भागवत बोले- लिव-इन में रहने वाले जिम्मेदारी नहीं निभाते:शादी शारीरिक संतुष्टि का जरिया नहीं; बच्चों की संख्या तय नहीं लेकिन 3 आदर्श

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि परिवार, शादी, सिर्फ शारीरिक संतुष्टि का जरिया नहीं है। यह समाज की एक इकाई है। भागवत ने आगे कहा कि परिवार वह जगह है जहां एक व्यक्ति समाज में रहना सीखता है। लोगों के मूल्य वहीं से आते हैं। उन्होंने रविवार को कोलकाता में RSS के कार्यक्रम में यह बात कही। परिवार के बारे बात करते हुए भागवत ने कहा कि बच्चों की निश्चित संख्या या शादी की उम्र तय करने का कोई फॉर्मूला नहीं है, लेकिन रिसर्च से पता चलता है कि तीन बच्चे आदर्श हो सकते हैं, और शादी 19 से 25 साल की उम्र के बीच की जा सकती है। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अंडमान और निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल (रिटायर्ड) डीके जोशी भी मौजूद थे। ‘परिवार समाज को आकार देता है’ भागवत ने कहा कि परिवार इकाई संस्कृति, अर्थव्यवस्था का संगम है और कुछ मूल्यों को अपनाकर समाज को आकार देती है। भागवत के बयान की 5 बड़ी बातें… ‘लोग समझते हैं कि RSS हिंदुओं की सुरक्षा की वकालत करता है’ भागवत ने कहा कि अभी लोगों के मन में RSS की धारणा सही हो गई है, लोग समझ रहे हैं कि संगठन हिंदुओं की सुरक्षा की वकालत करता है, और कट्टर राष्ट्रवादी है, लेकिन मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संगठन लोगों के मन से किसी भी गलत धारणा को दूर करने की कोशिश करेगा, लेकिन जो सीखना नहीं चाहता, उसकी मदद नहीं की जा सकती। ————– ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- संघ को BJP के चश्मे से देखना गलत: एक्सरसाइज करने का मतलब यह नहीं कि किसी पर हमला करने की योजना बना रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में कहा कि संघ को BJP के लेंस से देखने की कोशिश न करें। संघ सिर्फ एक सर्विस ऑर्गनाइजेशन नहीं है। संघ को समझना है तो संघ को ही देखना पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें… भागवत बोले- बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक इसलिए हालात मुश्किल:हमें सीमाओं में रहकर मदद करनी चाहिए, क्योंकि भारत ही हिंदुओं का एकमात्र देश बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हमले पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं, इसलिए हालात मुश्किल हैं। हिंदुओं को अगर बांग्लादेश में सुरक्षित रहना है तो एकजुट रहना होगा। दुनियाभर के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

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