया वहीं एक वीडियो में महिलाएं तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम से मारपीट करती नजर आ रही हैं, जबकि दूसरे वीडियो में वही महिलाएं उन्हें पानी पिलाती दिखाई दे रही हैं। पथराव और झड़प के दौरान घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जबकि गांव में बाहरी लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा है। भीड़ ने तीन वाहनों में आग लगा दी वहीं, उपद्रव के दौरान तीन वाहनों में आग लगा दी गई। इनमें से एक वाहन एसडीएम का बताया जा रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अब पढ़िए कोल खदान के खिलाफ कहां-कहां विरोध प्रदर्शन ? पहला मामला- सरगुजा में 25 पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों पर भी पथराव पहला मामला सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस का है। कोल माइंस विस्तार के खिलाफ ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया। हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, SECL ने अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीनें साल 2001 में अधिग्रहित की थीं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगभग 500 पुलिसकर्मियों के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए गांव पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर… दूसरा मामला- रायगढ़ में कोल माइंस का विरोध वहीं दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में कोयला खदान का है। ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के लोग अपनी जल, जंगल और जमीन को खदान के लिए देने से इनकार कर चुके हैं। 6 नवंबर को उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। कोयला खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को ग्रामीण रद्द की मांग कर रहे थे। 6 नवंबर को करीब 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद ग्रामीण रातभर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। इस धरने में महिलाएं, बच्चे और लड़कियां भी शामिल थीं। पढ़ें पूरी खबर…. तीसरा मामला- कोरबा में CISF ने ग्रामीणों पर बरसाई लाठियां तीसरा मामला कोरबा जिले के SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान का है। गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस दौरान जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। भू-विस्थापित रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पढ़ें पूरी खबर…
