राज्य के एक हजार से अधिक ऐसे गांव, जहां आजादी के बाद अब तक कभी बसों का परिचालन नहीं हुआ, अब सड़क परिवहन से जुड़ने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत इन पहुंचविहीन गांवों में चरणबद्ध तरीके से बसें चलाई जाएंगी। फिलहाल 57 रूटों पर बस सेवा शुरू हो चुकी है, जिससे 410 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। आगामी दो माह के भीतर यह संख्या बढ़ाकर एक हजार से ज्यादा गांवों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
परिवहन विभाग ने बस्तर और सरगुजा संभाग के घने वन क्षेत्रों में उन रूटों की पहचान कर ली है, जहां सड़कें मौजूद हैं लेकिन यातायात कम होने के कारण आज तक बसें नहीं चल पाईं। इन इलाकों के ग्रामीणों को मजबूरी में बस पकड़ने के लिए 50 से 80 किलोमीटर दूर तक निजी साधनों या महंगे संसाधनों का सहारा लेना पड़ता था। सर्वे के बाद इन गांवों को योजना में शामिल किया गया है ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए शहरों से सीधा संपर्क स्थापित हो सके।
योजना के तहत 12 नए रुटों पर बस ऑपरेटरों से अनुबंध पूरा हो चुका है। इन रुटों पर बसें चलने से करीब 100 गांवों के ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही बस सुविधा मिलेगी। इसके तुरंत बाद अगले माह के पहले सप्ताह तक 15 और रुटों पर बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इन रुटों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन 15 रुटों से लगभग पौने दो सौ गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अनुबंध के अनुसार प्रत्येक रुट पर एक बस का संचालन होगा, जिसे संचालक एक से दो फेरे लगाने की अनुमति होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना का शुभारंभ किया था। इसके बाद से लगातार नए रुटों पर बस सेवा शुरू की जा रही है। योजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के ग्रामीणों को पहली बार उनके गांव के पास ही सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। ऑपरेटरों को डेढ़ से दो लाख महीना देगी सरकार ताकि बसें लोगों तक पहुंचे पहुंचविहीन गांव में बसें चलाने से यात्री कम मिलने का जोखिम है। यही फिलहाल इस नुकसान की भरपाई शासन करेगी। शासन की ओर से एक साल तक बस ऑपरेटर को 26 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। यानी बसें जितनी किमी चलेंगी, उसी हिसाब से भुगतान होगा। दूसरे साल 24 किमी और तीसरे साल 22 रुपए प्रतिकिमी के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। इस तरह बस ऑपरेटर को औसतन रोज 200 किमी तक बस चलाने पर 5200 भुगतान किया जाएगा। इस तरह महीने में डेढ़ लाख से ज्यादा वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा भी बस ऑपरेटर यात्रियों से निर्धारित दर पर किराया वसूल सकते हैं। बस ऑपरेटर ने अगर पहला साल पूरा होने के पहले अनुबंध का उल्लंघन करते हुए बस चलाने से मना किया तो शासन से जितना भुगतान किया गया होगा, पूरी रकम लौटानी होगी। 780 गांव में सड़क बनाने बजट मंजूर
राज्य में गांवों की संख्या 20360 से अधिक। {ग्राम पंचायतों की संख्या 11693 से अधिक। {केवल बस्तर में 1147 से अधिक गांव। {बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोंडागांव में सैकड़ों गांव। {जिला मुख्यालय के साथ गांव-गांव सड़कें बनाई जा रहीं। {ग्रामीण बस सेवा के साथ 780 गांव में सड़क बनाने बजट मंजूर। ग्रामीणों को मिलेगा सस्ता परिवहन
दूर दराज के ग्रामीण दूसरे साधनों से जिला मुख्यालय पहुंच पाते हैं। इसमें समय और खर्च ज्यादा लगता है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का मकसद हर ग्रामीण को सस्ता परिवहन दिलाना है। सरकार के इसी मकसद को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
डी रविशंकर, अतिरिक्त परिवहन आयुक्त इस वजह से हुआ बस्तर और सरगुजा का चयन
बस्तर और सरगुजा संभाग के कई इलाके घने जंगल व पहाड़ी से घिरे इलाके हैं। यहां 5-7 किमी में गांव बसें हैं। इन गांव वालों को सस्ती परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसी वजह से सरकारी तौर पर योजना शुरू की गई है क्योंकि निजी बस ऑपरेटर केवल उन्हीं रास्तों पर गाड़ियों का परिचालन करते हैं जहां उन्हें ज्यादा यात्री मिलते हैं। बस्तर सरगुजा के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा यात्री नहीं मिलते इसलिए गाड़ियों का परिचालन नहीं किया जाता है। यही वजह है कि इन संभागों का चयन करने के साथ सरकार की ओर से उन्हें वित्तीय सहायता दी जा रही ताकि वे गाड़ियों का परिचालन जारी रखें।
