टॉप-10 कंपनियों में 3 की वैल्यू ₹75,855 करोड़ बढ़ी:SBI टॉप गेनर रही, इसकी वैल्यू ₹39,045 करोड़ बढ़ी; इंफोसिस का मार्केट कैप भी बढ़ा

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 3 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 75,855.43 करोड़ रुपए बढ़ गई। इस दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा बढ़ी है। SBI का मार्केट कैप 39,045.51 करोड़ रुपए बढ़कर ₹9.62 लाख करोड़ हो गया है। इंफोसिस की मार्केट वैल्यू ₹31,014.59 करोड़ बढ़कर ₹7.01 लाख करोड़ पहुंच गई है। वहीं ICICI बैंक का मार्केट कैप 5,795.33 करोड़ रुपए बढ़कर ₹10.09 लाख करोड़ हो गया है। रिलायंस समेत 7 कंपनियों की वैल्यू ₹75,549 करोड़ घटी वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और लार्सन एंड टुब्रो की मार्केट वैल्यू में टोटल 75,549.89 करोड़ रुपए की गिरावट आई है। इन सातों कंपनियों को जितना नुकसान हुआ, उससे कहीं ज्यादा फायदा तीन कंपनियों- SBI, इंफोसिस और ICICI बैंक को हुआ है। इन तीनों कंपनियों के मार्केट कैप में कुल 75,855.43 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिलायंस का मार्केट कैप ₹23,952 करोड़ घटा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप ₹23,952 करोड़ घटकर ₹19.72 लाख करोड़ पर आ गया है। लार्सन एंड टुब्रो की मार्केट वैल्यू ₹23,501.8 करोड़ घटकर ₹5.30 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं HDFC बैंक का मार्केट कैप ₹11,615.35 करोड़ घटकर ₹14.32 लाख करोड़ पर आ गया है। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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