भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने गुरुवार को फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीद डील को मंजूरी दे दी। वहीं अमेरिका से 6 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई। राफेल डील फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17-20 फरवरी के तीन दिवसीय भारत दौरे पर पूरी हो सकती है। डील पूरी होने पर वायुसेना के पास करीब 150 राफेल जेट हो जाएंगे। वहीं नौसेना 26 कैरियर-कम्पैटिबल राफेल विमान शामिल करेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली DAC में राफेल के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव को 16 जनवरी को रक्षा खरीद बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी। अब CCS की परमिशन के बाद ही अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और बॉर्डर एरिया में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता घटकर 29 रह गई है, जबकि अधिकृत संख्या 42 है। 2020 में पहले 5 राफेल फाइटर जेट वायुसेना में शामिल किए गए थे। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की भूमिका को अहम बताया था। नेवी के पास फिलहाल 12 P-8I एयरक्राफ्ट बोइंग का P-8I पोसीडॉन लंबी दूरी का समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी एयरक्राफ्ट है। भारतीय नौसेना के पास फिलहाल 12 P-8I एयरक्राफ्ट हैं, जिन्होंने 40 हजार से ज्यादा सुरक्षित उड़ान घंटे पूरे किए हैं। ये विमान हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और सामरिक गतिविधियों की मॉनिटरिंग में अहम भूमिका निभाते हैं। रक्षा बजट के लिए 7.8 लाख करोड़ मिले केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो कुल बजट का 14.67% है। आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित 2.19 लाख करोड़ रुपए में से 1.85 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खरीद के लिए तय किए गए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24% अधिक है। बजट का पैसा इस तरह खर्च किया जाएगा: मेक इन इंडिया के तहत होगा सौदा यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया जाएगा। डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर इन विमानों को बनाएगी। हाल ही में डसॉल्ट ने डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में अपनी हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर ली है। इस जॉइंट वेंचर में अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी भागीदार है। डसॉल्ट सभी 114 राफेल जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद को इंटीग्रेट करेगा। साथ ही सुरक्षित डेटा लिंक भी उपलब्ध कराएगा, जिससे विमानों को भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा। कंपनी एयरफ्रेम निर्माण के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) भी देगी। इंजन निर्माता साफ्रान और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगी। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पूरा होने के बाद इन विमानों में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 फीसदी तक होने की उम्मीद है। एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में मांग की थी एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी। एयरफोर्स के पास पहले से 36 राफेल विमान है, जबकि नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अंबाला एयरबेस पर राफेल का ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से चालू है। एयरफोर्स के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन (36–38 विमान) शामिल करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है।
