चौथी तिमाही में 7.4% की दर से बढ़ी इकोनॉमी:पूरे साल में 6.5% रही GDP; जनवरी-मार्च में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रिकॉर्ड 9.4% ग्रोथ

वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी ग्रोथ 7.4% रही है। पिछले साल की समान तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.4% रही थी। कंस्ट्रक्शन और एग्रीकल्चर सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन के कारण जीडीपी ग्रोथ 7% से ऊपर रही है। वहीं पूरे साल में इकोनॉमी के 6.5% की दर से बढ़ी है। केंद्र सरकार आज यानी, 30 मई को शाम 4 बजे वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के लिए GDP के प्रोविजनल एस्टिमेट जारी किए है। तीसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 6.2% रही थी वित्त वर्ष 2024-2025 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में GDP ग्रोथ 6.2% रही थी। एक साल पहले की समान तिमाही (Q3 FY24) में ये 8.4% रही थी। शुक्रवार 28 फरवरी को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने ये डेटा जारी किया था। बीते 5 साल का GDP का हाल नागेश्वरन ने कहा था- टारगेट पूरा करने 7.6% की दर से बढ़ना होगा भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी.अनंथा नागेश्वरन ने कहा था कि वित्त वर्ष 2024-25 में अर्थव्यवस्था को 6.5% का ग्रोथ टारगेट पूरा करने के लिए चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.6% की दर से बढ़ना होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि प्रयागराज महाकुंभ इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा। इससे 6.5% का GDP ग्रोथ टारगेट पूरा करने में मदद मिलेगी। GDP क्या है? इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है। दो तरह की होती है GDP GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है। कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP? GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है। GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है? GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च। इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर निगेटिव ही पड़ता है।

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