दिल्ली-NCR में पटाखे बनाने की इजाजत, बिक्री पर रोक:सुप्रीम कोर्ट बोला- सिर्फ ग्रीन क्रैकर्स बना सकेंगे; बैन का आदेश लागू नहीं हो सका

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले शुक्रवार को दिल्ली-NCR में पटाखा बनाने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने कहा कि जिन मैन्युफैक्चरर्स के पास ग्रीन पटाखा बनाने के लिए NEERI और PESO का परमिट हैं, सिर्फ वे ही पटाखा बना सकते हैं। जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक शर्त भी रखी। बेंच ने कहा कि वे कोर्ट के अगले आदेश तक NCR में कोई भी पटाखा नहीं बेचेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूरी तरह बैन न तो संभव है, न ही यह सही है। कोर्ट ने केंद्र से दिल्ली सरकार, पटाखा बनाने और बेचने वालों सहित सभी हितधारकों से बातचीत के बात पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के फैसले को संशोधित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा- दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह बैन के बावजूद, इसे लागू नहीं किया जा सका। जैसा कि हमने बिहार में भी देखा था कि माइनिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण अवैध माफिया खनन के धंधे में लिप्त हो गए थे। इसलिए, इस मामले में एक बैलेंस्ड अप्रोच अपनाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन सिर्फ सर्दियों के मौसम के बजाय पूरे साल तक बढ़ाने का आदेश दिया था। इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसपर अभी सुनवाई चल रही है। 12 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखे सिर्फ दिल्ली-NCR ही क्यों, देशभर में बैन होने चाहिए। 12 सितंबरः कोर्ट रूम में कई पक्षों की दलील और बेंच की टिप्पणी इससे पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखा बैन मामले पर अप्रैल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद जरूरी बताया था। कोर्ट का कहना था कि प्रतिबंध को कुछ महीनों तक सीमित करने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा। लोग पूरे साल पटाखों को इकट्ठा करेंगे और उस समय बेचेंगे, जब बैन लगा होगा। दिल्ली में 14 अक्टूबर को GRAP-1 लागू किया गया था दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार होने के बाद 14 अक्टूबर को दिल्ली NCR में GRAP-1 लागू कर दिया गया था। इसके तहत होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने एजेंसियों को पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों (बीएस -III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल) के संचालन पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। आयोग ने एजेंसियों से सड़क बनाने, रेनोवेशन प्रोजेक्ट और मेंटेनेंस एक्टिविटीज में एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव और डस्ट रेपेलेंट तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी कहा है। ​​​​​​हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है। हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है। ………………………… ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पराली जलाने वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं, किसान हमारे अन्नदाता, लेकिन पर्यावरण को बचाना भी जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और पराली जलाने से संबंधित मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं लेकिन पर्यावरण को बचाना भी जरूरी है। कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि जो किसान पराली न जलाने के सरकारी आदेश का उल्लंघन करते हैं, उनको गिरफ्तार क्यों नहीं करते? पूरी खबर पढ़ें…

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