छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से 2 ननों की गिरफ्तारी मामले में एक नया मोड़ आया है। ननों के साथ पकड़ाई 3 युवतियों में से एक युवती का बयान सामने आया है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ की रहने वाली युवती कमलेश्वरी ने कहा है कि हमें कोई अपहरण कर नहीं ले जा रहा था। मर्जी से आगरा जा रहे थे। कमलेश्वरी ने कहा कि ननों पर झूठा आरोप लगाया गया है। हमें मारकर जबरदस्ती बयान लिया गया। मेरा पूरा परिवार पिछले 5-6 साल से ईसाई धर्म को मान रहा है। बता दें कि दुर्ग जेल में बंद ननों से मिलने आज केरल के चार सांसद रायपुर पहुंचे हैं। वे लगभग 11 बजे मुलाकात करने जाएंगे। इसके बाद रायपुर में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे। 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन से नन की गिरफ्तारी 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर जमकर बवाल हुआ था। 2 मिशनरी सिस्टर (नन) और एक युवक पर 3 आदिवासी युवतियों को UP के आगरा में काम दिलाने के बहाने बेचने ले जाने का आरोप लगाते हुए बजरंग दल ने पकड़ा था। मामला भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी का है। जानकारी के मुताबिक नारायणपुर की युवतियों को आगरा ले जाने वालों का नाम सुखमन मंडावी और मिशनरी सिस्टर प्रीति और वंदना है। ये तीनों लोग कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति नाम की युवती को आगरा लेकर जा रहे थे। फिलहाल दोनों नन दुर्ग जेल में बंद है। …………………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… जेल में बंद ननों से मिलने पहुंची बृंदा करात:कहा- BJP ईसाई समुदाय को टारगेट कर रही; बजरंग दल ने गलत तरीके से विदेशी बताया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सीनियर नेता बृंदा करात दुर्ग जेल में बंद ननों से मिलने पहुंची। उन्होंने कहा कि ननों को झूठे, नकली केस में फंसाया गया है। ये दोनों नन सालों से गरीबों के बीच सेवा कर रही थीं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…
