रोहिंग्याओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी,पूर्व जजों-वकीलों ने आपत्ति जताई:CJI सूर्यकांत को लेटर लिखा; कहा था- क्या घुसपैठियों को रेड कार्पेट वेलकम देना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर को भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के कानूनी दर्जे पर सवाल उठाए थे। इसे लेकर पूर्व जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को लेटर लिखकर आपत्ति जताई है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा था कि अगर कोई गैर-कानूनी तरीके से भारत में घुस आता है, तो क्या उसे ‘रेड कार्पेट वेलकम’ देना चाहिए, जबकि देश के अपने नागरिक ही गरीबी से जूझ रहे हैं? लेटर में कहा गया है कि रोहिंग्या पर की गई टिप्पणी अमानवीय और संविधानिक मूल्यों के खिलाफ है। रोहिंग्या को दुनिया के सबसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों में बताया गया है। साथ ही रोहिंग्या लोगों को अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा का अधिकार बताया गया। CJI सिर्फ एक कानूनी अधिकारी ही नहीं हैं बल्कि गरीबों के अधिकारों के कस्टोडियन और आखिरी फैसला सुनाने वाले भी हैं, जिनकी बातों का देश की सोच में वजन होता है और उनका असर दूर तक होता है। लेटर की 4 बड़ी बातें CJI ने कहा: एक्टिविस्ट रीता मनचंदा ने याचिका में आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्या लोगों को मई में उठा लिया और अब उनकी कोई जानकारी नहीं है। याचिकाकर्ता ने 2020 के सुप्रीम कोर्ट आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि रोहिंग्या को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही वापस भेजा जा सकता है। केंद्र सरकार की दलील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि याचिका किसी प्रभावित व्यक्ति नहीं, बल्कि एक एक्टिविस्ट ने दायर की है। इसलिए उसका कानूनी अधिकार नहीं बनता। इस पर कोर्ट ने कहा था कि पहले ये तय करना होगा कि रोहिंग्या शरणार्थी हैं या गैर-कानूनी तरीके से आए विदेशी। कोर्ट ने तीन याचिका को तीन ग्रुप में बांटा अदालत ने सभी याचिकाओं को तीन समूहों में बांट दिया है। अब इनकी सुनवाई अलग-अलग होगी। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने क्या कहा- ———————————- ये खबर भी पढ़ें… रोहिंग्या शरणार्थी बच्चे सरकारी स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे:सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या बच्चे सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले सकते हैं। एडमिशन देने से मना किए जाने पर वे हाईकोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट ने यह आदेश UNHRC कार्ड रखने वाले शरणार्थी रोहिंग्या बच्चों के लिए दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

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