आईवियर कंपनी लेंसकार्ट के शेयर की आज बाजार (BSE-NSE) में लिस्टिंग होगी। इस इश्यू को तीन दिन में टोटल 28.27 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। मनीकंट्रोल के मुताबिक, इतना सब्सक्राइब होने के बाद भी कंपनी का शेयर ग्रे मार्केट में करीब 2.5% यानी करीब 10 रुपए गिर गया है। वहीं रिटेल कैटेगरी में इस इश्यू को 7.56 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। इसके अलावा QIB कैटेगरी में इस इश्यू को 40.36 गुना और NII कैटेगरी में 18.23 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। लेंसकार्ट का IPO 31 अक्टूबर को ओपन और 4 नवंबर को क्लोज हुआ था। इस इश्यू का प्राइस बैंड ₹382 से ₹402 प्रति शेयर था। इस इश्यू में निवेशक मिनिमम एक लॉट यानी 37 शेयर्स के लिए 14,874 रुपए से बोली लगा सकते थे। लेंसकार्ट इस IPO के जरिए 70,000 करोड़ रुपए की वैल्यूएशन पर 7,278 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। इसके लिए कंपनी ने 2,150 करोड़ रुपए के 5.35 करोड़ नए शेयर्स जारी किए। वहीं, इसके मौजूदा निवेशकों ने 5,128.02 करोड़ रुपए के 12.76 करोड़ शेयर्स इश इश्यू में बेचे हैं। वित्त वर्ष 2025 में ₹297 करोड़ का मुनाफा कमाया लेंसकार्ट ने वित्त वर्ष 2025 में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने इस साल 297 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया, जबकि पिछले साल (FY24) में उसे 10 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 22% बढ़कर 5,428 करोड़ रुपए से 6,625 करोड़ रुपए हो गया है। FY25 में लेंसकार्ट ने 105 नए कलेक्शन लॉन्च किए वित्त वर्ष 2025 में लेंसकार्ट ने दुनिया भर में 105 नए कलेक्शन लॉन्च किए और 1.241 करोड़ ग्राहकों को 2.72 करोड़ आईवियर यूनिट बेचे हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 100 मिलियन से ज्यादा एप डाउनलोड और 104.97 मिलियन एनुअल वेबसाइट विजिटर दर्ज किए और दुनिया भर में 2,723 स्टोर ऑपरेट किए। 2024 में कंपनी की वैल्यूएशन 5 बिलियन डॉलर थी पिछले साल जून में लेंसकार्ट ने 5 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर 200 मिलियन डॉलर (करीब ₹1,775 करोड़) फंड रेज किया था। लेंसकार्ट आईवियर सेक्टर को डोमीनेट करती है। कंपनी का बिजनेस प्रॉफिटेबल भी है। वहीं थाईलैंड में भी कंपनी अपना बिजनेस तेजी से बढ़ा रही है। लेंसकार्ट की शुरुआत 2010 में हुई थी 2008 में स्थापित लेंसकार्ट ने 2010 में एक ऑनलाइन बिजनेस के रूप में शुरुआत की थी। 2013 में अपना पहला रिटेल आउटलेट खोला था। यह कंपनी भारत में सबसे बड़े आईवियर रिटेल नेटवर्क में से एक को ऑपरेट करती है। पीयूष बंसल और कोलकाता के उनके एक दोस्त ने एक ऐसी कंपनी बनाने का प्लान बनाया जो भारत के लोगों की चश्मा न पहनने की आदत को बदल सके। उन्होंने लिंक्डइन पर एक और को-फाउंडर सुमीत कपाही को ढूंढा। कपाही ने कुछ महीने पहले ही एक आईवियर कंपनी की नौकरी छोड़ी थी। तीनों ने मिलकर 2010 में वैल्यू टेक्नोलॉजी बनाई, जिसमें अलग-अलग ई-कॉमर्स वेबसाइट थी। इसमें लेंसकार्ट, ज्यूलकार्ट, बैगकार्ट और वॉचकार्ट वेबसाइट्स थीं। कुछ समय बाद चश्मे के मार्केट में पोटेंशियल देख कर तीनों ने सिर्फ लेंसकार्ट पर फोकस करना शुरू किया था। IPO क्या होता है? जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर्स को आम लोगों के लिए जारी करती है तो इसे इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO कहते हैं। कंपनी को कारोबार बढ़ाने के लिए पैसे की जरूरत होती है। ऐसे में कंपनी बाजार से कर्ज लेने के बजाय कुछ शेयर पब्लिक को बेचकर या नए शेयर इश्यू करके पैसा जुटाती है। इसी के लिए कंपनी IPO लाती है।
