मिथुन मन्हास होंगे BCCI के नए अध्यक्ष:JK के लिए अंडर 19, दिल्ली के लिए रणजी खेले; बोर्ड लीड करने वाले पहले अनकैप्ड क्रिकेटर

फॉर्मर डोमेस्टिक क्रिकेट प्लेयर मिथुन मन्हास का भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI का अध्यक्ष बनना तय हो गया है। वो इस पद पर निर्विरोध रूप से चुने जाएंगे। दरअसल रविवार, 21 सितंबर को नॉमिनेशन फाइल करने की लास्ट डेट थी। मन्हास के अलावा किसी और ने अपना नाम दाखिल नहीं किया। मिथुन मन्हास दुनिया की सबसे शक्तिशाली क्रिकेट बोर्ड का नेतृत्व करने वाले पहले अनकैप्ड क्रिकेटर बनकर इतिहास रचेगें। उन्होंने रविवार, 21 सितंबर को BCCI के अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। मन्हास की शुरू से ही स्पोर्ट्स में दिलचस्पी थी। बचपन से क्रिकेट खेलना पसंद था। मामा जी क्रिकेट खेलते थे। उन्हीं को खेलता देखकर क्रिकेटर बनने का ख्वाब देखा था। मन्हास जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, उनके पिता यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू में चीफ मेडिकल ऑफिसर थे। पिता जी के कलीग के बच्चों के साथ खेलना कूदना होता था। उन्होंने 12-13 साल की उम्र से स्टेडियम जाना शुरू किया। वो साइंस कॉलेज के ग्राउंड क्रिकेट खेलते थे। केके गौतम इनके शुरुआती कोच थे। इन्होंने ही मिथुन को क्रिकेट खेलना सिखाया। JK की अंडर 15 टीम में खेले 1990 की शुरुआत की बात है। एक बार JK स्टेट टेस्ट का ट्रायल था। मिथुन ने अपने पिता जी से कहा, ‘मुझे क्रिकेट ट्रायल देने जाना है।’ पिता जी और पूरा परिवार हमेशा से सपोर्टिव था तो इजाजत दे दी। यहां से क्रिकेट की जर्नी शुरू हुई। उस दौर में अंडर–15 हुआ करता था। मन्हास का सिलेक्शन जम्मू कश्मीर की अंडर 15 टीम में हो गया। इसके बाद उधमपुर (आर्मी ग्राउंड) में इन्होंने पहली बार अंडर 15 मैच खेला। इसके बाद मन्हास ने अंडर 16, फिर अंडर 19 खेला, जिसमें उन्होंने शतक बनाया। उन्होंने 3 साल JK के लिए अंडर 19 खेला। साल 1995 में उन्होंने लगभग 750 रन बनाए और देश के हाईएस्ट अंडर 19 स्कोरर बने। बाद में JK टीम के कैप्टन बने। इसी परफॉर्मेंस के चलते उनका सिलेक्शन नॉर्थ जोन के लिए हुआ। इसमें खेलते हुए मन्हास ने अपनी एक आइडेंटिटी बना ली। जूनियर क्रिकेट में उनका नाम चलने लगा। 12वीं की परीक्षा देने के बाद मन्हास कुछ महीनों के लिए पहली बार दिल्ली आए। तब उनकी उम्र 17 साल थे। यहां आकर उन्होंने दिल्ली के प्रीमियर टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और यहीं से खेलने लगे। उस दौर में दिल्ली की टीम में वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा जैसे दिग्गज खेलते थे। दिल्ली के टूर्नामेंट में अच्छा परफॉर्म करने के चलते उनका सिलेक्शन अंडर 19 नेशनल टीम में हुआ। फिर साल 1996 में उनका सिलेक्शन रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की टीम में हुआ। हालांकि, कोई मैच नहीं खेला। फिर अगले साल 1997 में उन्होंने दिल्ली की ओर से रणजी डेब्यू किया। दिल्ली रणजी टीम के कैप्टन बने और ट्रॉफी दिलाई मन्हास ने दिल्ली टीम के लिए लगातार अच्छा परफॉर्म करते हुए मिडिल ऑर्डर में अपनी जगह पक्की की। 2001-02 सीजन में पहली बार रणजी ट्रॉफी में 1000+ रन बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल हुए। फिर वो 2006 से 2008 तक दिल्ली रणजी टीम के कप्तान रहे। उनकी कप्तानी में दिल्ली ने 2007–08 रणजी ट्रॉफी जीती। ये दिल्ली टीम का 16वां रणजी ट्रॉफी खिताब था। दिल्ली डेयरडेविल्स से IPL डेब्यू हुआ रणजी में अच्छा परफॉरमेंस देने के चलते मन्हास का सिलेक्शन IPL के पहले सीजन में हो गया। उन्होंने 2008 में दिल्ली डेयरडेविल्स से IPL डेब्यू किया। फिर साल 2011 में IPL में पुणे वॉरियर्स इंडिया से जुड़े। 2015 में चेन्नई सुपर किंग्स टीम का हिस्सा बने। संन्यास के बाद कोच बने साल 2017 में एक्टिव क्रिकेट से संन्यास के बाद कोचिंग में एंट्री की। IPL फ्रेंचाइजी किंग्स XI पंजाब (अब पंजाब किंग्स XI) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के साथ सपोर्ट स्टाफ के रूप में जुड़े। फिर IPL में गुजरात टाइटंस के साथ कोचिंग स्टाफ में रहे। JK क्रिकेट एसोसिएशन के डायरेक्टर रहे मन्हास साल 2023 में जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में क्रिकेट ऑपरेशन्स डायरेक्टर बने। JK क्रिकेट स्ट्रक्चर को मजबूत करने में योगदान दिया। साथ ही, घरेलू क्रिकेट के खिलाड़ियों को तैयार करने पर काम किया। 28 सितंबर को बोर्ड मीटिंग के बाद नाम अनाउंस होगा मिथुन मन्हास ने रविवार, 21 सितंबर को BCCI मुख्यालय में अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख रविवार दोपहर तक थी। इससे पहले शनिवार, 20 सितंबर को एक केंद्रीय मंत्री के घर हुई मीटिंग में BCCI के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। इसमें सभी ने मिथुन के नाम पर सहमति जताई। हालांकि, आधिकारिक घोषणा 28 सितंबर को बोर्ड की वार्षिक आम बैठक के बाद ही होगी। BCCI अध्यक्ष के लिए क्रिकेटर होना जरूरी 2019 में BCCI के संविधान में संशोधन के बाद आम तौर पर इस तरह के नामांकन बिना किसी विरोध के स्वीकार हो जाते हैं। BCCI का मानना है कि बोर्ड का नेतृत्व किसी क्रिकेटर को करना चाहिए। इससे पहले सौरव गांगुली और रोजर बिन्नी BCCI के अध्यक्ष रह चुके हैं। ____________________ ये खबर भी पढ़ें… जस्टिस पवनकुमार बजंथरी पटना हाईकोर्ट के 46वें चीफ जस्टिस बने: कर्नाटक PSC के स्टैंडिंग काउंसल रहे, 25 साल वकालत अनुभव; जानें कंप्लीट प्रोफाइल जस्टिस पवनकुमार भीमप्पा बजंथरी ने रविवार, 21 सितंबर को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वो उच्च न्यायालय के 46वें चीफ जस्टिस बने हैं। पटना स्थित राजभवन में आयोजित एक समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें शपथ दिलाई। अब तक जस्टिस बजंथरी पटना हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे। पढ़ें पूरी खबर…

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