भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर सस्ते होंगे। आज 24 जुलाई को भारत और यूके ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किया। 2022 से इस पर बातचीत चल रही थी। अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं यूके के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और उनके यूके समकक्ष कीर स्टार्मर की उपस्थिति में इस समझौते पर साइन किए। सवाल जवाब में समझिएं इस एग्रीमेंट से क्या-क्या फायदा होगा: सवाल 1: भारत में कौन सी चीजें सस्ती होंगी? जवाब: UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी: सवाल 2: भारत के किन-किन सेक्टर्स को फायदा होगा? जवाब: टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को फायदा होगा। 1. टेक्सटाइल सेक्टर यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। 2. गहने और चमड़े का सामान भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे छोटे बिजनेस (MSME) और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा। साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। 3. इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। 4. दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी। इससे भारत की दवाइयां यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। 6. खाने-पीने का सामान, चाय, मसाले और समुद्री प्रोडक्ट्स बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। 7. केमिकल्स और स्पेशलिटी मटेरियल्स एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना कर दे। 8. ग्रीन एनर्जी और क्लीनटेक ये समझौता रिन्यूएबल एनर्जी में जॉइंट वेंचर्स का रास्ता खोलेगा, जिसमें सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। यूके भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में और निवेश करेगा, जिससे नई टेक्नोलॉजीज का को-डेवलपमेंट होगा। सवाल 3: इस डील से भारत की अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा? जवाब: FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कई तरह से फायदेमंद है: निर्यात में बढ़ोतरी: 99% भारतीय सामानों को UK में शून्य टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, रत्न-आभूषण, मरीन प्रोडक्ट्स, और इंजीनियरिंग सामान जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा। भारत का UK को निर्यात 2030 तक 29 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। रोजगार बढ़ेगा: टेक्सटाइल और चमड़ा जैसे लेबर बेस्ड सेक्टर में नई नौकरियां पैदा होंगी। टेक्सटाइल सेक्टर में रोजगार दोगुना हो सकता है। MSME को बढ़ावा: भारत के 6 करोड़ MSME को फायदा होगा। ये भारत के 40% निर्यात में योगदान देते हैं। इस एग्रीमेंट से उन्हें नए बाजार और बेहतर मार्जिन मिलेंगे। निवेश में बढ़ोतरी: UK की कंपनियां भारत में IT, फाइनेंशियल सर्विसेज और ग्रीन टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाएंगी। यह भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मजबूत करेगा। आर्थिक विकास: यह डील 2030 तक भारत-UK व्यापार को 15% सालाना बढ़ाएगी। यह भारत के 100 बिलियन डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। सवाल 4: यह एग्रीमेंट कब से लागू होगा? जवाब: यह समझौता 24 जुलाई 2025 को साइन हुआ है, लेकिन इसे लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की केंद्रीय कैबिनेट और UK की संसद से मंजूरी जरूरी है। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल चुकी है। सवाल 5: भारत-UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कब शुरू हुई थी? जवाब: भारत और UK के बीच एग्रीमेंट को लेकर बातचीत 13 जनवरी 2022 को शुरू हुई थी, जो करीब 3.5 साल बाद पूरी हुई। 2014 से भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ 3 ऐसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ इसी तरह के समझौतों पर एक्टिवली बातचीत कर रहा है। ये खबर भी पढ़ें भारत का यूरोपियन यूनियन को जवाब:हम वही करेंगे जो हमारे 140 करोड़ लोगों के लिए सही; EU ने रूसी तेल पर पाबंदिया लगाईं विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज यानी, 22 जुलाई को कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है और रूसी तेल खरीदने के मामले में वह अपने हितों की रक्षा करेगा। ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा से ठीक पहले आया है। पश्चिमी देश भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर दबाव बना रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
