कोल इंडिया की सहायक कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) अपना पहला IPO लेकर आ रही है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए ₹21 से ₹23 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह इशू 9 जनवरी 2026 को खुलेगा और 13 जनवरी को बंद होगा। BCCL एक सरकारी कंपनी है और स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास कोयले (कोकिंग कोल) के उत्पादन में भारत में नंबर-1 पर है। इसे 2014 में ‘मिनी रत्न’ का दर्जा मिला था। इस आईपीओ के जरिए प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। निवेशकों के लिए लॉट साइज और जरूरी तारीखें निवेशकों को कम से कम 600 शेयरों के एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी। ऊपरी प्राइस बैंड ₹23 के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम ₹13,800 निवेश करने होंगे। पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ है यह आईपीओ BCCL के इस आईपीओ का कुल साइज 46.57 करोड़ शेयरों का है। यह पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ है। यानी, आईपीओ से मिलने वाला सारा पैसा प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड के पास जाएगा। कोल इंडिया इस इशू के जरिए अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है। आवेदन का तरीका अगर आप फोनपे, गूगल-पे या पेटीएम इस्तेमाल करते हैं और आपके पास पहले से जिरोधा, ग्रो जैसे ब्रोकर के पास डिमैट अकाउंट है तो ये आसानी से हो जाएगा। एप में जाएं और ‘BCCL IPO’ सर्च करें। डिटेल्स भरें और UPI आईडी डालकर पेमेंट अप्रूव कर दें। सरकारी कंपनी होने के बावजूद भी कुछ जोखिम देश का 58% कोकिंग कोल अकेले बनाती है BCCL वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, BCCL की घरेलू उत्पादन में हिस्सेदारी 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास करीब 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार था। कंपनी मुख्य रूप से स्टील और पावर सेक्टर के लिए कोयला तैयार करती है। कंपनी ने 2021 से ‘हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी’ (HEMM) का इस्तेमाल बढ़ाकर अपनी क्षमता में इजाफा किया है। वर्तमान में कंपनी 34 खदानों का संचालन कर रही है। कंपनी झरिया और रानीगंज कोलफील्ड के कुल 288.31 वर्ग किलोमीटर के लीज एरिया में फैली हुई है। क्या होता है कोकिंग कोल और क्यों है इसकी डिमांड? आम कोयले (नॉन-कोकिंग) का इस्तेमाल ज्यादातर बिजली बनाने में होता है, लेकिन कोकिंग कोल का इस्तेमाल स्टील बनाने की भट्ठियों में किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का काफी कोकिंग कोल आयात करता है, ऐसे में BCCL जैसी घरेलू कंपनी की भूमिका बहुत अहम हो जाती है।
