दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर मित्तल के मालिक और ब्रिटेन के टॉप अरबपतियों में शामिल लक्ष्मी मित्तल ब्रिटेन छोड़ रहे हैं। द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबर पार्टी की नई सरकार द्वारा अमीरों पर टैक्स बढ़ाने की तैयारी के चलते मित्तल ने यह फैसला लिया है। भारतवंशी मित्तल की कुल संपत्ति करीब 15.4 अरब पाउंड (करीब 1.8 लाख करोड़ रुपए) है। वे ब्रिटेन के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। 20% का ‘एग्जिट टैक्स’ लगाने की तैयारी में ब्रिटेन
लेबर पार्टी की सरकार, जिसके चांसलर (वित्त मंत्री) रेचल रीव्स हैं, देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 20 अरब पाउंड (करीब 26 अरब डॉलर) का फंड जुटाने की कोशिश कर रही है। 26 नवंबर को रेचल रीव्स का बजट आना है। अफवाहें हैं कि और टैक्स बढ़ोतरी हो सकती है – जैसे हाई रेट इनकम टैक्स (हायर बैंड्स पर), प्रॉपर्टी लेवी में बदलाव या एग्जिट टैक्स (देश छोड़ने पर)। पिछले साल के बजट में ही कैपिटल गेन टैक्स बढ़ाया गया था। वहीं बिजनेस करने वालों के लिए फैमिली बिजनेस ट्रांसफर पर नए टैक्स लगाए गए थे। अब अटकलें हैं कि सरकार 20% का ‘एग्जिट टैक्स’ लगा सकती है, जो ब्रिटेन छोड़ने वाले अमीरों पर लगेगा। इसके अलावा इनहेरिटेंस टैक्स (वारिसाना कर) में बदलाव की खबरों ने लक्ष्मी मित्तल सहित कई बिजनेसमैन को परेशानी में डाल दिया है। मित्तल के परिवार के एक सलाहकार ने कहा कि इनकम टैक्स या कैपिटल गेन टैक्स समस्या नहीं थी… असली मुद्दा इनहेरिटेंस टैक्स है। विदेश से आए कई अमीर लोग समझ नहीं पाते कि उनकी पूरी दुनिया भर की संपत्ति पर ब्रिटिश को टैक्स लगाने का हक क्यों मिलना चाहिए।” सलाहकार का कहना है कि ऐसी नीतियों से अमीर वर्ग ब्रिटेन से भाग रहा है। मित्तल का प्लान क्या है?
मित्तल अब स्विट्जरलैंड को अपना टैक्स बेस बना रहे हैं, जहां टैक्स नियम ज्यादा बेहतर हैं। साथ ही, दुबई में वह प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा रहे हैं। वहां नाइआ द्वीप पर उन्होंने जमीनें खरीदी हैं, जो अमीरों का पसंदीदा स्पॉट है। मित्तल ही नहीं 37 साल के भारतवंशी हर्मन नरुला भी नई टैक्स नीतियों के चलते ब्रिटेन छोड़कर दुबई शिफ्ट हो रहे हैं। वे Improbable AI कंपनी के मालिक हैं और 2 साल की उम्र से ब्रिटेन में ही रह रहे हैं। इसका ब्रिटेन पर असर?
यह कदम ब्रिटेन की सरकार के लिए परेशानी है, क्योंकि मित्तल जैसे लोग न सिर्फ टैक्स देते हैं, बल्कि नौकरियां और निवेश भी लाते हैं। लेबर पार्टी की यह नीति अमीरों को ब्रिटेन छोड़ने का खतरा पैदा कर रही है।रिपोर्ट में कहा गया है कि कई ग्लोबल बिजनेसमैन ब्रिटेन छोड़ने की सोच रहे हैं। सरकार का मकसद कर्ज चुकाना और वेलफेयर योजनाओं को मजबूत करना है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि इससे ब्रिटेन की इकोनॉमी को नुकसान हो सकता है। ब्रिटेन सरकार ने हाल ही में टैक्स नीतियों में कई बदलाव किए
2024 में सत्ता में आई लेबर सरकार ने वादा किया था कि वो इनकम टैक्स, एम्पलाई नेशनल इंश्योरेंस (NI) या VAT नहीं बढ़ाएगी – कम से कम “वर्किंग पीपल” के लिए। लेकिन बिजनेस ओनर्स और अमीरों के लिए राहत कम कर दी गई है। सरकार ने टैक्स नीतियों में कई बदलाव किए 1. कैपिटल गेन टैक्स (CGT): बिजनेस एसेट डिस्पोजल रिलीफ (BADR) और इनवेस्टर्स रिलीफ के तहत CGT रेट 10% से बढ़कर अप्रैल 2025 से 14% हो गया। 2026 में ये 18% तक पहुंच जाएगा। मतलब, अगर आप अपना बिजनेस या इनवेस्टमेंट बेचते हैं, तो प्रॉफिट पर ज्यादा टैक्स कटेगा। कई बिजनेसमैन अप्रैल 2025 से पहले ही डील्स क्लोज कर रहे हैं ताकि पुरानी दरों का फायदा उठा सकें। 2. नेशनल इंश्योरेंस (NI) बढ़ा एम्प्लॉयर्स के लिए: अप्रैल 2025 से एम्प्लॉयर्स NI रेट 13.8% से 15% हो गया, और थ्रेशोल्ड 9,100 पाउंड से घटकर 5,000 पाउंड रह गया। इससे बिजनेस ओनर्स को ज्यादा NI देना पड़ रहा है, जो पेरोल कॉस्ट बढ़ा रहा। HMRC के मुताबिक, 9.4 लाख एम्प्लॉयर्स पर असर पड़ेगा। ये छोटे-मध्यम बिजनेस के लिए खासतौर पर मुश्किल है। 3. इनहेरिटेंस टैक्स (IHT) में सख्ती: पिछले बजट में बिजनेस, फार्मिंग और पेंशन्स पर IHT रिलीफ खत्म कर दिया गया। एग्रीकल्चरल लैंड पर लूपहोल्स बंद किए गए। अब मरने के बाद संपत्ति पर 40% तक टैक्स लगेगा, जो अमीर फैमिलीज को झकझोर रहा है। कई लोग अपनी वेल्थ स्ट्रक्चर्स बदल रहे हैं। 4. नॉन-डॉम रूल्स खत्म: अप्रैल 2025 से नॉन-डॉम स्टेटस (जो विदेशी अमीरों को ओवरसीज इनकम पर टैक्स से छूट देता था) पूरी तरह खत्म। इससे विदेशी बिजनेसमैन ब्रिटेन छोड़ने की सोच रहे हैं, जैसे लक्ष्मी मित्तल का केस।
