दुनिया की एयरफोर्स पावर की एक नई रैंकिंग में भारत को तीसरा स्थान मिला है। भारत से आगे सिर्फ अमेरिका और रूस हैं, जबकि चीन चौथे स्थान पर है। इसे लेकर चीन का सरकारी मीडिया बौखला गया है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने चीनी मिलिट्री एक्सपर्ट झांग जुन्शे के हवाले से लिखा कि इस रैंकिंग को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल वास्तविक युद्ध क्षमता ही किसी सेना की असली ताकत दिखाती है, कागज पर दिखाया गया आंकड़ा नहीं। झांग ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय मीडिया की हाइप का मकसद चीन-भारत प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना हो सकता है और यह गलतफहमी की खतरनाक चेन शुरू कर सकता है। भारत के पास विमान कम, ऑपरेशन क्षमता ज्यादा भारत के पास कुल विमानों की संख्या चीन से कम है। भारत के पास 1716 विमान है जबकि चीन के पास 3733 विमान है। लेकिन WDMMA की रिपोर्ट के अनुसार भारत की ऑपरेशन क्षमता कहीं अधिक है। इसका कारण है भारतीय वायुसेना का संतुलित बेड़ा, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक हथियार प्रणाली। WDMMA की रैंकिंग में आंकलन के लिए TruVal Rating का इस्तेमाल होता है। यह सिर्फ विमानों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता, आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक सपोर्ट, हमला और रक्षा क्षमताओं पर आधारित होती है। इसमें सिर्फ विमानों की संख्या नहीं देखी जाती, बल्कि कई कारक शामिल होते हैं। इनमें प्रमुख हैं; इसका मतलब है कि एक देश की एयरफोर्स सिर्फ ज्यादा विमान होने से नहीं, बल्कि संतुलित बेड़ा, आधुनिक हथियार और अलग-अलग तरह की ऑपरेशन क्षमता होने से उच्च रैंक हासिल कर सकती है। यही कारण है कि भारत, चीन से कम विमानों के बावजूद तीसरी सबसे ताकतवर वायुसेना बन गया है। रैंकिंग में चीन से 5 पाइंट आगे भारत यह रैंकिंग वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिटरी एयरक्राफ्ट (WDMMA) ने बनाई है। इसमें 103 देशों और 129 एयर सर्विसेज (आर्मी, नेवी और मरीन एविएशन ब्रांच) को शामिल किया गया है। न्यूजवीक के मुताबिक, रैंकिंग में भारत का ऊपर आना एशिया के रणनीतिक संतुलन में बदलाव का संकेत है। रैंकिंग में अमेरिका, रूस ,भारत और चीन का स्कोर चीन की सरकारी सोच का आईना है ग्लोबल टाइम्स ग्लोबल टाइम्स चीन का एक प्रमुख समाचार पत्र और ऑनलाइन पोर्टल है। यह पीपल्स डेली का हिस्सा है, जो चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का आधिकारिक अखबार है। ग्लोबल टाइम्स को चीन की सरकारी सोच का आईना कहा जाता है। यह अखबार और उसकी अंग्रेजी वेबसाइट दुनिया के सामने चीन की विचारधारा, विदेश नीति को पेश करने का प्रमुख जरिया है। ग्लोबल टाइम्स की स्थापना 1993 में हुई थी। इसका मुख्यालय बीजिंग में है। यह चीनी भाषा और अंग्रेजी दोनों में प्रकाशित होता है। ग्लोबल टाइम्स सीधे तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग के अधीन है। यह अखबार अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की छवि सुधारने और पश्चिमी मीडिया की “चीन-विरोधी” रिपोर्टिंग का जवाब देने की कोशिश करता है।
