लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि भारत अब लगभग नक्सल-मुक्त हो चुका है। आज यानी 31 मार्च 2026 तक तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अपने भाषण में शाह ने छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों को बचाने का आरोप लगाया और यहां तक कहा ‘भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूं क्या।’ इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया में जवाब देते हुए कहा कि गृहमंत्री का बयान सरासर झूठ है और अगर केंद्र सरकार के पास कोई आपत्ति या सबूत था तो उसे पहले सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। बघेल ने कहा कि नक्सल मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और उनकी सरकार भी लगातार कार्रवाई कर रही थी। शाह के भाषण की 6 बड़ी बातें: 1.बस्तर से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म: बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया। हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है। 2. नक्सलवाद की वकालत करने वालों से सवाल: जो नक्सलवाद की वकालत कर रहे थे, उनसे पूछना चाहता हूं कि आदिवासियों के पास अब तक विकास क्यों नहीं पहुंचा। बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए, क्योंकि इस क्षेत्र पर ‘लाल आतंक’ का साया मंडरा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है। 3. 60 साल तो कांग्रेस सरकार में रही: 70 में से 60 साल कांग्रेस की सरकार रही। आपने क्यों नहीं किया विकास। आज आप हिसाब मांग रहे हो। इंदिरा गांधी माओवादी विचारधारा की गिरफ्त में थीं। उनके कार्यकाल में नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन 12 राज्यों, 17 प्रतिशत भू-भाग 10 प्रतिशत से ज्यादा आबादी में फैल गया। 4. मनमोहन ने कहा था- माओवादी देश की सबसे बड़ी समस्या : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकारा था कि जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा में सबसे बड़ी समस्या माओवादी है। 2014 में बदलाव हुआ। धारा 370 हटी, 35-ए हटा, राम मंदिर बना, CAA कानून आ गया है, विधायी मंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल गया है। 5. नक्सलियों की तुलना भगत सिंह की, ये क्या हिमाकत है : कुछ लोगों ने भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा से तुलना कर दी। ये क्या हिमाकत है। भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े और आप इनकी तुलना संविधान तोड़कर हथियार हाथ में लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों से कर रहे हैं। इनको अपनों का भी खून बहाने से परहेज नहीं है। 6.कुछ लोगों की मानवता सिर्फ हथियार उठाने वालों के लिए: मैं उन ‘अर्बन नक्सलियों’ से एक सवाल पूछना चाहता हूं, जो इन लोगों के समर्थन में सामने आए हैं। वे कहते हैं कि नक्सली न्याय के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए उन्हें मारा नहीं जाना चाहिए। उनसे सहानुभूति रखनी चाहिए। ऐसा लगता है कि आपकी मानवता सिर्फ संविधान का उल्लंघन करने वालों और हथियार उठाने वालों के लिए हैं। यह उन आम नागरिकों तक नहीं पहुंचती, जो इन्हीं हथियारों से मारे जा रहे हैं। तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए- शाह अमित शाह ने सदन में बताया कि तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए, 4,800 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डालकर सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। देश में अब केवल दो ही जिले नक्सल प्रभावित बचे हैं। पिछले तीन सालों में 706 नक्सली मारे गए हैं। शाह का दावा 31 मार्च की डेडलाइन और ‘नक्सल-मुक्त भारत’ नक्सलवाद पर संसद में चर्चा उस समय हुई, जब केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन खत्म होने में एक दिन बाकी था। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में कहा कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था, उसे हासिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है। शाह के मुताबिक, नक्सली हिंसा में भारी गिरावट आई है और देश के अधिकांश हिस्सों में इसका प्रभाव समाप्त हो चुका है। शाह बोले- भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या शाह ने कहा- 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026, तीन तारीख बताना चाहता हूं। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई। पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम, ये सब उसी मीटिंग में डिजाइन किए गए। देर क्यों लगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया। शाह ने कहा- मुझे किसी व्यक्ति के सामने नहीं करना है। भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर। हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे। 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां गया था। नक्सलियों की तुलना भगत सिंह और बिरसा मुंडा से नहीं कर सकते शाह ने कहा कि नक्सलियों की तुलना भगत सिंह और बिरसा मुंडा से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ये लोग लोकतंत्र पर भरोसा नहीं करते और संविधान के खिलाफ हथियार उठाकर निर्दोषों की हत्या करते हैं। शाह ने इसे “हिमाकत” बताते हुए कहा कि भगत सिंह और बिरसा मुंडा अंग्रेजों से लड़े थे, जबकि नक्सलियों के आदर्श माओवादी विचारधारा से जुड़े हैं। शाह का बयान सरासर झूठ भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोकसभा में दिया गया बयान ‘सरासर झूठ’ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की कई बैठकें हुईं, लेकिन कभी केंद्र ने यह नहीं कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों को बचा रही है। बघेल ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी सरकार के खिलाफ कोई आपत्ति थी तो उसका प्रमाण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि नक्सल मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, उनकी सरकार भी लगातार नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी और बस्तर के सुदूर इलाकों तक सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, जिनके बिना आज के ऑपरेशन संभव नहीं होते। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने नक्सल हिंसा में अपने वरिष्ठ नेताओं को खोया है, इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। …………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शाह बोले- जो हथियार उठाएगा, उसे कीमत चुकानी होगी:वामपंथियों ने आदिवासियों को बहकाया; गरीबी ने नक्सलवाद नहीं, नक्सलवाद ने गरीबी फैलाई गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि भारत नक्सल-मुक्त हो गया है, ऐसा हम कह सकते हैं। अपनी डेढ़ घंटे स्पीच के दौरान शाह ने कहा- हमने 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। मैं पूरी व्यवस्था होने के बाद देश को भी सूचित करूंगा। पढ़ें पूरी खबर
