अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- चीन पर टैरिफ लगाना मुश्किल:राष्ट्रपति ट्रम्प अभी भी सोच रहे; US-चीन टैरिफ डेडलाइन में सिर्फ 1 दिन बाकी

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चीन पर ज्यादा टैरिफ लगाने के सवाल पर कहा कि ऐसा कदम उठाना ज्यादा मुश्किल और नुकसानदेह हो सकता है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि चीन पर टैरिफ लगाने का विचार चल रहा है, लेकिन अभी कोई पक्का फैसला नहीं हुआ है। वेंस ने कहा कि चीन के साथ रिश्ते सिर्फ तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई और मामलों को प्रभावित करते हैं, इसीलिए मामला ज्यादा मुश्किल है। अमेरिका ने चीन पर फिलहाल 30% टैरिफ लगा रखा है। 12 अगस्त को इसकी समय सीमा खत्म हो रही है। चीन ने जुलाई में ₹83 हजार करोड़ का तेल खरीदा अमेरिकी उपराष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जुलाई में चीन ने रूस से 10 अरब डॉलर से ज्यादा का तेल खरीदा है। हालांकि इस साल अब तक की कुल खरीद 2024 की तुलना में 7.7% कम है। चीन ने रूस से तेल खरीदने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी देश के साथ आर्थिक और ऊर्जा सहयोग करना चीन का कानूनी अधिकार है। वह अपने राष्ट्रीय हितों के मुताबिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। ट्रम्प के वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो ने इससे पहले कहा था कि चीन पर और ज्यादा टैरिफ लगाया जाएगा, इसकी संभावना कम है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने से अमेरिका को भी नुकसान हो सकता है। भारत पर अमेरिका ने एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने पिछले सप्ताह रूस से तेल खरीदने की दलील देकर भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया। एक्स्ट्रा टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। भारत ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गलत बताया। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका तेल आयात पूरी तरह बाजार के हिसाब से तय होता है और यह उसके 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है। पिछले महीने ट्रम्प ने रूस पर भी 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने जुलाई में कहा था कि अगर मॉस्को 50 दिन के भीतर यूक्रेन के साथ पीस डील नहीं करता है तो वह रूस पर 100% टैरिफ लगाएंगे। इसके अलावा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी टैरिफ भी लगाएंगे। BRICS देशों पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव लंबित अमेरिका की सीनेट में एक ऐसा प्रस्ताव लंबित है जिसमें कहा गया है कि जो भी देश या कंपनियां रूस से तेल खरीदेंगी, उन पर 500% तक का भारी टैरिफ लगाया जाएगा। इसका मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है ताकि वह यूक्रेन युद्ध में नरमी दिखाए और अपने सबसे बड़े कमाई के जरिए यानी तेल को बेचने में मुश्किलों का सामना करे। इस प्रस्ताव को अब तक 100 में से 80 से ज्यादा सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है, इसलिए इसके पास होने की संभावना काफी ज्यादा है। उम्मीद है कि सितंबर में इस पर वोटिंग होगी। अगर यह पास हो गया तो राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा और रूस से तेल खरीदना बहुत महंगा पड़ जाएगा, जिससे रूस की आमदनी में बड़ी गिरावट आ सकती है।

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