स्वास्थ्य केंद्र में जांच से हुआ खुलासा:गर्भवती 1 छात्रा 6 माह से अनुपस्थित, 2 बिना दाखिले के आश्रम में रहती थीं, अब शादी होगी

बीजापुर जिले की तीन स्कूली छात्राओं के एक साथ गर्भवती होने के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। इसमें ये बात सामने आ रही है कि स्कूलों में पढ़ने वाली दो छात्राओं के घर दूर थे, इसलिए आश्रम की अधीक्षिका ने उन्हें हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने की अनुमति दी थी, जबकि केवल एक ही छात्रा का दाखिला हॉस्टल में था।
मौखिक अनुमति पर ही दोनों छात्राएं हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहीं थीं। जिस छात्रा का दाखिला हॉस्टल में था, वह भी सितंबर से अनुपस्थित थी। यह जानकारी भी सामने आई है कि जनवरी से छात्राओं की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर महीने नियमित जांच हो रही थी और उनका गर्भवती कार्ड भी बना हुआ है। बताया ये भी जाता है कि हॉस्टल से अलग होकर छात्राएं अपने मंगेतरों के साथ ही रह रहीं थीं और अब वे शादी करने की तैयारी भी कर रही हैं। गौरतलब है कि तीन छात्राओं के गर्भवती होने के मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच टीम गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि सभी छात्राएं बीजापुर से करीब 35 किमी दूर गांवों की रहने वाली हैं। इनमें दो छात्राएं 12वीं और एक 11वीं में पढ़ती हैं। मामले का खुलासा तब हुआ, जब गर्भवती एक छात्रा 12वीं की परीक्षा देने पहुंची। परीक्षा देने पहुंची छात्रा बीजापुर जिले के एक बालिका छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही थी। छात्रा का गर्भ ठहर जाने के बाद सितंबर से वह स्कूल नहीं आई। बोर्ड की प्रैक्टिकल परीक्षा में भी वह अनुपस्थित रही। तीनों छात्राओं के गर्भवती होने की जानकारी हॉस्टल प्रबंधन को भी मिली। तीन छात्राओं में से दो के घर पर भास्कर की टीम पहुंची, जहां पता चला कि वे अपने ससुराल में हैं। जब भास्कर की टीम पहुंची, तो पहला सामना छात्रा के मंगेतर से हुआ। उसने बताया कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, जिसके चलते उनकी सगाई हो चुकी थी। अब वह छात्रा से शादी भी करेगा। अधीक्षिका को हटाया गया, लेकिन अफसर बता नहीं रहे बीजापुर के जिस हॉस्टल में ये घटना हुई, वहां की अधीक्षिका को हटा दिया गया है। विभाग ने अधीक्षिका को क्यों हटाया है, ये अफसर भी नहीं बता रहे हैं। वर्तमान अधीक्षिका ने बताया कि एक छात्रा ही उनके हॉस्टल की थी, जो दीपावली की छुट्‌टी पर घर जाने के बाद से वापस लौटी ही नहीं और सीधे परीक्षा देने ही पहुंची। दो अन्य छात्राओं के बारे में अधीक्षिका ने बताया कि उनका दाखिला हॉस्टल में नहीं था। हायर सेकेंडरी स्कूल में वे पढ़ती थीं, लेकिन वे आश्रम में किसकी अनुमति से रहती थीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है, क्योंकि उनकी पोस्टिंग को कुछ ही समय बीता है। विधानसभा में गूंजा मामला, विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने की मांग, आसंदी ने किया अस्वीकार
छात्राओं के गर्भवती होने का मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में चल रहे सत्र के दौरान सोमवार को शून्यकाल में गूंजा। इस मामले में विपक्षी विधायकों ने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा करने की मांग की, लेकिन सरकार के जवाब के बाद आसंदी ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। मामले में शिक्षामंत्री ने बताया कि तीनों छात्राएं हॉस्टल में नहीं रहती थीं। इधर मुद्दे पर चर्चा नहीं होने से नाराज विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी करते हुए हंगामा मचाया और बाद में सदन का बहिष्कार कर दिया। अधीक्षिका-प्राचार्य को नोटिस, जांच के लिए टीम भेजी: डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी लखनलाल धनेलिया ने बताया कि एक छात्रा हॉस्टल में रहती थी। वह भी कई महीनों से अनुपस्थित थी। हॉस्टल अधीक्षिका और स्कूल के प्राचार्य को नोटिस जारी की गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी। आधार कार्ड के अनुसार तीनों छात्राएं नाबालिग हैं। सीडीपीओ की टीम भी मामले की जांच करने छात्राओं के गांव गई हुई है। दो साल पहले भी 2024 में इसी हॉस्टल की छात्रा हुई थी गर्भवती
बीजापुर जिले का जो हॉस्टल एक साथ तीन छात्राओं के गर्भवती होने के चलते सुर्खियों पर आ गया है, वहां पहले भी 2024 में एक छात्रा गर्भवती हुई थी। दो साल बाद फिर इसी आश्रम की दर्ज एक और दो अन्य छात्राएं भी गर्भवती हो गई हैं। बीजापुर जिले के इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी के हवाले से जारी बयान में बाकायदा छात्राओं की संस्थाओं का भी उल्लेख किया गया है, जबकि नियम के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता।

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