लेह में आज भी कर्फ्यू:गृह मंत्रालय बोला– बांगचुक ने लोगों को भड़काया; लद्दाख को पूर्ण राज्य की मांग पर हिंसा में 4 की मौत

लेह हिंसा पर गृह मंत्रालय ने बुधवार रात बयान में कहा, ‘सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों से भीड़ को उकसाया, हिंसा के बीच अपना उपवास तो तोड़ा, लेकिन हालात काबू के प्रयास की जगह एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए।’ मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक जिन मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे, उन पर हाईलेवल कमेटी की चर्चा जारी है। कई नेताओं ने वांगचुक से हड़ताल खत्म करने का कहा था, लेकिन उन्होंने हड़ताल जारी रखी थी। दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को 15 दिन से भूख हड़ताल पर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्रों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनकी पिछले मांगें पूरी न करने के विरोध में बुधवार को बंद बुलाया था। इसी दौरान हिंसा हुई। छात्रों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। भाजपा ऑफिस और CRPF की गाड़ी में आग लगाई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़प हुई। इसमें 4 लोगों की मौत हुई, 70 से ज्यादा लोग घायल हुए। 30 के करीब सुरक्षाकर्मी भी घायल हैं। प्रशासन ने लेह में बिना अनुमति रैली-प्रदर्शन पर बैन लगाया। जो आज भी लागू है। गृह मंत्रालय के जारी प्रेस नोट की 6 मुख्य बातें… हिंसक प्रदर्शन की 4 तस्वीरें… अब जानिए हिंसा कैसे भड़की…2 पॉइंट में
लेह हिंसा पर किसने क्या कहा… अमित मालवीय, भाजपा IT सेल प्रमुख मालवीय ने लिखा- लद्दाख में दंगा कर रहा यह व्यक्ति फुंतसोग स्टैंजिन त्सेपग हैं, जो अपर लेह वार्ड से कांग्रेस पार्टी का पार्षद है। इसे साफ तौर पर भीड़ को उकसाते और उस हिंसा में हिस्सा लेते देखा जा सकता है, जिसमें बीजेपी कार्यालय और हिल काउंसिल को निशाना बनाया गया। क्या यही वह तरह की अशांति है, जिसके बारे में राहुल गांधी सपने देखते रहे हैं? कविंदर गुप्ता, लेह उपराज्यपाल लेह में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में साजिश की गंध आ रही है। कुछ लोग जानबूझकर लोगों को भड़का रहे हैं और इसकी तुलना बांग्लादेश और नेपाल में हुए विरोध प्रदर्शनों से की जा रही है। विरोध में लद्दाख के बाहर के लोग शामिल हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। शेख बशीर अहमद, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारा मानना है कि 5 अगस्त 2019 के फैसले को लेह या जम्मू-कश्मीर के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। दुख की बात है कि लोग सिर्फ अब ही विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि तब से मांग कर रहे हैं जब उनका क्षेत्र यूनियन टेरिटरी बना था। एम ए बेबी, सीपीआई(एम) महासचिव बीजेपी ने एक बार फिर लेह और त्रिपुरा की जनता से विश्वासघात किया है। जनता का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है, हालांकि पार्टी कार्यालयों पर हमला समाधान नहीं है। प्रशासन की निर्दयी दमनकारी कार्रवाई के कारण 4 लोगों की जान गई। 6 अक्टूबर को सरकार के साथ बैठक इन मांगों को लेकर सरकार के साथ बैठक दिल्ली में 6 अक्टूबर को होगी। साल 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A हटाते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। सरकार ने उस समय ही राज्य के हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था। आर्टिकल 370 हटने के बाद लद्दाख में विरोध शुरू केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना। लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था। इसके बाद लेह और कारगिल के लोग खुद को राजनीतिक तौर पर बेदखल महसूस करने लगे। उन्होंने केंद्र के खिलाफ आवाज उठाई। बीते दो साल में लोगों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन कर पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा मांगते रहे हैं, जिससे उनकी जमीन, नौकरियां और अलग पहचान बनी रही, जो आर्टिकल 370 के तहत उन्हें मिलता था। अगस्त 2024 में गृह मंत्री ने लद्दाख में 5 नए जिले बनाने का ऐलान किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 अगस्त 2024 को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 5 नए जिले बनाने की घोषणा की थी। नए जिलों का नाम जांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग होगा। नए जिलों की घोषणा से पहले लद्दाख में केवल दो जिले थे, लेह और कारगिल। अब इनकी संख्या बढ़कर 7 हो जाएगी। ……………………….. यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-पहलगाम जैसे हमलों को अनदेखा नहीं कर सकते: जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य बनाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में अगस्त महीने में जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा दोबारा बहाल करने के मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की थी। कहा था कि जम्मू-कश्मीर की जमीनी हकीकत और पहलगाम जैसी आतंकी घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ें…

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