थाईलैंड में दुनिया की सबसे यंग PM से मिले मोदी:रामायण देखी, कहा- इसकी कहानियां थाई लोगों के जीवन का हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी गुरुवार को 2 दिन के थाईलैंड दौरे पर पहुंचे हैं। यहां पर उन्होंने थाईलैंड की पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। सबसे पहले पीएम मोदी ने 28 मार्च को भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने भारत और थाईलैंड के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि सदियों पुराने संबंध हमारी गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कड़ियों से जुड़े हैं। बौद्ध धर्म के प्रसार ने हमारे लोगों को जोड़ा है। रामायण की कहानियां थाई लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। इससे पहले थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंचकर पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इसके बाद थाई रामायण का मंचन देखा। यहां रामायण को रामाकेन कहा जाता है। इसके बाद PM मोदी ने थाईलैंड की पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा (38) से द्विपक्षीय मुलाकात की। वे दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री हैं। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापारिक संबंधों पर चर्चा की। पीएम के थाईलैंड दौरे की 8 तस्वीरें… पीएम मोदी के संबोधन की 3 प्रमुख बातें… 1. भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे जाएंगे पीएम मोदी ने कहा कि पीएम शिनवात्रा ने मुझे त्रिपिटक भेंट किया। ‘बुद्ध भूमि’ भारत की ओर से, मैंने इसे श्रद्धा पूर्वक स्वीकार किया। पिछले साल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत से थाईलैंड भेजे गए थे। मैं यह घोषणा करते हुए खुशी महसूस कर रहा हूं कि गुजरात के अरावली में 1960 में मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भी थाईलैंड भेजे जाएंगे। 2. भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में थाईलैंड का खास योगदान पीएम ने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और हमारे इंडो पेसिफिक विजन में थाईलैंड का खास योगदान है। आज हमने अपने संबंधों को स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप का रूप देने का फैसला किया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच स्ट्रैटजिक डायलॉग स्थापित करने पर चर्चा की गई। साइबर क्राइम के शिकार भारतीयों को वापस भारत भेजने में थाईलैंड सरकार से मिले सहयोग के लिए थाईलैंड सरकार का शुक्रिया। हमारी एजेंसी ह्यूमन ट्रैफिकिंग और अवैध माइग्रेशन के खिलाफ एकजुट होकर काम करेगी। उत्तर पूर्वी राज्यों और थाईलैंड के बीच टूरिज्म, कल्चर, एजुकेशन आदि क्षेत्रों में सहयोग पर बल दिया गया है। 3. दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच MSME, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट में सहयोग के लिए समझौता हुआ है। रिन्युएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ई-व्हीकल्स, रोबोटिक्स, स्पेस, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्ट अप में सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया गया है। दोनों देशों के बीच फिनटेक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम किया जाएगा। भारत ने थाई पर्यटकों के लिए ई-वीजा देना शुरू कर दिया है। थाईलैंड के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर जा सकते हैं PM मोदी
गुरुवार को PM मोदी थाईलैंड के ऐतिहासिक वात फो मंदिर भी जा सकते हैं। वात फो मंदिर बैंकॉक में स्थित है और अपने विशाल लेटे बुद्ध (रिक्लाइनिंग बुद्धा) प्रतिमा के लिए फेमस है। वात फो थाईलैंड के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसमें 1,000 से अधिक बुद्ध प्रतिमाएं और 90 से अधिक स्तूप हैं। शुक्रवार को थाईलैंड के राजा से मिलेंगे मोदी मोदी शुक्रवार को थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न और रानी सुथिदा से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा PM मोदी BIMSTEC सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन के बाद वे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात कर सकते हैं। यूनुस के मुख्य सलाहकार खलीलुर रहमान ने बुधवार को इसकी संभावना जताई है। बांग्लादेश में पिछले साल हुए सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के प्रमुख नेताओं की यह पहली मुलाकात होगी। 2024 में आसियान सम्मेलन में पाइतोंग्तार्न से मिले थे मोदी 2024 में थाकसिन शिनवात्रा की बेटी पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा थाईलैंड की PM बनीं। अक्टूबर 2024 में वियतनाम में आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी मोदी से पहली मुलाकात हुई थी। मोदी इससे पहले 2016 में थाईलैंड के नौवें राजा भूमिबोल अदुल्यादेज को श्रद्धांजलि देने गए थे। इसके बाद वे 2019 में आसियान शिखर सम्मेलन के लिए थाईलैंड गए थे। उनकी यह तीसरी, लेकिन पहली आधिकारिक यात्रा है। भारत-थाईलैंड संबंध 2 हजार साल से भी ज्यादा पुराना भारत और थाईलैंड के संबंध दो हजार साल से भी अधिक पुराने हैं। प्राचीन काल में भारत से बौद्ध धर्म और हिंदू संस्कृति थाईलैंड पहुंची। थाईलैंड में रामायण को ‘रामकियेन’ के रूप में जाना जाता है, जो वहां की संस्कृति का हिस्सा है। सम्राट अशोक के समय बौद्ध भिक्षुओं ने थाईलैंड में बुद्ध की शिक्षाओं को फैलाया। थाईलैंड को प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ‘स्वर्णभूमि’ (सोने की भूमि) कहा गया है। थाईलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंध भी काफी पुराना और मजबूत रहा है। भारत को 1947 में आजादी मिलने के बाद दोनों देशों ने औपचारिक संबंध की शुरुआत की। 2022 में दोनों ने अपने संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई थी। शीतयुद्ध के दौर में जब दुनिया अमेरिका और रूस के बीच बंट गई थी, तब थाईलैंड भी भारत की तरह गुटनिरपेक्ष रहा। आसियान देशों में थाईलैंड भारत का चौथा बड़ा ट्रेड पार्टनर
साल 2021 में थाई कंपनी ग्लोबल रिन्युएबल सिनर्जी कंपनी लिमिटेड ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 3880 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा निवेश किया था। आसियान देशों में सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया के बाद थाईलैंड भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। बीते कुछ सालों में थाईलैंड ने भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, एग्रो प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, फूड प्रोसेसिंग, हॉस्पिटेलिटी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सेक्टर में बड़ा इन्वेस्टमेंट किया है। दोनों देशों ने 2004 में किया अर्ली हार्वेस्ट स्कीम समझौता
​​​​​दोनों देशों के बीच सितंबर 2004 में बाइलैटरल ट्रेड को बढ़ावा देने के लिए अर्ली हार्वेस्ट स्कीम (EHS) समझौता हुआ था, जिसमें भारत-थाईलैंड कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनोमिक कॉरपोरेशन एग्रीमेंट के तहत 83 प्रोडक्ट शामिल हैं। बता दें कि अर्ली हार्वेस्ट स्कीम स्कीम एक तरह का व्यापार समझौता है, जिसके तहत कुछ वस्तुओं या सेवाओं के तत्काल टैरिफ फ्री कर दिया जाता है। जबकि बाकी प्रोडक्ट्स को बाद में टैरिफ फ्री करने के लिए छोड़ दिया जाता है। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में थाईलैंड अहम एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत की रणनीतिक और आर्थिक नीति है। 2014 में इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लॉन्च किया था। यह नीति भारत की पिछली ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ (Look East Policy) से एक कदम आगे की पॉलिसी है, जिसे 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने शुरू किया था। इस पॉलिसी के जरिए भारत आसियान (ASEAN) देशों और पूर्वी एशियाई देशों के साथ गहरे संबंध बनाना चाहता है। साथ ही व्यापार, निवेश, सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा देना भी इसका मकसद है। भारतीय पर्यटकों की तीसरी सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन है थाईलैंड
2024 में भारत के 21 लाख लोग थाईलैंड घूमने गए थे। ये 2023 की तुलना में लगभग 30% का इजाफा है। मलेशिया और चीन के बाद सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटक थाईलैंड जाते हैं। ​वहीं, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के ‘इंडिया टूरिज्म स्टैटिस्टिक्स 2023’ के मुताबिक, साल 2022 में थाईलैंड से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या 64,196 थी। थाईलैंड की 90% से अधिक आबादी थेरवाद बौद्ध धर्म का पालन करती है, जिसकी जड़ें भारत में हैं। इसलिए थाईलैंड से आने वाले ज्यादातर पर्यटक बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा करते हैं। इनमें बिहार का बोधगया, उत्तर प्रदेश का सारनाथ और कुशीनगर और मध्य प्रदेश का सांची शामिल है। थाईलैंड-म्यांमार के बीच ‘गोल्डन ट्राएंगल’ से भारत में ड्रग्स की सप्लाई थाईलैंड, म्यांमार और लाओस की सीमा से लगे क्षेत्र को गोल्डन ट्राएंगल कहा जाता है। ये इलाका ड्रग्स की तस्करी के लिए जाना जाता है और ऐतिहासिक रूप से दुनिया के सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों में से एक रहा है। इस क्षेत्र से हेरोइन, अफीम, मेथामफेटामाइन जैसी अवैध ड्रग्स की तस्करी होती है। ये ड्रग्स यहां से भारत और दक्षिण एशिया तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा इस गोल्डन ट्राएंगल में कई अपराधी गिरोह और आतंकी समूह सक्रिय हैं, जो अवैध धन, हथियार और मानव तस्करी करते हैं। भारत और थाईलैंड इस तस्करी को रोकने के लिए सुरक्षा और खुफिया सहयोग बढ़ा रहे हैं। …………………………………. थाईलैंड से जुड़ी यह खबर पढ़ें… पुलिस अफसर से प्रधानमंत्री तक का सफर:78 मुस्लिमों को ट्रक में ठूंसकर मारा, 2 तख्तापलट झेला फिर भी सत्ता में फैमिली; बेटी चला रही थाईलैंड साल 1850 की बात है। चीन में होंग शिउचुआन नाम के एक शख्स ने बौद्ध धर्म के खिलाफ अभियान छेड़ रखा था। होंग खुद को ईसा मसीह का छोटा भाई बताता था। उसने किंग राजवंश के खिलाफ बगावत कर चीन के दक्षिणी इलाके को हड़पने की कोशिश की। इससे देश में भीषण गृहयुद्ध शुरू हो गया और इसमें 2 करोड़ लोग मारे गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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