इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दोहा हमले के लिए कतर से माफी मांगी है। उन्होंने सोमवार को कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी को फोन किया। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के कहने व्हाइट हाउस से फोन किया। इजराइली पीएम आज ही ट्रम्प से मिलने अमेरिका पहुंचे हैं, यह इस साल उनकी चौथी अमेरिका यात्रा है। इजराइली सेना ने 9 सितंबर यानी 20 दिन पहले दोहा में हमास चीफ खलील अल-हय्या को निशाना बनाकर हमला किया था। हमले में अल-हय्या बच गया था, लेकिन 6 अन्य लोगों की मौत हो गई थी, जिसके एक करत का अधिकारी था। इसके बाद कतर इजराइल से नाराज हो गया था, ट्रम्प ने भी नाराजगी जाहिर की थी। नेतन्याहू ने कतर की संप्रभुता के उल्लंघन पर दुख जताया नेतन्याहू ने कतर की संप्रभुता के उल्लंघन और कतरी अधिकारी की मौत पर दुख जताया। यह माफी गाजा में शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिश का हिस्सा है, क्योंकि हमले के बाद कतर ने हमास और इजराइल के बीच मध्यस्थता रोक दी थी। राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए 4 वजहों से अहम है कतर… गाजा जंग पर बात करने अमेरिका पहुंचे नेतन्याहू नेतन्याहू गाजा जंग में सीजफायर पर करने के लिए अमेरिका पहुंचे हैं। मुलाकात से पहले ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा- मुझे बहुत भरोसा है कि गाजा में जल्द ही शांति कायम हो सकती है। उन्होंने सीजफायर के लिए अपने 21 पाइंटर्स के प्लान का जिक्र किया। इसमें तत्काल युद्धविराम, 48 घंटों के भीतर सभी बंधकों की रिहाई, और इजराइली सेना की धीरे-धीरे वापसी शामिल है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि दोनों पक्ष इस योजना को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। इजराइल को कई देशों का विरोध झेलना पड़ रहा है यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब इजराइल अंतरराष्ट्रीय स्तर गाजा युद्ध की वजह से लगातार आलोचना का सामना कर रहा है। हाल ही में UN महासभा में नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के डिप्लोमैट्स ने वॉकआउट कर दिया था। हालांकि, दूसरे देशों के उलट अमेरिका मजबूती से नेतन्याहू के साथ खड़ा है। ट्रम्प साफ कह चुके हैं वो फिलिस्तीन को देश की मान्यता नहीं देंगे। इजराइल के कई सहयोगियों ने फिलिस्तीन को देश की मान्यता दी गाजा जंग में अब तक 66,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। इस वजह से ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे इजराइल के पुराने सहयोगियों ने फिलिस्तीनी देश की मान्यता दे दी है। ये सभी देश इजराइल पर सीजफायर के लिए दबाव बना रहे हैं। दूसरी तरफ इजराइल की कई राजनीतिक दलों को कहना है कि जब तक हमास का पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता है, वे सीजफायर का समर्थन नहीं करेंगे। इन्होंने चेतावनी दी है कि अगर नेतन्याहू सीजफायर के लिए राजी होते हैं, तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे। ———————————————- यह खबर भी पढ़ें… UN में नेतन्याहू के भाषण का बॉयकॉट:इजराइली PM बोले- सभी दुश्मनों को खत्म किया; गिरफ्तारी से बचने 5 देशों का एयरस्पेस छोड़कर अमेरिका पहुंचे इजराइली पीएम नेतन्याहू के भाषण का संयुक्त राष्ट्र (UN) में बॉयकॉट किया गया। नेतन्याहू ने शुक्रवार को जैसे ही UN महासभा में स्पीच देना शुरू किया, 50 देशों के सौ डिप्लोमैट्स हॉल से बाहर चले गए।वॉकआउट करने वाले देशों में ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित वे देश शामिल थे जिन्होंने हाल ही में फिलिस्तीन को मान्यता दी है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
